समाचार · हरियाणा
झज्जर खारे पानी की जमीन पर किसान ने उगाई खुशहाली:2 हेक्टेयर जमीन पर 40 लाख रुपए से शुरू किया झींगा पालन, 20 टन तक पहुंचा उत्पादन
झज्जर में खारे पानी से प्रभावित जमीन को किसान अक्सर खेती के लिए बड़ी चुनौती मानते हैं, लेकिन झज्जर के कुतानी गांव के किसान श्यामपाल चौहान ने इसी चुनौती को कमाई के अवसर में बदल दिया। पारंपरिक खेती के लिए मुश्किल जमीन पर उन्होंने करीब 2 हेक्टेयर में झींगा पालन शुरू किया। करीब 40 लाख रुपए का निवेश कर शुरू किए गए इस काम में अब उत्पादन 20 टन तक पहुंच गया है। श्यामपाल को झींगा पालन से सालाना करीब 15.90 से 17 लाख रुपए की शुद्ध आय हो रही है। खारे पानी वाली जमीन पर शुरू किया नया प्रयोग श्यामपाल चौहान की जमीन खारे पानी से प्रभावित होने के कारण पारंपरिक खेती के लिए उपयुक्त नहीं थी। ऐसे में उन्होंने जमीन को खाली छोड़ने के बजाय इसके वैकल्पिक उपयोग के बारे में सोचा। झींगा पालन की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने मत्स्य विभाग से संपर्क किया। विभाग की ओर से उन्हें झींगा पालन का प्रशिक्षण दिया गया। तालाब तैयार करने, झींगा बीज डालने, पानी की गुणवत्ता बनाए रखने और पालन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में तकनीकी जानकारी दी गई। 40 लाख रुपए लगाकर 2 हेक्टेयर में तैयार किया तालाब प्रशिक्षण के बाद श्यामपाल ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अपनी जमीन पर झींगा पालन के लिए तालाब तैयार कराया। उन्होंने करीब 40 लाख रुपए का निवेश किया और भटेरा क्षेत्र में लगभग 2 हेक्टेयर भूमि पर झींगा पालन शुरू किया। शुरुआत में पानी की गुणवत्ता और तालाब के प्रबंधन जैसी कई चुनौतियां सामने आईं। इसके बावजूद उन्होंने विभागीय सलाह के अनुसार पानी और झींगा पालन की लगातार निगरानी की। एक साल में 18 से बढ़कर 20 टन हुआ उत्पादन श्यामपाल के अनुसार वर्ष 2024-25 में करीब 18 टन झींगा का उत्पादन हुआ था। वर्ष 2025-26 में उत्पादन बढ़कर करीब 20 टन हो गया। झींगा की बिक्री उन्हें करीब 380 से 480 रुपए प्रति किलो तक के भाव पर हुई। इससे उन्हें सालाना करीब 15.90 से 17 लाख रुपए की आय हो रही है। जिस जमीन पर पारंपरिक खेती करना मुश्किल था, वही अब उनके परिवार की आमदनी का प्रमुख जरिया बन गई है। किसान के लिए खारे पानी की जमीन बनी कमाई का जरिया श्यामपाल चौहान का कहना है कि शुरुआत में खारे पानी से प्रभावित जमीन को लेकर चिंता रहती थी, लेकिन झींगा पालन की तकनीकी जानकारी मिलने के बाद उन्होंने जोखिम लेकर नया काम शुरू किया। मत्स्य विभाग से मिले प्रशिक्षण और मार्गदर्शन से उन्हें काफी मदद मिली। अब उनका कहना है कि खारे पानी से प्रभावित क्षेत्र के अन्य किसान भी विशेषज्ञों से जानकारी लेकर झींगा पालन जैसी वैकल्पिक गतिविधियों को अपना सकते हैं। इससे ऐसी जमीन का उपयोग करने के साथ किसानों के लिए अतिरिक्त आय का रास्ता भी खुल सकता है।