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मोहन भागवत बोले- 'भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए' सोचने वाला हिंदू नहीं, न्यूयॉर्क में और क्या-क्या कहा?

INT News30 August 2026 at 08:05 am

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में हिंदू-मुस्लिम संबंधों और भारत की विविधता को लेकर एक बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता. भागवत ने कहा कि हिंदू होने का मतलब यह मानना है कि अलग-अलग रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर जाते हैं.

धर्मों की विविधता के बीच मानवता की एकता पर जोर

भागवत ने यह बात न्यूयॉर्क में आयोजित 'One World One Humanity' कार्यक्रम में कही. यह कार्यक्रम विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों और नेताओं को एक मंच पर लाने के लिए आयोजित किया गया था. अपने संबोधन में उन्होंने धर्मों की विविधता के बीच मानवता की एकता पर जोर दिया.

'विविधता हमारी आंतरिक एकता की सजावट'

भागवत ने कहा कि RSS का मानना है कि पूरी मानवता एक है. दुनिया में लोगों की पहचान, धर्म और परंपराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन इन विविधताओं के पीछे एकता की भावना है. उन्होंने विविधता को स्वीकार करने, उसका सम्मान करने और उसे संरक्षित करने की बात कही.

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उन्होंने कहा कि प्रकृति का नियम विविधता है, जबकि उसके पीछे की सच्चाई एकता है. उनके मुताबिक, जिस तरह व्यक्ति अपनी पहचान की रक्षा करता है, उसी तरह उसे दूसरों की पहचान की भी रक्षा करनी चाहिए.

'भारत ने हमेशा दूसरों को जगह दी'

भागवत ने भारत की परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि यहां उन लोगों को भी शरण दी गई जो दुनिया में कहीं और सुरक्षित जगह नहीं पा सके. उन्होंने कहा कि हिंदू हिंदू दर्शन में अलग-अलग धार्मिक रास्तों को एक ही लक्ष्य की ओर जाने वाला माना जाता है.

इसी संदर्भ में उन्होंने मुस्लिमों को भारत से बाहर करने की सोच पर सवाल उठाया. उनके मुताबिक, किसी समुदाय को सिर्फ उसके धर्म के आधार पर भारत से बाहर करने की इच्छा हिंदू विचार की मूल भावना से मेल नहीं खाती.

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RSS के सेवा कार्यों का भी किया जिक्र

अपने संबोधन में भागवत ने RSS के सेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि संघ के स्वयंसेवक भारत में करीब 1.30 लाख सेवा परियोजनाएं चला रहे हैं. उन्होंने हरियाणा के चरखी दादरी में हुए विमान हादसे के बाद संघ के स्वयंसेवकों के राहत कार्य का उदाहरण भी दिया.

शताब्दी वर्ष में वैश्विक मंच से संदेश

भागवत का अमेरिका दौरा RSS के शताब्दी वर्ष में चल रहे वैश्विक आउटरीच कार्यक्रम का हिस्सा है. भागवत ने अपने संबोधन का फोकस मानवता की एकता, धार्मिक सद्भाव, विविधता और सामाजिक सेवा पर रखा. उनका मुस्लिमों को लेकर दिया गया बयान इसी व्यापक संदेश का सबसे चर्चित हिस्सा बनकर सामने आया है.