Tuesday, 13 October 2026
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CJI सूर्यकांत पर केरल कांग्रेस की टिप्पणी से विवाद, ‘इस्तीफा दीजिए’ वाला पोस्ट डिलीट; BJP ने साधा निशाना

INT News12 October 2026 at 10:36 pm

पोस्ट पर विवाद बढ़ने और बीजेपी सहित कई लोगों की आलोचना के बाद कांग्रेस ने इसे डिलीट कर दिया. पार्टी ने स्पष्ट किया कि यह पोस्ट प्रदेश नेतृत्व की जानकारी और मंजूरी के बिना किया गया था. विवादित पोस्ट के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को भी जिम्मेदारी से हटा दिया गया है.

कांग्रेस ने पोस्ट में क्या लिखा था?

कांग्रेस की केरल इकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सीजेआई को संबोधित करते हुए लिखा था, “प्रिय सूर्यकांत, अगर कानून-व्यवस्था आपका विषय नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दीजिए. हम आपकी जगह किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढ लेंगे, जो इसे संभाल सके.”

इस पोस्ट को लेकर न्यायिक जगत और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया हुई. बीजेपी ने कांग्रेस पर देश की संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया.

दिल्ली में प्रदर्शन पर सीजेआई ने क्या कहा था?

सीजेआई सूर्यकांत सोमवार को दिल्ली में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के स्थापना दिवस से जुड़े कार्यक्रम में शामिल हुए थे. कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों ने उनसे दिल्ली में हाल के प्रदर्शनों और उन पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर सवाल किया.

इस पर उन्होंने कहा, “यह कानून-व्यवस्था का मामला है. यह मेरा विषय नहीं है.”

दरअसल, दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं. विपक्षी दलों और कॉकroach जनता पार्टी (CJP) से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं.

खरगे और राहुल गांधी से मिलने से क्यों किया इनकार?

सीजेआई सूर्यकांत ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात के अनुरोध को भी ठुकरा दिया था. दोनों नेताओं ने 12 अक्टूबर को उनसे मिलने और अपनी मांगों से जुड़ा ज्ञापन सौंपने के लिए समय मांगा था.

सीजेआई ने अपने जवाब में कहा कि जिन मुद्दों पर विपक्षी नेता चर्चा करना चाहते हैं, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं. ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर बैठक करना शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के अनुरूप नहीं होगा.

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हर नागरिक के लिए खुले हैं. कोई आम नागरिक हो या निर्वाचित प्रतिनिधि, हर व्यक्ति कानून के अनुसार अपनी शिकायत लेकर अदालत पहुंच सकता है. अदालत मामले पर कानूनी प्रक्रिया के तहत विचार करेगी.

किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर साधा निशाना

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस देश की संवैधानिक और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रही है.

रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस का अगला निशाना न्यायपालिका है. उन्होंने यह भी कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों के खिलाफ देशभक्त नागरिक एकजुट होंगे.

सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के संगठन ने भी जताई आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने सीजेआई सूर्यकांत के इस्तीफे की मांग करने वाली सोशल मीडिया पोस्ट की निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित किया.

संगठन के अनुसार, न्यायपालिका से जुड़ी किसी शिकायत को उचित कानूनी और संवैधानिक माध्यमों से उठाया जाना चाहिए. इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणियां न्यायिक पद की गरिमा और न्यायपालिका पर जनता के भरोसे को प्रभावित कर सकती हैं.

एसोसिएशन ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता का सम्मान करने और सुप्रीम कोर्ट की गरिमा बनाए रखने की अपील की.

कांग्रेस ने दी सफाई, जिम्मेदार व्यक्ति को हटाया

कांग्रेस की केरल इकाई के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने कहा कि पार्टी के आधिकारिक एक्स हैंडल से विवादित पोस्ट प्रदेश नेतृत्व की जानकारी, सहमति या परामर्श के बिना किया गया था.

उन्होंने बताया कि पोस्ट के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को उसकी जिम्मेदारी से हटा दिया गया है. पार्टी इस बात की भी जांच करेगी कि पोस्ट किन परिस्थितियों में किया गया.

जोसेफ ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस को न्यायपालिका की निष्पक्षता पर कोई आपत्ति नहीं है और सोशल मीडिया पर की गई ऐसी टिप्पणियां प्रदेश नेतृत्व के रुख को नहीं दर्शाती हैं.

SIR के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे विपक्षी नेता

इस बीच, INDIA ब्लॉक के नेताओं ने सोमवार को ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ के तहत सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया और चुनाव आयोग के खिलाफ याचिका दायर की. विपक्ष ने मतदाता सूची में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाने और पुनरीक्षण प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया है.

11 विपक्षी सांसदों की ओर से दायर याचिका में SIR कराने के फैसले को अमान्य घोषित करने और इसकी कानूनी वैधता की न्यायिक समीक्षा करने की मांग की गई है. याचिका में दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पाबंदियों, हिरासत में लिए जाने और सुरक्षा बैरिकेडिंग का मुद्दा भी उठाया गया है.

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