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नरसिंहपुर जेल में महिला बंदी बना रहीं राखियां:रक्षाबंधन के लिए जेल गेट पर लगा हस्तशिल्प का स्टॉल
केंद्रीय जेल नरसिंहपुर में रक्षाबंधन के अवसर पर महिला बंदियों के हुनर को नया मंच मिला है। जेल में 10 से 15 महिला बंदी रंग-बिरंगे धागों, मोतियों और सजावटी सामग्री से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। पुरुष बंदी भी जूट और लकड़ी से हस्तनिर्मित सामग्री बना रहे हैं। महिला बंदियों ने तैयार राखियों में पारंपरिक और आधुनिक डिजाइन का मेल देखने को मिल रहा है। रंग-बिरंगे रेशमी धागों, मोतियों और सजावटी सामग्री से बनी राखियां आकर्षण का केंद्र हैं। बच्चों के लिए 'भाई-ब्रदर' लिखी विशेष राखियां भी तैयार की जा रही हैं। पुरुष बंदी भी बना रहे हस्तनिर्मित सामग्री इस पहल में पुरुष बंदी भी अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके द्वारा जूट और लकड़ी से विभिन्न आकर्षक वस्तुएं तैयार की जा रही हैं, जिन्हें रक्षाबंधन पर उपहार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। बंदियों के बनाए उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए जेल प्रशासन ने जेल परिसर के बाहर स्टॉल लगाया है। यहां शहरवासी उचित मूल्य पर राखियां और हस्तनिर्मित सामग्री खरीद सकते हैं। इससे बंदियों को अपने हुनर को समाज से जोड़ने का अवसर मिल रहा है। रचनात्मक गतिविधियों से पुनर्वास पर जोर जेल अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी ने बताया कि बंदियों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना पुनर्वास प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राखी निर्माण से महिला बंदियों में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि आमजन के लिए जेल गेट के बाहर स्टॉल लगाए गए हैं, ताकि बंदियों के हुनर को सम्मान और प्रोत्साहन मिल सके। रक्षाबंधन पर अपने बंदी भाइयों को राखी बांधने पहुंचने वाली बहनों की सुविधा और सुरक्षा के लिए भी जेल परिसर में आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।