Thursday, 27 August 2026
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उतावली नदी तट पर 50 हजार समाजजनों ने पढ़ी नमाज:बुरहानपुर में 588वें उर्स पर अमन-चैन की दुआ की; 550 साल पुरानी परंपरा

INT News27 August 2026 at 09:43 am

बुरहानपुर के आजाद नगर क्षेत्र में स्थित उतावली नदी तट पर सूफी संत हजरत शाह निजामुद्दीन भिकारी चिश्ती का 588वां उर्स मनाया गया। इस अवसर पर बुधवार शाम करीब 50 हजार से अधिक मुस्लिम समाजजनों ने मगरिब की विशेष नमाज अदा की। यह परंपरा पिछले लगभग 550 वर्षों से चली आ रही है। मान्यता है कि हजरत शाह भिकारी के उर्स के तहत यह विशेष मगरिब की नमाज अदा की जाती है। बुधवार शाम 6 बजे से ही बड़ी संख्या में मुस्लिम समाजजन उतावली नदी तट पर नमाज के लिए पहुंचने लगे थे। यह अनूठी परंपरा केवल बुरहानपुर में ही देखने को मिलती है। इस दौरान 50 हजार से अधिक लोगों ने नमाज अदा कर देश और दुनिया में अमन-चैन की दुआएं मांगी। 588वें उर्स पर अमन-चैन की दुआ की

इस परंपरा का ऐतिहासिक महत्व है। पांच शताब्दी पहले हजरत शाह निजामुद्दीन भिकारी चिश्ती रेहमतुल्लाह अलैह ने उतावली नदी तट की नूर बलड़ी पर अंतिम सांस ली थी। तभी से उनके उर्स के अवसर पर शाम के समय इस तट पर नमाज अदा करने का रिवाज चला आ रहा है। इस वर्ष दरगाह में उनका 588वां उर्स मनाया गया। हजरत शाह मूल रूप से सिंध प्रांत के चिश्ती नगर के निवासी थे। उन्होंने इस्लाम धर्म का प्रचार करने के लिए पूरे हिंदुस्तान का भ्रमण किया और अपने अंतिम समय में बुरहानपुर पहुंचे। दुनिया भर से बुराहनपुर आते हैं समाजजन

उन्होंने उतावली नदी तट पर एकांत में धर्म का प्रचार किया और इस्लाम धर्म के एक महान सूफी संत के रूप में जाने गए। तभी से हर साल उनके उर्स पर उतावली नदी में मगरिब की नमाज पढ़ने की यह परंपरा कायम है। इस नमाज में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से जायरीन बुरहानपुर आते हैं। उर्स के अवसर पर दरगाह में दिनभर जियारत का सिलसिला जारी रहा। इस वर्ष उतावली नदी में पानी होने के कारण नमाज नदी से सटे तट पर अदा की गई। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।