समाचार · मध्य प्रदेश
क्योटी जलप्रपात के प्रवेश द्वार पर कचरे के ढेर:पार्किंग में कई ट्रक कचरा डंप, जलप्रपात से महज 50 मीटर दूर गंदगी से पर्यटक परेशान
रीवा में क्योटी जलप्रपात इन दिनों कचरे के अंबार से घिरा नजर आ रहा है। जलप्रपात के प्रवेश द्वार से महज 50 मीटर दूर बनी पार्किंग में पर्यटकों के वाहनों की जगह कई ट्रक कचरा डंप किया गया है। पार्किंग में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। ऐसे में क्योटी पहुंचने वाले पर्यटकों का स्वागत प्राकृतिक खूबसूरती के बजाय गंदगी से हो रहा है। बारिश के मौसम में क्योटी जलप्रपात का सौंदर्य और निखर जाता है। चट्टानों के बीच से गिरता झरना और चारों ओर फैली हरियाली पर्यटकों को आकर्षित करती है। बारिश के दिनों में यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। लेकिन प्रवेश द्वार पर ही कचरे के ढेर पर्यटन स्थल की पहली तस्वीर को बदसूरत बना रहे हैं। जिस पार्किंग में खड़े होने चाहिए पर्यटकों के वाहन, वहां डंप हो रहा कचरा क्योटी जलप्रपात के प्रवेश द्वार पर पर्यटकों के वाहनों के लिए पार्किंग बनाई गई है। इसी जगह पर कई ट्रक कचरा डंप किया गया है। जलप्रपात से महज 50 मीटर की दूरी पर कचरे का इतना बड़ा ढेर होने से पर्यावरण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बारिश के दौरान कचरा पानी के साथ बहकर आसपास के क्षेत्र में फैलने की आशंका है। इससे पर्यटन स्थल की स्वच्छता के साथ प्राकृतिक वातावरण भी प्रभावित हो सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस जगह का इस्तेमाल पर्यटकों की पार्किंग के लिए होना चाहिए, वहां कचरा जमा किया जा रहा है। प्रशासन की वेबसाइट पर क्योटी लोकप्रिय पर्यटन स्थल, मौके पर गंदगी रीवा जिला प्रशासन ने क्योटी जलप्रपात को प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में दर्ज किया है। प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक क्योटी भारत का 24वां सबसे ऊंचा जलप्रपात है और लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। यहां सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा भी खास आकर्षण माना गया है। यह रीवा शहर से करीब 37 किलोमीटर दूर स्थित है। एक तरफ प्रशासन पर्यटन स्थलों को विकसित कर पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर क्योटी के प्रवेश द्वार पर ही कचरे के ढेर लगे हैं। पर्यटन बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के अवसर बढ़ सकते हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं और स्वच्छता की स्थिति खराब रही तो इसका सीधा असर पर्यटकों के अनुभव पर पड़ेगा। स्थानीय लोगों ने कहा- प्राकृतिक स्थल की पहचान गंदगी से नहीं होनी चाहिए स्थानीय लोगों का कहना है कि क्योटी की पहचान उसकी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए है। यहां दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। ऐसे में जलप्रपात से कुछ ही दूरी पर कचरा डंप किया जाना समझ से परे है। प्रशासन को तत्काल कचरा हटाने के साथ यह भी तय करना चाहिए कि भविष्य में पर्यटन स्थल के आसपास कचरा डंप न किया जाए। कलेक्टर बोले- होगी कार्रवाई मामले में जिला कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी से पक्ष जानने पर उन्होंने कार्रवाई की बात कही है। अब देखना होगा कि जलप्रपात से महज 50 मीटर दूर पार्किंग में डंप किए गए कई ट्रक कचरे को कब हटाया जाता है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है। क्योटी की पहचान उसकी प्राकृतिक खूबसूरती और झरने के मनोहारी दृश्य से है। ऐसे में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ यहां स्वच्छता और कचरा प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था जरूरी है, ताकि देशभर से आने वाले पर्यटकों को क्योटी की पहली तस्वीर कचरे के ढेर की नहीं, बल्कि उसकी प्राकृतिक सुंदरता की दिखाई दे।