Saturday, 29 August 2026
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शराब घोटाला...ED की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका खारिज:हाईकोर्ट बोला-जांच एजेंसी के पास पर्याप्त सबूत;110 करोड़ में खरीदा नॉर्थ गोवा में लग्जरी होटल

INT News29 August 2026 at 09:33 am

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि जांच एजेंसी के पास पर्याप्त सामग्री है। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ट्रिब्यूनल और सक्षम अथॉरिटी के सामने अपना पक्ष रखें। जानकारी के मुताबिक, जांच के बाद ED ने घोटाले के 110 करोड़ रुपए से गोवा में खरीदे गए लग्जरी होटल को कुर्क किया था। इसी कार्रवाई के खिलाफ कारोबारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। नई दिल्ली निवासी डॉ. राहुल अग्रवाल और मेसर्स पैसिफिका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें ED के 28 मई 2026 के प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर को रद्द करने की मांग की गई थी। इस आदेश के तहत नॉर्थ गोवा के अंजुना स्थित फाइव स्टार ‘द वेस्टिन होटल’ को अपराध की आय से अर्जित संपत्ति मानते हुए कुर्क किया गया था। होटल की कीमत करीब 110 करोड़ रुपए आंकी गई है। ED का दावा- घोटाले की रकम से खरीदा गया होटल ED की जांच में दावा किया गया कि छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट के जरिए जुटाई गई अवैध कमाई में से करीब 110 करोड़ रुपए नकद के रूप में याचिकाकर्ता डॉ. राहुल अग्रवाल के चाचा और दुर्ग निवासी विजय कुमार अग्रवाल तक पहुंचाए गए थे। जांच एजेंसी के अनुसार, इसी रकम का इस्तेमाल राहुल अग्रवाल ने गोवा में वेस्टिन होटल खरीदने में किया। होटल का सौदा मेसर्स सर बायोटेक इंडिया लिमिटेड से हुआ था। ED के मुताबिक, सौदे में 50 करोड़ रुपए बैंकिंग चैनल के जरिए रजिस्टर्ड सेल डीड के तहत दिए गए, जबकि बाकी 60 करोड़ रुपए का भुगतान नकद किया गया था। याचिकाकर्ताओं का दावा- 60 करोड़ वैध कमाई हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि होटल खरीद में इस्तेमाल किए गए 60 करोड़ रुपए पूरी तरह से वैध कारोबार से हुई आय थी। उन्होंने इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि आयकर विभाग ने जांच के बाद इस रकम के स्रोत को वैध व्यावसायिक नकदी माना था और इसे अघोषित आय की श्रेणी से बाहर कर दिया था। याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि 1 मई 2019 को हुए पारिवारिक समझौते के तहत विजय अग्रवाल कंपनी के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे चुके थे। इसके बाद उनका होटल परियोजना से कोई संबंध नहीं रहा। उनका दावा है कि विजय अग्रवाल का छत्तीसगढ़ के शराब कारोबार से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कभी कोई संबंध नहीं रहा और वे मूल FIR या चार्जशीट में भी आरोपी नहीं हैं। ED ने बताया- जांच में रकम पहुंचाने की पुष्टि ED की ओर से जांच का ब्योरा देते हुए बताया गया कि शराब सिंडिकेट के मुख्य कैश डिस्ट्रीब्यूटर लक्ष्मी नारायण उर्फ पप्पू बंसल और प्रबीर कुमार शर्मा के बयानों से 110 करोड़ रुपए नकद विजय अग्रवाल तक पहुंचाए जाने की पुष्टि हुई है। ED के मुताबिक, राहुल अग्रवाल ने पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज अपने बयान में स्वीकार किया कि दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित उनके आवास पर 8 से 10 किस्तों में 60 करोड़ रुपए नकद दिए गए थे। जांच एजेंसी ने यह भी बताया कि विक्रेता कंपनी की ओर से नकदी लेने वाले विशाल सक्सेना को बाद में होटल कंपनी में डायरेक्टर नियुक्त किया गया। ED के अनुसार, यह मनी लॉन्ड्रिंग के तीसरे चरण यानी ‘इंटीग्रेशन’ का संकेत है। हाईकोर्ट ने कहा- जब्ती की कार्रवाई से बंद नहीं हुआ होटल हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि आयकर विभाग की ओर से टैक्स के उद्देश्य से किसी नकदी को हिसाब में मान लेने मात्र से वह पीएमएलए के तहत अपराध की आय की जांच से मुक्त नहीं हो जाती। दोनों कानूनों का दायरा, उद्देश्य और कानूनी कसौटियां अलग-अलग हैं। हाईकोर्ट ने आदेश में यह भी कहा कि प्रोविजनल अटैचमेंट से होटल के नियमित संचालन पर कोई असर नहीं पड़ा है। होटल पहले की तरह चल रहा है। न कोई कमरा बंद हुआ है और न ही किसी कर्मचारी को हटाया गया है। डिवीजन बेंच ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ट्रिब्यूनल या सक्षम अथॉरिटी के समक्ष अपना पक्ष रख सकते हैं।