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पत्नी ने लगाए दहेज और मारपीट के आरोप, पति बोला- बिना वजह छोड़ा; हाईकोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू और न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत की खंडपीठ ने 18 सितंबर को जशपुर फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. फैमिली कोर्ट ने पति की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 9 के तहत पत्नी को उसके साथ रहने का निर्देश देने की मांग की गई थी.
जशपुर का है ये मामला
जशपुर निवासी 26 वर्षीय युवक की शादी फरवरी 2022 में प्रियंका यादव से हुई थी. अक्टूबर 2022 में पत्नी ने ससुराल लौटने से इनकार कर दिया. इसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की. उसका कहना था कि वह कई बार पत्नी को वापस लाने गया और कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन पत्नी बिना उचित वजह के उसके साथ रहने के लिए तैयार नहीं हुई.
पत्नी ने पति पर मारपीट करने के अलावा दहेज मांगने के आरोप लगाए
पत्नी ने पति पर मारपीट करने और कार के साथ 5 लाख रुपये नकद दहेज में मांगने का आरोप लगाया. उसका कहना था कि फरवरी 2022 में मारपीट के कारण उसका गर्भपात हो गया. उसने यह भी आरोप लगाया कि पति ने उसके जरूरी दस्तावेज अपने पास रख लिए थे. इसके बाद उसने सखी वन स्टॉप सेंटर में शिकायत की और घरेलू हिंसा कानून के तहत भी मामला शुरू किया.
हाईकोर्ट ने कहा कि पति यह साबित नहीं कर सका कि पत्नी बिना किसी उचित वजह के उसे छोड़कर अलग रह रही थी. कोर्ट के मुताबिक, पत्नी के अलग रहने के पीछे दहेज की मांग और प्रताड़ना जैसे आरोप थे, इसलिए उसके अलग रहने को बिना वजह नहीं माना जा सकता.
हाईकोर्ट ने कहा- गर्भपात से जुड़ी परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण
हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी ने मारपीट और दहेज की मांग के जो आरोप लगाए हैं, उनके साथ गर्भपात से जुड़ी परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण हैं. कोर्ट ने यह भी माना कि पति के पास पत्नी के जरूरी दस्तावेज होना उसके अलग रहने के फैसले को सही ठहराने वाला एक और कारण है. कोर्ट ने 20 नवंबर 2023 के फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पति की अपील खारिज कर दी.