national
दुनिया भर में 82.6 करोड़ लोग घोर गरीबी में, आधी आबादी के पास महज दो प्रतिशत संपत्ति

वैश्विक असमानता की तस्वीर संपति के बंटवारे में सबसे साफ दिखती. है. वर्ल्ड इनइक्वैलिटी लैब से जुड़े आंकड़ों के अनुसार दुनिया की सबसे अमीर 10% आबादी के पास करीब 75% संपत्ति है, जबकि निचली 50% आबादी के हिस्से में केवल 2% संपत्ति आती है. आय का बंटवारा भी इसी तरह असमान है. शीर्ष 10% को वैश्विक आय का आधे से अधिक हिस्सा मिलता है.
नौकरी है, फिर भी गरीबी से बाहर नहीं
2025 में करीब 28.4 करोड़ कामगार अत्यंत गरीबी में जीवन बिता रहे थे. यानी रोजगार होना भी सम्मानजनक जीवन की गारंटी नहीं है. कम मजदूरी, अस्थायी काम और सामाजिक सुरक्षा का अभाव परिवारों को आर्थिक संकट में धकेलता रहता है. भारत में भी संपत्ति के संकेंद्रण की तस्वीर चिंताजनक है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार शीर्ष 1% के पास करीब 40% और शीर्ष 10% के पास लगभग 65% राष्ट्रीय संपत्ति है.
मजदूरी, आवास, स्वास्थ्य सुविधाओं में असमानता
बढ़ती संपत्ति और घटती गरीबी एक ही बात नहीं है. गरीबी दूर करने के लिए अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ाना भर पर्याप्त नहीं. सम्मानजनक मजदूरी, सुरक्षित आवास, बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा तथा प्रभावी सामाजिक जरूरी है. असमानता का एक और पहलू पर्यावरण में दिखता है, अनुमान के अनुसार निजी पूंजी से जुड़े कार्बन उत्सर्जन में सबसे अमीर 10% की हिस्सेदारी करीब 77% है.
ये भी पढ़ें: EC संधू और जोशी ने की थी वरिष्ठ अधिकारी की शिकायत, कैबिनेट सचिवालय ने कार्रवाई से किया इनकार, जानें क्यों
बढ़ी गरीबी और अमीरी की खाई
82.6 करोड़ से अधिक लोग दुनिया में प्रतिदिन तीन डॉलर से कम पर गुजारा करने को मजबूर
280 करोड़ से अधिक लोग सुरक्षित और पर्याप्त आवास की कमी से जूझ रहे
02 फीसदी संपत्ति दुनिया की निवली आधी आबादी के पास शीर्ष 10 फीसदी के पास
28.4 करोड़ कामगार वर्ष 2025 में अत्यंत गरीबी में जीवन बिता रहे थे
भारत में शीर्ष एक फीसदी के पास करीब 40 फीसदी संपत्ति, जबकि शीर्ष 10 फीसदी के पास लगभग 65 फीसदी