समाचार · छत्तीसगढ़
बिलासपुर में जनसंवाद में गिनती के यात्रियों से मिले GM:यात्री बैठे रहे, GM उठकर चले गए; ट्रेनों की लेटलतीफी दूर करने का दावा किया
बिलासपुर में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के जोनल मुख्यालय में यात्रियों की परेशानी सुनने के लिए जनसंवाद रखा गया। लेकिन यहां यात्रियों को अपनी बात कहने का मौका ही नहीं मिला। यात्री मंच के सामने बैठे रहे, जबकि महाप्रबंधक तरुण प्रकाश उनसे बात किए बिना प्लेटफॉर्म पर पहुंच गए। करीब 40 मिनट तक उन्होंने प्लेटफॉर्म पर घूमकर कुछ यात्रियों से थोड़ी देर बात की। लेकिन ट्रेनों की देरी, प्रतीक्षालय और यात्री सुविधाओं पर खुलकर बातचीत नहीं हुई। हालांकि, GM ने ट्रेनों की देरी दूर करने का दावा किया। कार्यक्रम शुरू होने के तीन मिनट बाद ही GM मंच से उठकर यात्रियों के बीच पहुंच गए। प्लेटफॉर्म नंबर 5-6 पर मौजूद कई यात्रियों को पता ही नहीं था कि उनसे बात करने वाले रेलवे के महाप्रबंधक हैं। एनसीसी के बच्चों से भी बात की गई, लेकिन इनमें से ज्यादातर पहली बार ट्रेन में सफर करने जा रहे थे। तेज आवाज में चल रहे साउंड सिस्टम के कारण लोगों को बातचीत सुनने में भी परेशानी हुई। कार्यक्रम का ज्यादा प्रचार नहीं होने से कई यात्रियों को इसकी जानकारी ही नहीं थी। रेल यात्री संघ के सदस्य भी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। जोन के 216 स्टेशनों पर हुआ जनसंवाद दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर, रायपुर और नागपुर मंडल के 216 स्टेशनों पर गुरुवार को रेल जनसंवाद हुआ। इसमें यात्रियों की सुविधाओं, साफ-सफाई और रेल सेवाओं से जुड़ी समस्याएं सुनी जानी थीं। बिलासपुर स्टेशन पर सुबह 10 बजे महाप्रबंधक तरुण प्रकाश पहुंचे। चांपा में अपर महाप्रबंधक विजय कुमार साहू और उसलापुर में मंडल रेल प्रबंधक राकेश रंजन मौजूद रहे। रेलवे अफसरों ने कहा था कि यात्री अपनी शिकायतें बता सकते हैं और सुविधाएं बेहतर करने के सुझाव भी दे सकते हैं। सुबह से इंतजार, फिर भी नहीं मिला जवाब यात्रियों की सबसे बड़ी परेशानी ट्रेनों की देरी रही। यात्री घंटों से ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। उनका कहना था कि छत्तीसगढ़ से होकर चलने वाली कई ट्रेनें लंबे समय से देरी से चल रही हैं। इससे समय पर मंजिल तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। हरिद्वार जा रहे सुरेश मिश्रा ने बताया कि वे दोपहर से ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। शाम से रात हो गई, लेकिन ट्रेन का पता नहीं था। कुछ छात्रों ने ट्रेन लेट होने पर GM से जवाब मांगा। इस पर उन्होंने सूचना स्क्रीन देखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्क्रीन पर ट्रेनों की स्थिति पता चल सकती है। लेकिन ट्रेन देरी से क्यों चल रही है और कितनी देर में पहुंचेगी, इस बारे में मौके पर साफ जवाब नहीं मिला। टिकट काउंटर पर भी नहीं मिली राहत टिकट काउंटर पर कतार में खड़े यात्रियों से GM ने पूछा कि वे ऑनलाइन टिकट लेने के बजाय लाइन में क्यों खड़े हैं। लेकिन साउंड सिस्टम की तेज आवाज के कारण यात्रियों को उनकी बात समझने में परेशानी हुई। इस दौरान रेलवे कर्मचारी यात्रियों को टिकट वेंडिंग मशीन से टिकट निकालने में मदद कर रहे थे। गेट नंबर-1 के सामने कुछ यात्री अपने परिवार के साथ जमीन पर बैठकर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। GM ने उन्हें प्लेटफॉर्म पर जाकर बैठने की सलाह दी। हालांकि, प्रतीक्षालय और बैठने की सुविधा जैसे मुद्दों पर विस्तार से बातचीत नहीं हुई। GM बोले- ट्रेनों को समय पर चलाने का करेंगे प्रयास महाप्रबंधक तरुण प्रकाश ने कहा कि ट्रेनों को समय पर चलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। यात्रियों के सुझावों और शिकायतों के आधार पर रेल सेवाओं और स्टेशन की व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। इधर जनसंवाद, दूसरी तरफ कई ट्रेनें घंटों लेट फेस्टिव सीजन में ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ बढ़ गई है। इस बीच बीते 24 घंटे में कई ट्रेनें देरी से चलीं। बिलासपुर-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस 50 मिनट से दो घंटे तक लेट रही। उत्कल एक्सप्रेस को कुछ स्टेशनों पर दोबारा समय तय कर चलाना पड़ा। हावड़ा-पुणे एसी दुरंतो भी देरी से चली। गीतांजलि एक्सप्रेस और शालीमार-एलटीटी एक्सप्रेस के समय पर भी असर पड़ा।