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सतना में बाढ़ का पानी उतरा, अब दिख रही तबाही:मंदाकिनी नदी से लगा गांव में मकान ढहे, अनाज बहा; बसी-बसाई गृहस्थी बर्बाद हो गई
सतना में मंदाकिनी के उफान पर होने से ग्रामीण इलाकों में आई बाढ़ का पानी भले ही करीब 24 घंटे पहले उतर गया हो, लेकिन गांवों में तबाही के निशान अब भी साफ हैं। सेमरावल और मऊ नदियों के साथ स्थानीय नदी-नालों के किनारे बसे गांवों में कहीं घरों की दीवारें मलबे में बदल गई हैं तो कहीं जमीन से अब भी पानी रिस रहा है। कई जगह हैंडपंप और नल बिना चलाए ही पानी उगल रहे हैं। जैतवारा, बिरसिंहपुर, कोटर, खम्हरिया, मझगवां ब्लॉक और रैगांव विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में हालात चिंताजनक हैं। निचली बस्तियों में सैकड़ों मकान ढह गए। घरों में रखा अनाज, कपड़े, बिस्तर और गृहस्थी का सामान पानी में खराब हो गया। कई परिवारों के पालतू पशु भी बह गए। अब प्रभावित परिवारों के सामने रहने और खाने का संकट है। की टीम ने बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचकर हालात देखे।
देखिए तस्वीरें… 5 किलोमीटर तक 3 से 5 फीट पानी सतना-सेमरिया मार्ग पर उधव धाम के पास सेमरावल नदी की बाढ़ का असर पानी उतरने के बाद भी दिखाई दे रहा है। तेज बहाव में पुल और उसकी रेलिंग क्षतिग्रस्त हो गई। स्थानीय लोगों के मुताबिक शनिवार को नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और करीब 5 किलोमीटर के दायरे में 3 से 5 फीट तक पानी भर गया। पानी घरों और दुकानों में घुस गया। खेत पूरी तरह जलमग्न हो गए। उधव धाम मंदिर-आश्रम का भी काफी सामान बाढ़ में बह गया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इससे पहले नदी का ऐसा रूप नहीं देखा। नल-हैंडपंप से बिना चलाए अब भी निकल रहा पानी सुहास ग्राम पंचायत में बाढ़ के दौरान 5 से 6 फीट तक पानी भर गया था। ग्रामीण गांव से निकली नहर को भी बाढ़ की एक वजह मान रहे हैं। पानी उतरे 24 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन कई जगह हैंडपंप और नलों से बिना चलाए ही पानी निकल रहा है। जमीन के भीतर से भी पानी रिस रहा है। सैकड़ों घर ढहे, मलबे में बदली गृहस्थी बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान निचली बस्तियों को हुआ है। कच्चे और कमजोर मकान पानी के तेज बहाव में ढह गए। जिन घरों की दीवारें बचीं, उनमें रखा सामान खराब हो गया। अनाज, बच्चों की किताबें, कपड़े और बिस्तर पानी में खराब हो गए। पशुपालकों के सामने भी संकट है। कई मवेशी बह गए हैं। बचे हुए पशुओं के लिए चारा जुटाना भी मुश्किल हो रहा है। राहत सामग्री पहुंची, लेकिन बेघर परिवारों के सामने घर का संकट बाढ़ के बाद स्थानीय प्रशासन और जिला प्रशासन की टीमें राहत कार्य में जुटी हैं। प्रभावित परिवारों तक भोजन और राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। हालांकि, जिन परिवारों ने घर और गृहस्थी गंवा दी, उनके सामने अब दोबारा घर खड़ा करने की चुनौती है। कई परिवार पीएम आवास की मांग कर रहे हैं। वहीं, कुछ परिवार घर दोबारा बनाने के लिए आर्थिक मदद चाहते हैं। प्रशासन नुकसान का सर्वे कर रहा है। जनप्रतिनिधि प्रभावित गांवों में पहुंचे राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी रैगांव विधानसभा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों का लगातार दौरा कर रही हैं। उन्होंने पीड़ितों से मुलाकात कर उनके रहने और खाने की व्यवस्था के लिए मैदानी अमले को निर्देश दिए। सांसद गणेश सिंह ने भी जिले के कई ग्रामीण इलाकों का दौरा किया। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा नुकसान सेमरावल नदी के किनारे बसे गांवों में हुआ है। शनिवार रात रेस्क्यू नहीं हो सके लोगों को रविवार को सुरक्षित निकालकर उनके रहने और खाने की व्यवस्था कराई गई। उन्होंने बताया कि नुकसान का सर्वे चल रहा है। आंकलन पूरा होने के बाद मुख्यमंत्री से विशेष पैकेज की मांग की जाएगी। सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा भी बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई मकान गिर गए हैं, खेत डूब गए और अनाज बह गया है। विधायक ने सरकार से बेघर परिवारों को विशेष प्रावधान के तहत जल्द पीएम आवास देने की मांग की है। 23 अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी अतिवृष्टि के कारण बनी बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट डॉ. सतीश कुमार एस ने रविवार को विभिन्न विभागों के अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी हैं। आदेश के अनुसार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दिन-रात रेस्क्यू और लॉजिस्टिक कार्य, प्रभावित लोगों को चिकित्सा सहायता, राहत शिविरों में भोजन-पानी की व्यवस्था और बिजली आपूर्ति बहाल रखने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को दी गई है। आरबीसी 6/4 के तहत नुकसान का सर्वे कर प्रभावित लोगों को सहायता दिलाने के लिए भी टीम गठित की गई है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद गांवों में अब राहत के साथ पुनर्वास और घरों को दोबारा खड़ा करने की चुनौती सामने है। इस मामले से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… चित्रकूट में मंदाकिनी फिर उफनी, रामघाट डूबा सतना जिले में रविवार देर रात से शुरू हुआ रुक-रुककर बारिश का दौर सोमवार को भी जारी रहा। तराई अंचल में पहाड़ी क्षेत्रों का पानी तेजी से उतरने के कारण चित्रकूट की मंदाकिनी नदी का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है। रामघाट का प्लेटफॉर्म जलमग्न हो गया है, जिससे घाट किनारे की दुकानों में पानी घुसने का खतरा मंडरा रहा है। पूरी खबर पढ़ें…