Tuesday, 7 July 2026
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रिश्वतखोर पटवारी और फॉरेस्ट गार्ड सेवा से बर्खास्त:एक ने 5 हजार रुपए तो दूसरे में 500 रुपए की रिश्वत में गंवाई नौकरी

INT News7 July 2026 at 05:53 pm

इंदौर लोकायुक्त में दर्ज भ्रष्टाचार के दो अलग-अलग मामलों में दोषसिद्धि के बाद शासन ने एक पटवारी और एक वनरक्षक को सरकारी सेवा से पृथक कर दिया है। दोनों आरोपियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। बाद में विशेष न्यायालयों ने उन्हें कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। पहला मामला: नामांतरण के लिए मांगी थी रिश्वत खंडवा जिले के छायगांव माखन हल्का नंबर-34 के तत्कालीन पटवारी दिनेश जगताप का है। शिकायतकर्ता सादिक शेख ने लोकायुक्त इंदौर में शिकायत दर्ज कराई थी कि पत्नी के नाम खरीदे गए प्लॉट के नामांतरण के लिए पटवारी 3 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा है। लोकायुक्त ने शिकायत का सत्यापन कराने के बाद 16 सितंबर 2019 को आरोपी पटवारी को 500 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। मामले की सुनवाई के बाद विशेष न्यायालय, खंडवा ने 31 मार्च 2026 को आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत तीन वर्ष के कारावास और 15 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके बाद कलेक्टर खंडवा ने 13 मई 2026 को उसे सरकारी सेवा से पृथक कर दिया। दूसरा मामला: पट्टा दिलाने के नाम पर वनरक्षक ने ली रिश्वत दूसरा मामला खरगोन जिले के भीकनगांव वन परिक्षेत्र के मचलगांव बीट में पदस्थ वनरक्षक आजम खान का है। शिकायतकर्ता सिगड़र डुडवे ने आरोप लगाया था कि वन भूमि पर खेती के संबंध में मौका नक्शा तैयार करने और पट्टा दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के एवज में वनरक्षक 5 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा था। लोकायुक्त की जांच में शिकायत सही पाए जाने पर 13 जुलाई 2019 को आरोपी को 1,900 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। विशेष न्यायालय ने 19 नवंबर 2025 को आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत चार वर्ष के कारावास और 5 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा नहीं करने पर दो माह के अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान किया है। कोर्ट के फैसले के बाद सामान्य वन मंडल, खरगोन के वन मंडल अधिकारी ने 28 नवंबर 2025 से आरोपी को सरकारी सेवा से पृथक कर दिया।