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एयरफोर्स चीफ बोले- ऑपरेशन सिंदूर ने साबित की भारत की ताकत, 200 KM भीतर तक सटीक निशाना, कोई टारगेट वायुसेना की पहुंच से बाहर नहीं

Operation Sindoor: पाकिस्तान की सीमा के भीतर 200 किलोमीटर तक सटीक हमले और 1,200 किलोमीटर लंबे मोर्चे पर कार्रवाई की क्षमता. भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी इसी ताकत का प्रदर्शन किया था. अब वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने इस सैन्य अभियान को लेकर कई अहम खुलासे किए हैं. उन्होंने कहा कि भारत ने साबित कर दिया है कि दुश्मन का कोई भी ठिकाना एयरफोर्स की पहुंच से बाहर नहीं है. एयरफोर्स चीफ ने बताया कि स्वदेशी हथियारों, सटीक खुफिया जानकारी और आधुनिक तकनीक ने इस अभियान में निर्णायक भूमिका निभाई. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय वायुसेना को अपनी ताकत लगातार बढ़ानी होगी.
1,200 किलोमीटर का मोर्चा, 200 किलोमीटर भीतर तक सटीक निशाना
वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने रविवार को न्यूज एजेंसी पीटीआई के साथ बातचीत में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना की रणनीति और मारक क्षमता के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि पश्चिमी मोर्चे पर 1,200 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में और दुश्मन की सीमा के 200 किलोमीटर भीतर तक सटीक हमले करने की क्षमता ने भारत की सैन्य ताकत साबित कर दी.
एयर चीफ मार्शल सिंह ने बताया इस अभियान ने दिखाया कि भारतीय वायुसेना जरूरत पड़ने पर दूर स्थित लक्ष्यों को भी प्रभावी ढंग से निशाना बना सकती है. उन्होंने कहा कि वायु शक्ति किसी संकट में सबसे पहले कार्रवाई करने और दुश्मन को आगे हमला करने से रोकने में अहम भूमिका निभाती है.
ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया है कि हमने जो रास्ता चुना है, वह सही है. हम और भी अधिक दृढ़ संकल्प के साथ इस रास्ते पर आगे बढ़ते रहेंगे ताकि अगर देश को फिर हमारी जरूरत पड़े तो भारतीय वायुसेना और भी तेजी से, अधिक सटीक और निर्णायक ढंग से देश की शर्तों पर कार्रवाई कर सके- वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह
ऑपरेशन सिंदूर पर वायुसेना प्रमुख एपी सिंह के बयान की अहम बातें
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के भीतर 200 किलोमीटर तक सटीक निशाना लगाने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया. पश्चिमी मोर्चे पर 1,200 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में भारतीय वायुसेना ने अपनी सैन्य ताकत दिखाई.
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि भारत में विकसित हथियार प्रणालियों ने दुश्मन के इलाके में भीतर तक जाकर भारी नुकसान पहुंचाया. भारतीय वायुसेना की स्वदेशी नेटवर्क आधारित वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तान की ओर से बड़ी संख्या में भेजे गए ड्रोन और दूर से हमला करने वाले हथियारों को विफल किया.
अभियान की सफलता में खुफिया जानकारी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, सटीक हथियारों, सेंसर और बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली का योगदान रहा.
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बताया कि परिस्थितियों के मुताबिक सैन्य विकल्प बदलने की क्षमता ने प्रभावी कार्रवाई करने और संघर्ष को बढ़ने से रोकने में मदद की.
पहलगाम हमले के जवाब में शुरू हुआ था ऑपरेशन सिंदूर
अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था. इसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में स्थित आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया. इस सैन्य अभियान के दौरान चार दिनों तक वायुसेना की कमान संभालने वाले एयर चीफ मार्शल सिंह ने बताया कि भारतीय सेनाओं ने परिस्थितियों के मुताबिक अपने विकल्पों का इस्तेमाल किया.
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से सबसे बड़ी सीख यह मिली कि युद्ध के दौरान किसी एक योजना या हथियार पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए. दुश्मन की रणनीति बदलने पर तुरंत नई परिस्थितियों के अनुरूप कार्रवाई करने की क्षमता बेहद जरूरी है.
सैन्य अभियान के स्तर पर यह सीख सबसे अहम है कि हमें हमेशा अपने पास कई विकल्प रखने चाहिए और दुश्मन के अपनी रणनीति बदलने पर तेजी से उसके अनुसार खुद को ढालने की क्षमता बनाए रखनी चाहिए- वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह
स्वदेशी हथियारों ने दुश्मन के इलाके में पहुंचाया भारी नुकसान
वायुसेना प्रमुख ने भारत में विकसित हथियार प्रणालियों के प्रदर्शन की विशेष सराहना की. उन्होंने दावा किया कि स्वदेशी हथियारों ने दुश्मन के क्षेत्र में अंदर तक जाकर भारी नुकसान पहुंचाया. एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि पूरे अभियान में नागरिकों और असैन्य संपत्तियों को नुकसान नहीं पहुंचाने की प्रतिबद्धता का भी पालन किया गया. उन्होंने कहा कि अभियान की सफलता किसी एक लड़ाकू विमान या मिसाइल की वजह से नहीं मिली. इसके पीछे कई सैन्य क्षमताओं का आपसी तालमेल था.
इसमें सटीक खुफिया जानकारी, नेटवर्क आधारित अभियान, लंबी दूरी से हमला करने वाले हथियार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और बहुस्तरीय वायु रक्षा तंत्र शामिल थे. इन सभी संसाधनों को एक साथ इस्तेमाल करके भारतीय वायुसेना ने अपनी कार्रवाई को प्रभावी बनाया.
पाकिस्तान के ड्रोन और हथियारों को कैसे किया नाकाम?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हवाई सुरक्षा भी बड़ी चुनौती थी. वायुसेना प्रमुख ने बताया कि पाकिस्तान की ओर से बड़ी संख्या में ड्रोन और दूर से हमला करने वाले हथियार इस्तेमाल किए गए, लेकिन भारत की स्वदेशी नेटवर्क आधारित वायु रक्षा प्रणाली ने इन खतरों को विफल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
हमारे स्वदेशी हथियारों ने शानदार प्रदर्शन किया और दुश्मन के इलाके में भीतर तक जाकर भारी नुकसान पहुंचाया. साथ ही हमने यह सुनिश्चित किया कि किसी भी नागरिक या असैन्य संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हो- वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह
इस सुरक्षा कवच की वजह से भारतीय वायुसेना अपनी कार्रवाई जारी रख सकी.
एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल लड़ाकू विमानों की संख्या या मिसाइलों की मारक दूरी से नहीं जीता जाता. इसके लिए सेंसर, हथियार, निगरानी व्यवस्था और संचार नेटवर्क का एकीकृत तरीके से काम करना जरूरी है.
वायुसेना प्रमुख ने बताया- भविष्य के युद्ध के लिए क्या है सबसे जरूरी?
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बावजूद एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने आत्मसंतुष्टि से बचने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा- इसका मतलब यह नहीं है कि हम यहीं रुक जाएं. हमें अपनी क्षमताओं को और मजबूत करने तथा उनका विस्तार करने की जरूरत है. वायुसेना प्रमुख के मुताबिक, आने वाले समय में खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी और टोही क्षमताओं को बेहतर बनाना प्राथमिकता होगी. इसके साथ इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन रोधी तकनीक और मजबूत संचार नेटवर्क पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा.
हम यहीं रुक जाएं. हमें अपनी क्षमताओं को और मजबूत करने तथा उनका विस्तार करने की जरूरत है- वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई आधारित निर्णय सहायता प्रणालियों को विकसित करना भी भविष्य की योजनाओं का हिस्सा है. इससे जटिल सैन्य परिस्थितियों में उपलब्ध सूचनाओं का तेजी से विश्लेषण करने और उचित निर्णय लेने में मदद मिल सकती है. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी बड़े संघर्ष में लंबे समय तक टिके रहने के लिए केवल आधुनिक हथियार काफी नहीं हैं. मजबूत आपूर्ति व्यवस्था, रखरखाव, सैन्य बुनियादी ढांचा और देश में हथियारों का उत्पादन भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
2047 तक दुनिया की सबसे सक्षम वायुसेनाओं में शामिल होने का लक्ष्य
वायुसेना प्रमुख ने भारतीय वायुसेना की भविष्य की तैयारियों को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि आर्थिक और तकनीकी रूप से मजबूत भारत के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था भी जरूरी है. उन्होंने बताया कि वायुसेना ऐसी बहु-क्षेत्रीय सैन्य शक्ति के रूप में विकसित होना चाहती है, जो अलग-अलग तरह के संघर्षों में देश के रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी हितों की रक्षा कर सके.
एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि साल 2047 तक भारतीय वायुसेना को दुनिया की सबसे सक्षम, आधुनिक, इनोवेटिव और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर वायु सेनाओं में शामिल करने का लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि इस दिशा में पूरे देश के स्तर पर प्रयास करने होंगे. इसमें स्वदेशी रक्षा उद्योग, नई तकनीकों के विकास और सैन्य क्षमताओं के विस्तार की अहम भूमिका होगी.
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