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99% लोग उसी धर्म में मरते हैं जिसमें पैदा होते हैं' जावेद अख्तर ने आस्था और सोच पर उठाए सवाल; जानिए पूरा मामला

मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर अक्सर समाज और धर्म की घिसी-पिटी धारणाओं पर बेबाकी से सवाल उठाने के लिए जाने जाते हैं. हाल ही में एक बातचीत के दौरान उन्होंने धर्म, आस्था और नास्तिकता को लेकर अपनी दो टूक राय रखी. जावेद अख्तर ने साफ कहा कि ज्यादातर लोग जिस धर्म में पैदा होते हैं, बिना सोचे-समझे पूरी जिंदगी उसी को सच मानकर जी लेते हैं.
हिंदी सिनेमा के दिग्गज लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने एक इंटरव्यू में धर्म और व्यक्तिगत सोच को लेकर गहरी बात कही. उन्होंने कहा कि आज के दौर में करीब 99 प्रतिशत लोग उसी धर्म में अपनी जान गंवाते हैं, जिस धर्म में उनका जन्म हुआ था. अख्तर के मुताबिक, यह आंकड़ा अपने आप में साबित करता है कि धार्मिक मान्यताएं इंसान की अपनी सोच या चुनाव नहीं हैं, बल्कि यह बचपन से दिमाग में बिठाई गई धारणाएं हैं.
'इंसान पर नहीं, तर्क और कारण पर भरोसा करो'
जावेद अख्तर ने साफ किया कि किसी भी बात को आंख बंद करके सिर्फ इसलिए नहीं मान लेना चाहिए क्योंकि वह बात किसी खास व्यक्ति ने कही है. उन्होंने कहा, "हम किसी इंसान पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करते, हम एक विचार पर भरोसा करते हैं. इंसान आज कुछ कह रहा है, कल अपनी बात से पलट सकता है, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता. असली भरोसा विचार, तर्क और कारण पर होना चाहिए."
मां-बाप और संतों से मिली मान्यताओं पर सवाल
धर्म को लेकर बात आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि आस्था रखने वाला इंसान अक्सर वही बातें दोहराता है जो उसके मां-बाप ने सिखाई हैं. इसके अलावा लोग किसी बाबा, संत या धार्मिक गुरु की बातों को बिना सोचे सच मान लेते हैं. जावेद अख्तर ने याद दिलाया कि दुनिया में कई बड़े धर्म हैं और सबकी अपनी-अपनी अलग मान्यताएं हैं. ऐसे में किसी भी बात को स्वीकार करने से पहले दिमाग की कसौटी पर कसना बेहद जरूरी है.
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