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जबलपुर में पत्नी ने पति को किडनी देकर बचाई जान:ट्रांसप्लांट के बाद ICU में ही की करवाचौथ की पूजा; छलनी से देखा पति का चेहरा
जबलपुर में करवाचौथ का पर्व एक परिवार के लिए यादगार बन गया। यहां पत्नी ने पति की लंबी उम्र की कामना करने के साथ ही उन्हें अपनी एक किडनी डोनेट करके नया जीवन दिया। दो साल से डायलिसिस पर चल रहे पति का किडनी ट्रांसप्लांट सफल रहा। ऑपरेशन के बाद खुद आईसीयू में भर्ती होने के बावजूद पत्नी ने अस्पताल में ही करवाचौथ की पूजा की। कमजोरी के कारण वह व्हीलचेयर से अस्पताल परिसर में पहुंचीं और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद आईसीयू में छलनी से पति का चेहरा देखा। शहर के शांति नगर निवासी दीपक गुप्ता (55) लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। पिछले दो साल से उनका डायलिसिस चल रहा था। लगातार इलाज और बीमारी की परेशानी से परिवार भी चिंतित था। करीब सात महीने पहले दीपक की हालत और बिगड़ने लगी। ऐसे मुश्किल समय में उनकी पत्नी रश्मि गुप्ता ने उन्हें अपनी एक किडनी दान करने का फैसला किया। 25 अक्टूबर को ट्रांसप्लांट हुआ
करवाचौथ पर जहां महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। वहीं, रश्मि ने पति को किडनी दान कर उनकी जिंदगी बचाने का फैसला किया। इसके लिए पति-पत्नी दोनों 24 अक्टूबर को अस्पताल में भर्ती हुए। डॉक्टरों ने 25 अक्टूबर को किडनी ट्रांसप्लांट की तारीख तय की। डॉक्टर विशाल वडेरा के अनुसार, दीपक के शरीर में कुछ ऐसी एंटीबॉडी थीं, जो डोनर रश्मि की किडनी के खिलाफ प्रतिक्रिया कर सकती थीं। इस जटिल स्थिति से निपटने के लिए प्लाज्माफेरेसिस किया गया। एंटीबॉडी को कम करने के लिए विशेष इंजेक्शन भी दिए गए। इसके बाद किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। दूरबीन तकनीक से निकाली किडनी
किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. राजेश पटेल ने बताया कि डोनर की किडनी निकालने की प्रक्रिया लैप्रोस्कोपिक यानी दूरबीन तकनीक से की गई। करीब साढ़े तीन से चार घंटे तक ऑपरेशन चला। 24 घंटे में किडनी ने बेहतर काम करना शुरू किया
डॉक्टरों के अनुसार, ट्रांसप्लांट के 24 घंटे के भीतर नई किडनी ने बेहतर तरीके से काम करना शुरू कर दिया। ऑपरेशन के तीसरे दिन दीपक का क्रिएटिनिन स्तर 1.0 दर्ज किया गया। फिलहाल उन्हें डायलिसिस की जरूरत नहीं पड़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी स्थिति में सुधार हो रहा है और कुछ ही दिनों में अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है। पति बोले- पत्नी के त्याग से मिला नया जीवन
सफल ऑपरेशन के बाद करवाचौथ पर अस्पताल के बेड पर लेटे दीपक गुप्ता भावुक हो गए। उन्होंने नम आंखों से कहा कि उन्हें जो नया जीवन मिला है, वह उनकी पत्नी के त्याग की बदौलत है। वहीं, रश्मि गुप्ता ने कहा, 'हर बार मैं अकेले उपवास रखती थी, लेकिन इस बार हम दोनों ही दो दिन पहले से उपवास रखे हुए हैं। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि हमें मिला यह नया जीवन हमेशा स्वस्थ और खुशहाल रहे।' ICU में देखा पति का चेहरा
ऑपरेशन के बाद रश्मि की शारीरिक स्थिति को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने उनके लिए करवाचौथ की पूजा का इंतजाम किया। कमजोरी के बावजूद रश्मि अस्पताल के कपड़ों और मास्क में व्हीलचेयर पर बैठकर अस्पताल परिसर पहुंचीं। यहां उन्होंने चंद्रमा को जल अर्पित किया। इसके बाद वापस आईसीयू में पहुंचकर छलनी से पति दीपक का चेहरा देखा और उनकी लंबी उम्र की कामना की।