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सातवीं बार ऑपरेशन कराया तो निकले 70 स्टोन, कानपुर में 29 साल पहले निकलवा दी थी पित्त की थैली, फिर भी बनती रहीं पथरियां

INT News23 October 2026 at 01:54 pm

GSVM Medical College : कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने एक मरीज की पित्त की नली से 70 पथरियां निकाली हैं. खास बात यह है कि मरीज की पित्त की थैली करीब 29 साल पहले, 1997 में ही निकाल दी गई थी. इसके बाद भी उसे लगातार पेट में दर्द की शिकायत रही. कई बार इलाज और प्रक्रियाएं कराने के बाद भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई. आखिरकार जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला और उनकी टीम ने मरीज की जांच कर पित्त की नली से एक-एक कर 70 पथरियां निकालीं. डॉक्टरों के मुताबिक, फिलहाल मरीज को दर्द से राहत है.

1997 में ही निकलवा दी थी पित्त की थैली

बिल्हौर निवासी मरीज को करीब 29 साल पहले पेट में दर्द की शिकायत हुई थी. जांच में पता चला कि उसकी पित्त की थैली में पथरी है. इसके बाद वर्ष 1997 में ऑपरेशन कर पित्त की थैली निकाल दी गई. मरीज को लगा कि अब पथरी की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो गई है. लेकिन कुछ समय बाद उसके पेट में फिर दर्द होने लगा. जांच में पित्त की नली में पथरी होने की बात सामने आई.

2019 में फिर कराया इलाज

पित्त की नली में पथरी मिलने के बाद मरीज ने वर्ष 2019 में दोबारा इलाज कराया. इसके बावजूद कुछ समय बाद उसकी परेशानी फिर शुरू हो गई. मरीज को लगातार दर्द होता रहा और पित्त की नली में बार-बार पथरी की समस्या सामने आती रही. इसके बाद वर्ष 2026 में भी उसे कई बार इलाज कराना पड़ा.

2026 में चार बार हुई ERCP

मरीज ने इस साल जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर में चार बार ERCP प्रक्रिया कराई. इस प्रक्रिया के जरिए पित्त की नली में मौजूद पथरी निकालने की कोशिश की गई. इसके बावजूद मरीज को स्थायी राहत नहीं मिली. बार-बार पथरी बनने और दर्द की समस्या से परेशान होकर वह कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज पहुंचा. यहां उसने डॉक्टरों को अपने पुराने ऑपरेशन और इलाज की पूरी जानकारी दी.

कोलेडोकोस्कोपी से मिली पथरियों की जानकारी

मरीज की लंबी मेडिकल हिस्ट्री को देखते हुए डॉ. संजय काला और उनकी टीम ने नए तरीके से जांच और इलाज की योजना बनाई. टीम में डॉक्टर अनुराग सिंह भी शामिल रहे. डॉक्टरों ने इंट्राऑपरेटिव कोलेडोकोस्कोपी की मदद से पित्त की नली के अंदर की स्थिति को देखा. इस जांच में नली के अंदर काफी संख्या में पथरियां दिखाई दीं. इसके बाद डॉक्टरों ने एक-एक करके सभी पथरियों को बाहर निकाला. प्रक्रिया पूरी होने के बाद पित्त की नली की दोबारा जांच की गई, ताकि कोई पथरी अंदर न रह जाए.

गिनती हुई तो 70 निकलीं पथरियां

पित्त की नली से निकाली गई पथरियों की जब गिनती की गई तो उनकी संख्या 70 थी. लंबे समय से दर्द और कई बार इलाज कराने के बाद मरीज के लिए यह बड़ी राहत की बात थी. डॉक्टरों के मुताबिक, दोबारा जांच में पित्त की नली के अंदर कोई दूसरी पथरी नहीं मिली. फिलहाल मरीज को दर्द से राहत है.

पित्त की थैली निकलने के बाद भी क्यों बनती है पथरी?

डॉ. संजय काला के मुताबिक, इस मरीज में पित्त की नली में ही बार-बार पथरी बनने की प्रवृत्ति थी. इसी वजह से पित्त की थैली निकल जाने के बाद भी उसकी समस्या बनी रही. दरअसल, पित्त की थैली और पित्त की नली अलग-अलग संरचनाएं हैं. पित्त की थैली निकालने के बाद भी कुछ मरीजों में पित्त की नली में पथरी रह सकती है या बाद में बन सकती है. इसलिए ऑपरेशन के बाद भी पेट में दर्द हो तो उसकी सही वजह की जांच कराना जरूरी है.

मरीज ने कहा- 29 साल से समझ नहीं पा रहा था समस्या

मरीज ने बताया कि उसने 29 साल पहले पित्त की थैली निकलवाई थी. उसे लगता था कि इसके बाद पथरी की समस्या दोबारा नहीं होगी. लेकिन लगातार दर्द के कारण उसे कई बार इलाज और प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा. मरीज के मुताबिक, इस बार डॉक्टरों ने उसकी पित्त की नली से सभी पथरियां निकाल दीं, जिसके बाद उसे राहत मिली है. उसने डॉ. संजय काला और उनकी पूरी टीम का धन्यवाद किया.

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