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SIR के खिलाफ 7 दिन में 5वां प्रदर्शन... इंडिया ब्लॉक की नैरेटिव जीत या अभी बाकी है लड़ाई?

सोमवार को इंडिया ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला. इस दौरान मंडी हाउस से सुप्रीम कोर्ट के बीच दिनभर गहमा-गहमी की स्थिति बनी रही और जनसैलाब उमड़ा. इसके बाद इंडिया ब्लॉक के 11 नेताओं ने SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. यह विपक्ष की उस राजनीतिक रणनीति का अहम पड़ाव है, जिसकी शुरुआत मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और फॉर्म-6 में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध से हुई थी.
यहां अहम सवाल ये है कि कैसे कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक का यह नैरेटिव अपने अंतिम चरण तक पहुंचा? और क्या यह उस नैरेटिव की जीत है? 5 पॉइंट्स में समझिए
पहले जानिए, SIR और CEC के खिलाफ विपक्ष ने क्या किया ?
SIR के खिलाफ विपक्ष ने सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अपनी आवाज उठाई. मार्च, धरना और याचिका के जरिए INDIA ब्लॉक ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए. देखिए, इन 7 दिनों में विपक्ष ने क्या-क्या किया.
अब 5 पॉइंट्स में समझिए नैरेटिव
1. सड़क पर विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन
24 सितंबर को जारी एक मीडिया रिपोर्ट से SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ विपक्ष को पहली बार अपने आरोपों के लिए मजबूत आधार मिला. इसके बाद विपक्ष सड़क पर उतर आया. कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने चुनाव कराने के तरीके, 'वोट चोरी' के आरोपों और SIR को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.
6 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने संसद भवन से CEC कार्यालय तक मार्च निकाला, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया. इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आकाशवाणी परिसर में धरने पर बैठ गए. इसके अगले दिन यानी 7 अक्टूबर को विपक्ष ने एक बार फिर से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया लेकिन पुलिस ने फिर उन्हें रोक दिया. दोनों दिन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत विपक्ष के दूसरे नेताओं को हिरासत में लिया.
2. राजघाट पहुंचकर नैतिक आंदोलन का संकेत
इसके अगले दिन 8 अक्टूबर को राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और INDIA गठबंधन के सांसद कनॉट प्लेस में एकजुट हुए और बसों से राजघाट पहुंचे. जहां महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि देने के बाद विपक्षी नेताओं ने शांतिपूर्ण धरना दिया. इसके जरिए विपक्ष ने अपने आंदोलन को सिर्फ राजनीतिक विरोध के बजाय लोकतंत्र की रक्षा के लिए नैतिक लड़ाई के रूप में पेश करने की कोशिश की.
इसके अगले दिन 9 अक्टूबर को देर शाम राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, ममता बनर्जी और विपक्ष के दूसरे नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाकात की और उन्हें अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा. राहुल गांधी ने दावा किया कि उन्होंने राष्ट्रपति को बताया कि 'वोट चोरी' से लोकतंत्र को नुकसान पहुंच रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ने उनसे दस्तावेज और सबूत मांगे.
3. सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई
इसके बाद 12 अक्टूबर को विपक्ष अपनी लड़ाई अदालत लेकर गई. राहुल गांधी ने कांग्रेस और सहयोगी दलों के नेताओं के साथ सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च किया. विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दाखिल की. इसमें SIR और फॉर्म-6 से जुड़ी कथित गड़बड़ियों को चुनौती दी गई है. याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने तक की प्रक्रिया के तहत निलंबित करने और उनके फैसलों पर रोक लगाने की मांग की गई है.
4. विपक्षी एकता से मोदी सरकार पर निशाना
इस पूरे मामले के दौरान राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव समेत गठबंधन के बड़े नेताओं ने हाथों में संविधान की प्रति लेकर दिल्ली की सड़कों पर अपनी ताकत दिखाई. आंदोलन के जरिए राहुल गांधी यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी लड़ाई सत्ता पाने के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान से जुड़ी संस्थाओं की रक्षा के लिए है. चुनाव आयोग पर सवाल उठाने के साथ ही विपक्ष का असली राजनीतिक निशाना मोदी सरकार और बीजेपी हैं.
5. 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए चुनावी मुद्दा
अगले साल उत्तर प्रदेश समेत सात राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव होने हैं. जिस पहले चुनाव आयोग की निष्पक्षता और SIR मुद्दा विपक्ष की रणनीति का अहम हिस्सा है. कांग्रेस और INDIA गठबंधन इस मुद्दे के जरिए अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और चुनाव में पारदर्शिता यानी पूरी प्रक्रिया को साफ-सुथरा रखने के सवाल को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं. संसद से सड़क और फिर सुप्रीम कोर्ट तक आंदोलन को एक के बाद एक आगे बढ़ाना इसी रणनीति का हिस्सा है.
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