national
ITBP चीफ का खुलासा- अरुणाचल बॉर्डर पर चीन के साथ अब भी जारी है टकराव, कई बार आमने-सामने आए जवान

India China Border Tension: अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने खुलासा करते हुए कहा कि राज्य में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के कई इलाकों में भारतीय और चीनी जवान आमने-सामने आए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह स्थिति अब भी बनी हुई है.
अरुणाचल सीमा पर क्या बोले ITBP चीफ?
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ITBP जवानों के वार्षिक सम्मान समारोह में शत्रुजीत कपूर ने सीमा के हालात की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों पर दोनों देशों के जवानों के बीच आमना-सामना हुआ है. यह सिलसिला अभी समाप्त नहीं हुआ है. हालांकि, उन्होंने इन घटनाओं में किसी के घायल होने या हथियारों के इस्तेमाल की जानकारी नहीं दी.
चीनी सैनिकों के सामने डटे रहे शौर्य कमांडो
शत्रुजीत कपूर ने ITBP के नए बनाए गए शौर्य कमांडो दस्ते की तारीफ की. उन्होंने बताया कि सीमा पर चुनौतीपूर्ण हालात के दौरान इन जवानों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया. शौर्य कमांडो को खासतौर पर अधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में अभियान चलाने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है. कठिन मौसम और दुर्गम रास्तों पर काम करना इनकी विशेषज्ञता है.
3,488 किलोमीटर लंबी सीमा की निगरानी करता है ITBP
ITBP का गठन साल 1962 में हुआ था. शुरुआत में इसे पहाड़ी इलाकों में विशेष अभियान चलाने वाले बल के रूप में तैयार किया गया था. वर्ष 2004 में इसे चीन सीमा की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई.
वर्तमान में यह बल चीन के साथ लगती 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. कपूर ने कहा कि सीमा की निगरानी के साथ ITBP को अपनी मूल पर्वतीय युद्ध क्षमता भी बनाए रखनी चाहिए.
चीन से निपटने के लिए ड्रोन और भूमिगत ढांचों पर जोर
ITBP महानिदेशक ने चीन से लगी सीमा को सबसे कठिन मोर्चा बताया. उन्होंने कहा कि सुरक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाया जा रहा है. इसके तहत सीमा पर तैनात सभी इकाइयों में ड्रोन प्लाटून बनाए गए हैं. इनकी मदद से दुर्गम क्षेत्रों की निगरानी और संभावित खतरों की पहचान बेहतर तरीके से की जा सकेगी.
कपूर ने बताया कि गलवान जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष युद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम भी तैयार किया गया है. इसके अलावा जवानों की सुरक्षा और अभियान चलाने की क्षमता बढ़ाने के लिए भूमिगत ढांचों का निर्माण किया जा रहा है.
Also Read: दाऊद के ठिकाने पर UN से इतनी बड़ी गलती कैसे? एक्सपर्ट बोले- यह चूक नहीं, सोची-समझी साजिश