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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बढ़ा आक्रोश, शिल्पी नेहा तिर्की ने खोला मोर्चा; बोलीं- झारखंड में रद्द हो SIR

INT News26 September 2026 at 03:53 pm

रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट

Jharkhand SIR: देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर सियासी घमासान के बीच अब झारखंड में भी इसका विरोध तेज हो गया है. झारखंड सरकार की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने SIR की मौजूदा प्रक्रिया को रद्द कर दोबारा प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है. वहीं, स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि झारखंड में SIR लागू नहीं होने दिया जाएगा.

झारखंड में SIR पर सरकार के मंत्री मुखर

मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की का कहना है कि मौजूदा SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं और इसे रद्द कर पारदर्शी तरीके से दोबारा प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए. वहीं इरफान अंसारी ने CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर आरोप लगाया कि वे भाजपा के लिए काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि “ज्ञानेश कुमार ने बीजेपी के लिए वोट चोरी की है, अब हमलोग झारखंड में SIR लागू नहीं होने देंगे.” वहीं, इरफान ने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार भाजपा के एजेंट है और भाजपा उन्हें अगला राष्ट्रपति बनना चाहती है. उन्होंने कहा है कि देश में SIR के जरिए वोटों की चोरी होती गई और बीजेपी को सत्ता मिलने गया. अब यह नहीं होने देंगे भाजपा का चाल सबने पकड़ लिया है. बहुत जल्द SIR पर राजनीति आंदोलन झारखंड में तेज होगा. हालांकि, ये नेताओं के राजनीतिक आरोप हैं. चुनाव आयोग ने पहले भी विपक्ष की ओर से लगाए गए “वोट चोरी” के आरोपों को खारिज किया है और आरोप लगाने वालों से सबूत देने की मांग की है.

झारखंड में कब शुरू हुआ SIR?

झारखंड में SIR की प्रक्रिया 30 जून 2026 से शुरू हुई थी. इसके तहत BLO ने घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया. 5 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की गई. दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद 7 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है. यानी झारखंड में SIR की प्रक्रिया पहले से चल रही है और अब इसके अंतिम चरण को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आ रहा है.

देश में कब-कब हुआ SIR?

चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में देश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े पुराने रिकॉर्ड 1951-52 के पहले आम चुनाव से उपलब्ध हैं. आयोग की वेबसाइट पर 1951-52, 1957, 1962 और बाद के आम चुनावों के विस्तृत रिकॉर्ड मौजूद हैं. वर्ष 2025 के पहले देश में कुल 8 बार समय समय पर SIR हुआ है. मौजूदा SIR लंबे अंतराल के बाद बड़े स्तर पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। चुनाव आयोग ने 2025-26 में इसे अलग-अलग चरणों में शुरू किया है.

ज्ञानेश कुमार को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?

SIR को लेकर मुख्य विवाद चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची में नाम जोड़ने-काटने की प्रक्रिया को लेकर है. 2025 में बिहार के SIR के दौरान विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए और मतदाता सूची में गड़बड़ी का दावा किया. ज्ञानेश कुमार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए राहुल गांधी से वोट चोरी के आरोपों के समर्थन में शपथपत्र के साथ सबूत देने को कहा था. विवाद 2026 में भी जारी रहा. अप्रैल 2026 में विपक्षी सांसदों ने ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नोटिस दिया था, जिसे लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति ने स्वीकार नहीं किया.

दो चुनाव आयुक्तों ने कई फैसलों पर जताई आपत्ति

सितंबर 2026 में एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में कई फैसलों पर आपत्ति जताई थी, जिनमें SIR से जुड़े फैसले भी शामिल थे. चुनाव आयोग ने कहा कि आयोग के भीतर अलग-अलग राय आना सामान्य प्रक्रिया है और SIR से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले पूर्ण आयोग की सहमति से लिए गए.

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झारखंड में SIR रद्द करने की मांग

शिल्पी नेहा तिर्की ने मांग की कि झारखंड में SIR की मौजूदा प्रक्रिया को रद्द किया जाए और ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जो सभी वर्गों के मतदाताओं के लिए समान रूप से सरल और सुलभ हो. उनके अनुसार, जब तक प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान नहीं होता, तब तक इसे लागू करने पर पुनर्विचार होना चाहिए. SIR को लेकर झारखंड में राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है. विपक्ष और सत्तापक्ष के अलग-अलग नेताओं की ओर से इस मुद्दे पर बयान सामने आ रहे हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला राज्य की राजनीति के साथ-साथ चुनावी चर्चा का भी प्रमुख मुद्दा बना रह सकता है.

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