Tuesday, 14 July 2026
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मृतक एसडीओ की पहचान बदलकर फर्जी रजिस्ट्री का आरोप:खंडवा में नामांतरण के दौरान का खुलासा; सब रजिस्ट्रार, सर्विस प्रोवाइडर समेत 14 लोगों पर FIR की मांग

INT News14 July 2026 at 10:41 am

खंडवा जिले में जमीन की फर्जी रजिस्ट्री और नामांतरण का एक गंभीर मामला सामने आया है। महाराष्ट्र के अकोला निवासी एक परिवार ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) से शिकायत कर आरोप लगाया है कि उनके दिवंगत पिता की कृषि भूमि हड़पने के लिए सुनियोजित साजिश रची गई। शिकायत के अनुसार, मृतक के स्थान पर दूसरे व्यक्ति को खड़ा कर फर्जी पहचान बनाई गई, फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उसी के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री व नामांतरण करा लिया गया। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष आपराधिक जांच कर 14 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग की है। 1991 में खरीदी थी जमीन, 2025 में हुआ निधन शिकायत अकोला निवासी स्वाती उंबरकर, राहुल उंबरकर, अपर्णा सरोदे और अनुराधा उंबरकर ने संयुक्त रूप से दी है। उन्होंने स्वयं को स्वर्गीय मधुसूदन उंबरकर के वैधानिक उत्तराधिकारी बताया है। आवेदन के अनुसार, मधुसूदन उंबरकर ने 25 फरवरी 1991 को खंडवा तहसील के ग्राम मालीपुरा स्थित सिहाड़ा रोड पर खसरा नंबर 257 की करीब 0.60 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदी थी। बाद में राजस्व रिकॉर्ड में बंटवारे के बाद खसरा नंबर 257/8 की 0.02 हेक्टेयर भूमि उनके नाम दर्ज रही। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, 27 फरवरी 2025 को पुणे में कैंसर के इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। इसके बाद परिवार ने अकोला की जूनियर सिविल कोर्ट से उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्राप्त कर जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया शुरू की। नामांतरण कराने पहुंचे तो सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा परिवार का आरोप है कि जब वे राजस्व कार्यालय में नामांतरण कराने पहुंचे तो उन्हें पता चला कि संबंधित भूमि पहले ही किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज हो चुकी है। दस्तावेजों की जांच करने पर सामने आया कि वर्ष 2023 में मृतक की जगह किसी अन्य व्यक्ति को प्रस्तुत कर उसकी पहचान मधुसूदन उंबरकर के रूप में कराई गई और उसी के आधार पर रजिस्ट्री कर दी गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा योजनाबद्ध तरीके से किया गया, ताकि असली मालिक और उनके परिवार को इसकी भनक तक न लगे। रजिस्ट्री में नियमों की अनदेखी का आरोप परिवार ने आरोप लगाया है कि 26 सितंबर 2023 को तैयार किए गए विक्रय पत्र में पहचान संबंधी आवश्यक दस्तावेजों का समुचित उल्लेख नहीं किया गया। विक्रेता और खरीदार के आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्रों का विवरण दस्तावेज में नहीं है। इसके अलावा विक्रय राशि का भुगतान नकद दर्शाया गया, जबकि उससे संबंधित कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है। शिकायतकर्ताओं का यह भी कहना है कि रजिस्ट्री के साथ जरूरी नक्शा और राजस्व अभिलेख भी संलग्न नहीं किए गए, जिससे पूरे सौदे पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। कुछ ही महीनों में दूसरे व्यक्ति के नाम कर दी जमीन परिवार का आरोप है कि फर्जी रजिस्ट्री कराने के बाद 4 दिसंबर 2023 को संबंधित भूमि को फिर दूसरे व्यक्ति के नाम स्थानांतरित कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इससे स्पष्ट होता है कि पूरी प्रक्रिया पहले से तय साजिश का हिस्सा थी और जमीन को तेजी से अलग-अलग लोगों के नाम कर मूल मालिक के परिवार के अधिकार खत्म करने की कोशिश की गई। 14 लोगों की भूमिका पर उठाए सवाल शिकायत में कुल 14 लोगों को इस कथित फर्जीवाड़े में शामिल बताया गया है। इनमें निजी व्यक्ति, सर्विस प्रोवाइडर, हल्का पटवारी, उप पंजीयक कार्यालय के अधिकारी और अन्य संबंधित लोग शामिल हैं। परिवार का आरोप है कि इन सभी ने मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, पहचान सत्यापन में लापरवाही बरतने और राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव कराने में भूमिका निभाई। शिकायतकर्ताओं ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की है। महाराष्ट्र सरकार में एसडीओ थे मधुसूदन उंबरकर शिकायत के अनुसार, स्वर्गीय मधुसूदन उंबरकर महाराष्ट्र के जल संसाधन विभाग (वॉटर रिसोर्स डिपार्टमेंट) में सब डिविजनल ऑफिसर (एसडीओ) के पद पर कार्यरत थे। उनके निधन के बाद उनकी पत्नी अनुराधा उंबरकर और तीनों संतानें वैधानिक वारिस हैं। परिवार का कहना है कि उनके पास उत्तराधिकार प्रमाण पत्र सहित सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं, बावजूद इसके उनकी संपत्ति पर फर्जी तरीके से कब्जा करने की कोशिश की गई। आपराधिक जांच और एफआईआर की मांग परिवार ने एसपी से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत आपराधिक जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो इस तरह के फर्जीवाड़े से अन्य लोगों की संपत्तियां भी असुरक्षित हो सकती हैं। शिकायत में दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई करने और जमीन के रिकॉर्ड की दोबारा जांच कराने की मांग की गई है। इन 14 लोगों को बनाया शिकायत में पक्षकार 1. मधुसूदन मसानी निवासी भेलगांव, जिला खरगोन 2. पूजाबाई जोगी निवासी संजय नगर, खंडवा 3. नूर मोहम्मद निवासी भीकनगांव, जिला खरगोन 4. बंटी कनाडे निवासी संत रविदास वार्ड, खंडवा 5. भारत ढाकरे निवासी खंडवा 6. श्रद्धा मालाकार, सर्विस प्रोवाइडर, रणजीत वार्ड, खंडवा 7. ब्रजकिशोर चौहान, उप पंजीयक कार्यालय, खंडवा 8. देवीसिंह निवासी खंडवा 9. हल्का पटवारी, ग्राम मालीपुरा, तहसील खंडवा 10. निधि गुप्ता निवासी प्रभुप्रेमपुरम कॉलोनी, खंडवा 11. संजय कुमार गुप्ता निवासी प्रभुप्रेमपुरम कॉलोनी, खंडवा 12. कलीम खान निवासी आनंद नगर, खंडवा 13. रफीक शेख, सर्विस प्रोवाइडर, नागचून रोड, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, खंडवा 14. अरविंद सैनी, पटवारी हल्का क्रमांक-6, तहसील खंडवा