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डूब प्रभावित ग्रामीणों ने पुनर्वास की जमीन पर आपत्ति जताई:खेती और पुराने गांव से नाता न टूटे, गौशाला प्रभावित होने की आशंका
आऊ मध्य प्रदेश परियोजना के डूब क्षेत्र से असर पड़े ग्राम पाचारूंडी और काशीबर्डिया के परिवारों ने पुनर्वास के लिए नई आबादी बसाने की मांग की है। ग्रामीणों ने आगर मालवा जिला पंचायत सीईओ बी एस सोलंकी और आगर एसडीएम कमल मंडलोई को मिलकर आवेदन दिया। उन्होंने कहा कि पुनर्वास के लिए जमीन तय करते समय उनके पुराने घर, खेती की जमीन और मौजूदा व्यवस्थाओं का ध्यान रखा जाए। ग्रामीणों के मुताबिक, पुनर्वास के लिए ग्राम भीमलोद-पाचारूंडी के सर्वे नंबर 79/299 और ग्राम काशीबर्डिया के सर्वे नंबर 267, 291, 319, 320, 318, 292, 269 और 232 की जमीन बताई गई है। ग्रामीणों का कहना है कि काशीबर्डिया में उनकी खेती की जमीन है। वे लंबे समय से गांव से जुड़े रहे हैं। इसलिए पुनर्वास के दौरान उन्हें खेती और पुराने गांव से जुड़े रहने की सुविधा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। सर्वे नंबर 301 पर ग्रामीणों की आपत्ति ग्राम पंचायत पाचारूंडी ने सर्वे नंबर 301 की जमीन पर आबादी बसाने का प्रस्ताव दिया है। इस पर ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस जमीन पर अभी गौशाला चल रही है, जिसमें 500 से ज्यादा गायें हैं। ऐसे में वहां मकान बनने से गौशाला की व्यवस्था पर असर पड़ने का डर है। ग्रामीणों ने मांग की है कि तय की गई सभी जमीनों का मौके पर जाकर निरीक्षण किया जाए। राजस्व रिकॉर्ड की जांच हो और असर पड़े परिवारों की स्थिति के हिसाब से पुनर्वास की जगह तय की जाए। उनका कहना है कि पुनर्वास ऐसा हो, जिससे परिवारों की खेती, गांव से जुड़ाव और मौजूदा व्यवस्थाओं पर कोई असर न पड़े।