Tuesday, 13 October 2026
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ईएसआई 18 करोड़ मासिक ले रहा... दवाइयां हैं नहीं

INT News13 October 2026 at 05:51 am

| जालंधर हर महीने करीब 3.50 लाख कार्ड धारकों की जेब से 18.65 करोड़ रुपए का अंशदान वसूलने वाला ईएसआई विभाग मरीजों को बुनियादी सहूलियतें तक देने में नाकाम साबित हो रहा है। जालंधर रीजन के ईएसआई अस्पतालों और डिस्पेंसरियों में रोजाना पहुंचने वाले करीब 2,000 मरीजों को सरकारी लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। जालंधर, कपूरथला और होशियारपुर जिलों के इन स्वास्थ्य केंद्रों में पिछले एक महीने से जीवन रक्षक शुगर और ब्लड प्रेशर (बीपी) की दवाइयां पूरी तरह गायब हैं। ओपीडी में आने वाले कुल मरीजों में से करीब 40% (800 मरीज) बीपी और शुगर की दवा लेने पहुंचते हैं, लेकिन अस्पताल में स्टॉक न होने के कारण वे खाली हाथ लौटने या बाहर से महंगी दवाइयां खरीदने को मजबूर हैं। डॉक्टरों का अकाल, सिविल भेजे जा रहे मरीज : अस्पताल में सिर्फ दवाइयों का ही संकट नहीं है, बल्कि डॉक्टरों की भारी कमी है। मेडिसिन विभाग के डॉक्टर हफ्ते में सिर्फ तीन दिन (सोमवार से बुधवार) बैठते हैं, जिसके चलते गंभीर मरीजों को सिविल अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। अल्ट्रासाउंड के लिए रेडियोलॉजिस्ट हफ्ते में केवल एक दिन आता है। वहीं, गायनी और मनोचिकित्सक भी हफ्ते में सिर्फ तीन दिन ही सेवाएं देते हैं। ईएनटी, पीडियाट्रिक्स और जनरल सर्जन के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। ^ मरीजों के लिए शुगर और बीपी की आवश्यक दवाओं की डिमांड तैयार करके चंडीगढ़ स्थित मुख्यालय को भेजी जा चुकी है। मंजूरी मिलते ही दवाओं का नया स्टॉक रवाना होगा। मुख्य कार्यालय से लगातार संपर्क साधा जा रहा है और उम्मीद है कि एक हफ्ते के भीतर अस्पताल में दवाइयों की नई सप्लाई प्राप्त हो जाएगी। सप्लाई आते ही काउंटर से सभी मरीजों को नियमित रूप से दवाइयों का वितरण शुरू कर दिया जाएगा ताकि उन्हें बाहर से दवा न खरीदनी पड़े।" - डॉ. ज्योति शर्मा, एमएस, ईएसआई अस्पताल ^ हर महीने वेतन से नियमित रूप से ईएसआई का पैसा कटता है। लेकिन पिछले 2 महीने से जब भी मैं शुगर और बीपी की अपनी जरूरी दवा लेने अस्पताल के डिस्पेंसरी काउंटर पर आता हूं, तो कर्मचारी दवा उपलब्ध न होने का बहाना बनाकर टाल देते हैं। काउंटर से हर बार बोलते हैं- पीछे से स्टॉक नहीं आया। इस वजह से मुझे बहुत परेशानी हो रही है और मजबूरी में हर महीने अपनी जेब से पैसे खर्च करके बाहर के मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। - अमित कुमार, पीड़ित मरीज कुल कार्ड धारक : 3.50 लाख कर्मचारी मासिक वसूली : 18.65 करोड़ रुपए (औसतन) वार्षिक योगदान : 223 करोड़ से ज्यादा रुपए इमरजेंसी की स्थिति डॉक्टर्स की कमी, आईसीयू तक की सुविधा नहीं