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MP में 8 अक्टूबर से आयुष्मान योजना का बहिष्कार:IMA समेत 3 संगठनों का ऐलान; 1000 एंबुलेंस के साथ दिल्ली कूच की चेतावनी
ग्वालियर समेत मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना से जुड़े मरीजों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। प्रदेश के तीन प्रमुख चिकित्सा संगठनों IMA मध्यप्रदेश, MP नर्सिंग होम एसोसिएशन और यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल्स डायरेक्टर्स एसोसिएशन ने 8 अक्टूबर 2026 से योजना का प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन बहिष्कार करने का ऐलान किया है। संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि 8 अक्टूबर से पहले उनकी मांगों का ठोस समाधान नहीं निकला तो वे काम बंद कर देंगे। इसके बाद 1000 एंबुलेंस के काफिले के साथ दिल्ली जाकर PMO का घेराव करने की बात भी कही गई है। डॉक्टरों की 6 प्रमुख मांगें 1. लंबित भुगतान और मनमाने क्लेम रिजेक्शन: पुराने और वर्तमान पोर्टल पर अटके भुगतान, गलत तरीके से रिजेक्ट किए गए पात्र क्लेम और CPD स्तर पर लंबित राशि का समयबद्ध निपटारा किया जाए। देरी होने पर शासन स्तर पर जवाबदेही तय हो। 2. प्री-ऑथराइजेशन के बाद कटौती पर रोक: मरीज के भर्ती होने के समय प्री-ऑथराइजेशन मिलने के बाद इलाज पूरा होने पर क्लेम खारिज करने या बड़ी कटौती करने की प्रक्रिया बंद हो। अस्पताल में खर्च हुई दवाइयों, ICU, ऑक्सीजन और इंप्लांट की लागत की भरपाई की जाए। 3. तकनीकी खामियों के नाम पर क्लेम न रोके जाएं: TAT, ऑथेंटिकेशन या दस्तावेज संबंधी त्रुटियों के आधार पर क्लेम रद्द नहीं किए जाएं। संगठनों ने फर्जीवाड़े पर कार्रवाई का समर्थन किया है, लेकिन वास्तविक मरीज और इलाज के मामलों में तकनीकी कारणों से भुगतान रोकने का विरोध किया है। क्लेम की प्रक्रिया योग्य डॉक्टरों के माध्यम से कराने और प्रभावी अपील व्यवस्था की मांग की गई है। 4. NABH की अनिवार्यता खत्म हो: NABH मान्यता को अनिवार्य करने के बजाय स्वैच्छिक और इंसेंटिव आधारित किया जाए। अस्पताल के आकार, बेड क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुसार व्यावहारिक मानक तय किए जाएं। 5. नर्सिंग होम नियमों का सरलीकरण: फायर NOC, प्रदूषण नियंत्रण, लिफ्ट और रजिस्ट्रेशन के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया जाए। मध्यप्रदेश रुजोपचार अधिनियम के तहत नर्सिंग होम का पंजीयन 3 साल के बजाय 5 साल के लिए किया जाए। 6. रिहायशी इलाकों में संचालित अस्पतालों का मुद्दा: संगठनों का कहना है कि करीब 14 साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री ने रिहायशी इलाकों में संचालित नर्सिंग होम की समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन इसका स्थायी समाधान अब तक नहीं हुआ है। निजी अस्पतालों का कहना- लंबे समय से भुगतान अटके संगठनों का कहना है कि प्रदेश के निजी अस्पताल लंबे समय से लंबित भुगतान और नीतिगत विसंगतियों से जूझ रहे हैं। ग्वालियर समेत पूरे प्रदेश के निजी अस्पताल इस आंदोलन में एकजुट हैं। IMA ग्वालियर के पूर्व अध्यक्ष नीरज शर्मा ने कहा कि आयुष्मान योजना जनकल्याणकारी है और चिकित्सा जगत इसकी मूल भावना के साथ खड़ा है। सरकारी अस्पतालों की सीमित क्षमता के कारण निजी अस्पताल इस योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन वे खुद आर्थिक अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि NABH की अनिवार्यता से आम मरीज योजना के लाभ से वंचित हो सकते हैं। सरकार को 8 अक्टूबर से पहले सार्थक संवाद कर समाधान निकालना चाहिए। IMA मध्यप्रदेश के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व अधीक्षक, जया रोग अस्पताल, डॉ. अशोक मिश्रा ने कहा कि NABH की व्यवस्था फिलहाल ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर और भोपाल में लागू की गई है। जल्द ही इसका असर अन्य जिलों पर भी पड़ सकता है। अस्पतालों पर NABH की व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करना उचित नहीं है।