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जंगलों के 10 किमी दायरे में आरा मिलों पर रोक:हाईकोर्ट बोला-पर्यावरण और वन संरक्षण से समझौता नहीं; ‘यहां दिल्ली जैसा प्रदूषण नहीं चाहिए’, 19 याचिकाएं खारिज
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पर्यावरण और वन संरक्षण के लिहाज से अहम फैसला सुनाते हुए अधिसूचित जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों से 10 किलोमीटर के दायरे में आरा मिलों पर लगी रोक को बरकरार रखा है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने इस मामले में दायर 19 याचिकाएं खारिज कर दीं और राज्य सरकार की 25 सितंबर 2025 की अधिसूचना को वैध ठहराया। कोर्ट ने साफ कहा कि राज्य में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना जरूरी है और “यहां दिल्ली जैसा प्रदूषण नहीं चाहिए।” दरअसल, राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम, 1984 की धारा 5(1) के तहत 25 सितंबर 2025 को अधिसूचना जारी कर अधिसूचित जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों से हवाई दूरी के 10 किलोमीटर के दायरे को तीन साल के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया था। इसके बाद वन विभाग ने इस दायरे में संचालित आरा मिलों को बंद करने और उनके लाइसेंस के नवीनीकरण पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे। इस फैसले को शाही ट्रेडर्स, अग्रवाल सॉ मिल, पटेल सॉ मिल समेत कई मिल संचालकों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनकी आरा मिलें 12 दिसंबर 1996 से पहले से वैध लाइसेंस के साथ संचालित हो रही हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के टी.एन. गोदावर्मन थिरुमुल्पद मामले के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि पुरानी और वैध मिलों को इस तरह बंद करना उचित नहीं है। कोर्ट ने 10 किमी बफर जोन को माना तार्किक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार के 10 किलोमीटर बफर जोन के फैसले को पूरी तरह तार्किक और उचित माना। कोर्ट ने कहा कि वन क्षेत्रों के चारों ओर एक निश्चित सुरक्षा दायरा तय करना पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि औद्योगिक क्षेत्रों और नगर पालिका/नगर निगम सीमाओं को पहले ही इस प्रतिबंध से छूट दी गई है, जिससे यह स्पष्ट है कि सरकार ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। पर्यावरण बनाम कारोबार, कोर्ट ने किसे दी प्राथमिकता हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि वन संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और प्रदूषण नियंत्रण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि जंगलों के आसपास लकड़ी आधारित गतिविधियों को नियंत्रित करना जरूरी है, ताकि अवैध कटाई, पर्यावरणीय दबाव और प्रदूषण जैसी समस्याओं पर रोक लग सके। इसी आधार पर कोर्ट ने सभी 19 याचिकाएं खारिज कर राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराया। इस फैसले के बाद अधिसूचित जंगलों या संरक्षित क्षेत्रों से 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाली आरा मिलों के संचालन और लाइसेंस नवीनीकरण पर रोक बरकरार रहेगी। इसे राज्य में वन संरक्षण और पर्यावरणीय सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा न्यायिक समर्थन माना जा रहा है।