समाचार · पंजाब
खड्डे में फंसा टू-व्हीलर, लॉ स्टूडेंट गिरकर घायल, सिविल गई तो व्हील चेयर नहीं मिली
| जालंधर रेल विहार की लॉ स्टूडेंट तहजीब कौर बीती 30 सितंबर को शाम 5.15 बजे कचहरियों से अपने घर के लिए निकली थीं। संविधान चौक से डीसी दफ्तर की तरफ जाते हुए एनआरआई सभा के सामने सड़क पर खड्डा था। तहजीब जिस टू व्हीलर पर सवार थी, उसका एक टायर खड्डे में पड़ा जिससे टू व्हीलर अन-बैलेंस हो गया। नतीजतन, टायर आगे इंटरलॉकिंग टाइल पर स्लिप कर गया। तहजीब रोड पर गिर गईं। उनके सिर, पैरों व शरीर के बाकी हिस्सों पर गंभीर चोटें आईं। तहजीब के पिता कमलदीप सिंह बताते हैं- सड़कों पर खड्डे नगर निगम की लापरवाही का सबूत है। वहीं, जब बेटी को इलाज के लिए सिविल अस्पताल लेकर गया तो वहां न तो व्हील चेयर मिली और न ही साफ शौचालय। थाने में शिकायत दी तो प्रभारी ने केस दर्ज करने से इंकार कर दिया। घटनाक्रम को 12 दिन हो चुके हैं। बेटी की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार नगर निगम के खिलाफ केस दर्ज कराने की लड़ाई लड़ रहा हूं। अपनी बेटी की मेडिकल ओपिनियन रिपोर्ट लेने पहुंचे कमलदीप सिंह का दर्द और गुस्सा अस्पताल परिसर में साफ छलका। रिसेप्शन पर ताले में जकड़ी व्हीलचेयर, बंद पड़े शौचालय और एक्स-रे रूम के बाहर लगी लंबी कतारों की तरफ इशारा करते हुए वे पिछले 12 दिनों की बदहाली बयां करते हैं। 30 सितंबर शाम 5:15 बजे सड़क के खड्डे ने मेरी बेटी तहजीब कौर की जान आफत में डाल दी। सिविल अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद हमें उसे प्राइवेट अस्पताल ले जाना पड़ा," कमलदीप रुंधे गले से बताते हैं। नगर निगम की लापरवाही पर कार्रवाई और पीड़ितों के मुआवजे की लड़ाई लड़ रहे कमलदीप 3 अक्टूबर को एमएलआर कटवाने पहुंचे, तो पुलिस केस का हवाला मिला। 5 अक्टूबर को वे थाना बारादरी पहुंचे, जहां टालमटोल के बाद 6 अक्टूबर को शिकायत पर डायरी नंबर लगा। 7 अक्टूबर को एक्स-रे के लिए बेटी को लेकर दोबारा सिविल अस्पताल पहुंचे, तो व्हीलचेयर तक नसीब नहीं हुई। ओपीडी का शौचालय बंद था, जच्चा-बच्चा वार्ड का टॉयलेट बेहद गंदा। दोपहर 1 बजे एक्स-रे स्टाफ ने अगले दिन आने को कहा। अस्पताल के चक्कर काटते-काटते आखिरकार 9 अक्टूबर को एक्स-रे हुए और वीकेंड के बाद आज 12 अक्टूबर को मेडिकल रिपोर्ट मिली। उधर पुलिस का रवैया भी साफ हो गया-शनिवार को फोन कर कहा गया कि पर्चा दर्ज नहीं हो सकता, नगर निगम में शिकायत करें। विभागों की मुख्य लापरवाहियां नगर निगम: एनआरआई सभा के पास सीवरेज मैनहोल का लेवल कम होने, गड्ढों और उखड़ी इंटरलॉकिंग टाइलों का रखरखाव न करने के कारण यह बड़ा हादसा हुआ। 12 दिन बाद भी सिर्फ 'आदेश जारी करने' की बात कही गई। पुलिस प्रशासन: 5 अक्टूबर को दी शिकायत पर कार्रवाई के नाम पर टालमटोल की। केवल डायरी नंबर दिया और अंत में केस दर्ज करने से साफ़ इनकार कर नगर निगम जाने की सलाह दे दी। सिविल अस्पताल: गंभीर मरीज को ताले में बंद व्हीलचेयर, बंद व गंदे शौचालय मिले। एक्स-रे के लिए कई दिन चक्कर कटवाए और मेडिकल रिपोर्ट देने में 12 दिन लिए।