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डिजिटल दौर में जेनरेशन-Z के सामने नई चुनौती:ऑरेंज इकोनॉमी ने युवाओं के लिए अवसर बढ़ाए और दूसरों से तुलना व पीछे छूटने का डर भी
डिजिटल युग में भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से नए आयामों की ओर बढ़ रही है। रचनात्मकता, नवाचार, कला, संस्कृति, मीडिया और डिजिटल कंटेंट से जुड़ी गतिविधियां आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही हैं। इसी संदर्भ में ऑरेंज इकोनॉमी की चर्चा बढ़ी है। हालांकि आधुनिक तकनीक और तेज होती जीवनशैली का दूसरा पहलू भी सामने आया है। खासकर जेनरेशन Z में दूसरों की उपलब्धियों से तुलना और पीछे रह जाने का डर यानी फियर ऑफ मिसिंग आउट (FOMO) मानसिक दबाव बढ़ा सकता है। ये बात लेखक एवं इंजीनियर अभिषेक केसरी ने कही। उन्होंने कहा कि आज का युवा ऐसी दुनिया में रह रहा है, जहां सूचना कुछ सेकंड में पूरी दुनिया तक पहुंच जाती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार नया कंटेंट सामने आता है और कई सेवाएं कुछ ही मिनटों में घर तक पहुंच जाती हैं। तकनीक ने जीवन को आसान और तेज बनाया है, लेकिन इसके साथ हर चीज तुरंत हासिल करने की मानसिकता भी बढ़ी है। सोशल मीडिया पर दिखता है जीवन का सिर्फ चुनिंदा हिस्सा केसरी कहते हैं कि सोशल मीडिया पर लोग सामान्यतः अपने जीवन के बेहतर और चुनिंदा क्षण ही साझा करते हैं। समस्या तब शुरू होती है, जब इन्हीं क्षणों को किसी व्यक्ति के पूरे जीवन का प्रतिबिंब मान लिया जाता है। दूसरे की सफलता, यात्रा, करियर, जीवनशैली या उपलब्धि देखकर युवा खुद को पीछे छूटा हुआ महसूस कर सकता है। जबकि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाला जीवन किसी व्यक्ति की पूरी वास्तविकता नहीं होता। आधुनिकता का उद्देश्य कार्य और जीवनशैली को सरल बनाना है, धैर्य की सीमा को समाप्त करना नहीं। किसी व्यक्ति की कुछ पोस्ट या एक तस्वीर के आधार पर उसके पूरे जीवन का आकलन करना उचित नहीं है। साइबर सुरक्षा के साथ व्यक्तिगत जागरूकता भी जरूरी उन्होंने बताया कि डिजिटल जीवन के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा भी महत्वपूर्ण चिंता बन गई है। भारत में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000, साइबर क्राइम सेल, डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था और साइबर धोखाधड़ी की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। इसके बावजूद तकनीकी सुरक्षा के साथ व्यक्तिगत जागरूकता जरूरी है। निजी जानकारी, वित्तीय विवरण और ऑनलाइन गतिविधियों को लेकर सावधानी बरतना डिजिटल जीवन का अहम हिस्सा है। लगातार तुलना से बढ़ सकता है मानसिक तनाव दूसरों से लगातार तुलना और पीछे रह जाने की भावना लंबे समय तक बनी रहे तो व्यक्ति तनाव और नकारात्मकता का अनुभव कर सकता है। इसलिए आधुनिक जीवन में मानसिक संतुलन का महत्व बढ़ गया है। दूसरे व्यक्ति का बेहतर प्रदर्शन यह साबित नहीं करता कि हम कमजोर हैं। इसे सीखने और खुद को बेहतर बनाने के अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है। किसी व्यक्ति, संस्था या राष्ट्र की सफलता का आकलन केवल एक उपलब्धि के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके पीछे लंबे समय की नेतृत्व क्षमता, योजना, निरंतर प्रयास, सही निर्णय और परिस्थितियों के अनुरूप रणनीति महत्वपूर्ण होती है। योग, ध्यान और आत्मअनुशासन से मानसिक संतुलन पर जोर मानसिक स्थिरता के लिए भारतीय चिंतन और जीवन-पद्धति में भी कई उपाय बताए गए हैं। योग, ध्यान, प्राणायाम, आत्मअनुशासन, लक्ष्य निर्धारण और अपनी क्षमताओं की पहचान व्यक्ति को मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। भारतीय दार्शनिक परंपरा में मन की चंचलता और उसके नियंत्रण पर विशेष बल दिया गया है। अजंता-एलोरा से स्वतंत्रता आंदोलन तक धैर्य और निरंतरता के उदाहरण भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत में एकाग्रता, धैर्य और निरंतर प्रयास की कई मिसालें हैं। अजंता-एलोरा की कला, वाराणसी की सांस्कृतिक विरासत, सारनाथ का अशोक स्तंभ, महेश्वर का किला और अहिल्याबाई होलकर का प्रशासनिक योगदान लंबे समय तक किए गए प्रयास और दूरदृष्टि के उदाहरण हैं। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भी लंबे समय तक चले वैचारिक और सामाजिक प्रयासों की भूमिका रही। 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से लेकर गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन तक स्वतंत्रता का संघर्ष निरंतर प्रयास के दौर से गुजरा। स्वतंत्र भारत की विकास यात्रा में भी 1991 के आर्थिक सुधारों से लेकर वर्तमान समय में विकसित भारत के लक्ष्य तक दीर्घकालिक नीतियों और निरंतर प्रयासों को महत्वपूर्ण माना गया है। सोशल मीडिया की लोकप्रियता नहीं, आत्मविश्वास हो पहचान स्वामी विवेकानंद के विचारों में आत्मविश्वास और आत्मशक्ति को विशेष महत्व दिया गया है। आज के युवा के लिए भी यह संदेश महत्वपूर्ण है कि उसकी पहचान केवल सोशल मीडिया की लोकप्रियता, किसी परीक्षा के परिणाम या किसी एक उपलब्धि से निर्धारित नहीं होती। जेनरेशन Z के सामने चुनौती आधुनिक तकनीक से दूर रहने की नहीं, बल्कि उसका उपयोग करते हुए मानसिक संतुलन बनाए रखने की है। तेजी से बदलती दुनिया में लक्ष्य निर्धारित करना, अपनी क्षमताओं को समझना, निरंतर प्रयास करना और दूसरों से अनावश्यक तुलना से बचना जरूरी है। ऑरेंज इकोनॉमी और डिजिटल क्रांति युवाओं के लिए नए अवसर खोल रही हैं। इन अवसरों के साथ धैर्य, एकाग्रता और मानसिक संतुलन को भी महत्व देना जरूरी है। वास्तविक सफलता केवल तेजी से आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि सही दिशा में निरंतर आगे बढ़ने में है।