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नारनौल में नायब-सूबेदार भूपेंद्र का राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार:कुपवाड़ा में ड्यूटी के दौरान हुए शहीद, 23 साल तक की देश सेवा, दो बेटियों के पिता
हरियाणा में नारनौल के गांव मोहनपुर निवासी शहीद नायब सूबेदार भूपेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार सुबह उनके पैतृक गांव पहुंचा। जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। वीर सपूत के अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में ग्रामीण, पूर्व सैनिक, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। करीब 40 वर्षीय नायब सूबेदार भूपेंद्र सिंह भारतीय सेना की 2 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे। उनकी पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा सेक्टर में अग्रिम सीमा पर थी। ड्यूटी के दौरान हिम शौर्य ऑपरेशन में उन्होंने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके शहीद होने की सूचना दो-तीन दिन पहले परिवार को मिली थी, जिसके बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई थी। 23 वर्ष पहले हुए थे भर्ती शहीद के चाचा के लड़के ने बताया कि भूपेंद्र सिंह करीब 23 वर्ष पहले भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उन्होंने बताया कि सेना की सेवा परिवार की परंपरा रही है। शहीद के पिता सूबेदार रोहतास सिंह भी सेना से सेवानिवृत्त हैं। परिवार के तीनों भाई रोहतास सिंह, हवा सिंह और दलीप सिंह भारतीय सेना में सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। दो बेटियों के थे पिता ऐसे सैन्य परिवार से आने वाले भूपेंद्र सिंह ने भी देश सेवा को अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने ने बताया कि शहीद भूपेंद्र सिंह अपने परिवार में छोटे बेटे थे। उनके परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी 19 वर्ष की है, जो बीटेक कर रही है, जबकि छोटी बेटी मात्र 7 वर्ष की, जो दूसरी कक्षा में पढ़ती है। दोनों बेटियों के सिर से पिता का साया उठने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों का बुरा हाल पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अंतिम दर्शन के दौरान हर आंख नम दिखाई दी। सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। इसके बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उमड़ा जनसैलाब ग्रामीणों ने कहा कि भूपेंद्र सिंह ने अपने परिवार ही नहीं बल्कि पूरे गांव और जिले का नाम गौरवान्वित किया है। उनका बलिदान हमेशा देशवासियों को राष्ट्र सेवा और देशभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा। अंतिम यात्रा में उमड़े जनसैलाब ने यह साबित कर दिया कि देश अपने वीर सपूतों के त्याग और बलिदान को कभी नहीं भूलता। शहीद नायब सूबेदार भूपेंद्र सिंह की शहादत से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है, वहीं उनके अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान पर हर भारतीय को गर्व है।