Wednesday, 7 October 2026
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कानपुर चिड़ियाघर में काले हिरण पर संक्रमण का कहर, 15 दिन में चार की मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट सबको चौकाया

INT News7 October 2026 at 07:49 am

Kanpur Zoo Blackbuck Death: कानपुर प्राणी उद्यान में काले हिरणों की लगातार हो रही मौत ने चिड़ियाघर प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. महज 15 दिनों के भीतर चार काले हिरणों की जान जा चुकी है. खास बात यह है कि कई हिरण सामान्य रूप से चलते-फिरते अचानक जमीन पर गिर रहे हैं और कुछ ही देर में दम तोड़ दे रहे हैं. मौतों का सिलसिला बढ़ने के बाद चिड़ियाघर प्रशासन ने भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर बरेली के विशेषज्ञों से मदद मांगी. मंगलवार को आईवीआरआई की तीन सदस्यीय टीम कानपुर चिड़ियाघर पहुंची और हिरणों के बाड़े का निरीक्षण करने के साथ एक मृत हिरण का पोस्टमार्टम किया.

पोस्टमार्टम में सामने आया खून के संक्रमण का संकेत

आईवीआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एम. करीकलन, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश कुमार और तकनीशियन आदर्श कुमार ने जांच के दौरान मृत हिरण के नमूने लिए. प्रारंभिक जांच में हीमोप्रोटोजोआ संक्रमण की आशंका जताई गई है. यह खून में परजीवी के कारण होने वाला संक्रमण है. विशेषज्ञों ने आगे की जांच के लिए विसरा समेत अन्य नमूने सुरक्षित किए हैं, जिन्हें जांच के लिए बरेली स्थित आईवीआरआई भेजा गया है. अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की पूरी वजह स्पष्ट हो सकेगी.

पहले तीन हिरणों की मौत, अब चौथे ने भी तोड़ा दम

कानपुर चिड़ियाघर में पिछले सप्ताह तीन काले हिरणों की मौत हो चुकी थी. उस समय चिकित्सकों ने टॉक्सीनिया को संभावित कारण माना था और एक हिरण का विसरा जांच के लिए भेजा गया था. इसकी रिपोर्ट अभी तक नहीं मिल सकी है. इसी बीच दो दिन पहले एक और नर काले हिरण की मौत हो गई. चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक डॉ. नासिर और डॉ. कटियार लगातार हिरणों के उपचार में जुटे हैं, लेकिन इसके बावजूद मौतों का सिलसिला रुक नहीं सका.

एक बाड़े में 87 से ज्यादा हिरण, संक्रमण फैलने की चिंता

चिड़ियाघर के एक बाड़े में 87 से अधिक काले हिरण रखे गए हैं. बड़ी संख्या में हिरणों के एक साथ रहने के कारण संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है. बारिश के बाद से मौतों की घटनाएं बढ़ने की बात भी सामने आई है. बताया जा रहा है कि बीमार होने वाले हिरण पहले सुस्त पड़ते हैं और उनका खाना-पीना कम हो जाता है. इसके बाद तीन से चार दिन के भीतर उनकी हालत अचानक बिगड़ती है और वे चलते-चलते गिर जाते हैं.

जांच में पहले भी मिले थे परजीवी

अगस्त में कराई गई मल जांच के दौरान कुछ हिरणों में परजीवी यानी पेट के कीड़े पाए गए थे. डी-वॉर्मिंग दवाओं से अपेक्षित असर नहीं मिलने के बाद चिड़ियाघर प्रशासन ने अलग दवा का घोल तैयार कर उपचार कराया था. इसके बाद कुछ हिरणों की स्थिति में सुधार भी देखा गया था.

बाड़े में दवाओं और चूने का छिड़काव शुरू

चिड़ियाघर में लगातार मौतों के बाद संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए बाड़े में चूना और दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है. आईवीआरआई विशेषज्ञों ने चिड़ियाघर के पशु चिकित्सकों को उपचार और दवाओं के संबंध में जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए हैं. चिड़ियाघर निदेशक डॉ. कन्हैया पटेल के मुताबिक, विशेषज्ञों की शुरुआती जांच में हीमोप्रोटोजोआ संक्रमण की बात सामने आई है. हिरणों के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं. रिपोर्ट आने के बाद मौतों की वास्तविक वजह और आगे के उपचार को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी. -पवन तोमर की रिपोर्ट

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