समाचार · मध्य प्रदेश
धार में 12 दिन से मानसून पर ब्रेक:546.8 मिमी बारिश दर्ज, सोयाबीन को नमी का सहारा; रबी फसलों और जलस्रोतों को लेकर चिंता
धार शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले 12 दिनों से मानसून की रफ्तार धीमी बनी हुई है। आसमान में बादल छाने और कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी होने के बावजूद तेज बारिश नहीं हो रही है। बारिश के इस लंबे अंतराल ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि खेतों में नमी बनी होने से सोयाबीन की फसल फिलहाल अच्छी स्थिति में है, लेकिन आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो इसका असर रबी सीजन और जलस्रोतों पर पड़ सकता है। 12 दिन से बारिश का इंतजार धार क्षेत्र में करीब 12 दिनों से मानसून की गतिविधियां कमजोर हैं। दिन में कई बार आसमान में घने काले बादल छा जाते हैं, जिससे बारिश की उम्मीद बनती है, लेकिन तेज बारिश नहीं हो रही। कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी जरूर हुई है, लेकिन इससे किसानों को अपेक्षित राहत नहीं मिली है। अब तक 546.8 मिमी बारिश इस सीजन में धार क्षेत्र में अब तक 546.8 मिलीमीटर यानी करीब 21.53 इंच बारिश दर्ज की गई है। पिछले साल की तुलना में यह आंकड़ा कम बताया जा रहा है। बारिश में लंबे अंतराल के कारण खेती के साथ-साथ नदी, तालाब और अन्य जलस्रोतों के जलस्तर को लेकर भी चिंता बढ़ने लगी है। खेतों में नमी से सोयाबीन को फायदा बारिश थमने के बावजूद खेतों में पर्याप्त नमी बनी हुई है। इसका फायदा मौजूदा समय में सोयाबीन की फसल को मिल रहा है। किसानों के अनुसार फिलहाल फसल की स्थिति ठीक है और नमी के कारण पौधों की बढ़वार प्रभावित नहीं हुई है। हालांकि किसानों का कहना है कि यह स्थिति ज्यादा समय तक बनी रही तो परेशानी बढ़ सकती है। सोयाबीन के लिए मौजूदा नमी पर्याप्त है, लेकिन आगे की फसलों के लिए बारिश जरूरी है। रबी फसलों पर पड़ सकता है असर किसान राजेश के मुताबिक गेहूं और चना जैसी रबी फसलों के लिए नदी, तालाब और अन्य जलस्रोतों में पर्याप्त पानी होना जरूरी है। यदि मानसून का ब्रेक लंबा खिंचता है तो जलस्रोत पूरी तरह नहीं भर पाएंगे और रबी सीजन में सिंचाई की समस्या सामने आ सकती है। समय पर बारिश नहीं होने से किसानों को आगामी फसल की तैयारी और सिंचाई व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त चिंता करनी पड़ सकती है। नदी-तालाबों का जलस्तर भी चिंता का कारण बारिश में आए लंबे अंतराल का असर क्षेत्र के जलस्रोतों पर भी दिखाई देने लगा है। कई नदी-नालों और तालाबों में पानी पहुंचा है, लेकिन वे अभी पूरी क्षमता तक नहीं भर पाए हैं। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो इसका असर केवल खेती पर ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। किसानों और ग्रामीणों को आशंका है कि जलस्रोत पर्याप्त नहीं भरने पर गर्मी के मौसम में पानी की समस्या बढ़ सकती है। किसानों को मानसून लौटने का इंतजार फिलहाल सोयाबीन की फसल खेतों में मौजूद नमी के सहारे ठीक स्थिति में है, लेकिन किसानों की नजर अब मानसून की अगली बारिश पर टिकी है। पर्याप्त बारिश होने से जहां फसलों को राहत मिलेगी, वहीं नदी, तालाब और अन्य जलस्रोत भी भर सकेंगे।