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अब AI बताएगा, झारखंड की जमीन के नीचे कहां छिपा है खनिज भंडार

रांचीः झारखंड में खनिजों की खोज का तरीका बदलने की तैयारी है. अब जमीन के नीचे छिपे खनिज भंडार की संभावित मौजूदगी का पता लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद ली जाएगी. इसके लिए राज्य में पहले से मौजूद भू-वैज्ञानिक आंकड़ों, पुराने खनिज अन्वेषण रिकॉर्ड, सैटेलाइट तस्वीरों और अलग-अलग क्षेत्रों की भौगोलिक जानकारी का एक साथ विश्लेषण किया जाएगा.
एआई ( आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ) इन आंकड़ों में मौजूद पैटर्न को समझकर उन इलाकों की पहचान करने में मदद करेगा, जहां खनिज मिलने की संभावना अधिक है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दावोस दौरे के दौरान भी खनिजों की खोज में एआई के इस्तेमाल की बात कही गई थी. मुख्यमंत्री ने राज्य में इसे लागू करने का निर्देश दिया था. इसके बाद खान एवं भूतत्व विभाग ने खनिज खोज में एआई के इस्तेमाल का फैसला किया है.
8 सितंबर को होगा सेमिनार
इस तकनीक को समझने और अधिकारियों को इसकी जानकारी देने के लिए 8 सितंबर को विभाग की ओर से सेमिनार आयोजित किया जाएगा. इसमें एआई के विशेषज्ञ ( एक्सपर्ट ) शामिल होंगे. वे विभाग के अधिकारियों को प्रशिक्षित करेंगे कि एआई के जरिए कैसे सटीक पता लगेगा कि कहां पर कौन सी खनिज है और कितनी मात्रा में है.
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क्षेत्र को चिह्नित करना होता है आसान
इस तकनीक के इस्तेमाल से खनिजों की खोज के शुरुआती चरण में बड़े क्षेत्र की छंटाई करना आसान होगा. फिलहाल किसी क्षेत्र में खनिज की संभावना का आकलन करने के लिए भू-वैज्ञानिक सर्वे, मैपिंग, सैंपलिंग और ड्रिलिंग जैसी प्रक्रियाओं में काफी समय लगता है. एआई आधारित विश्लेषण से पहले ही संभावित क्षेत्रों को चिह्नित किया जा सकेगा. इसके बाद संबंधित क्षेत्र में विस्तृत भू-वैज्ञानिक जांच और ड्रिलिंग की जा सकती है.
ऐसे काम करेगा एआई
सैटेलाइट डाटा जुड़ेगा- रिमोट सेंसिंग और सैटेलाइट इमेज से संबंधित क्षेत्र की जानकारी ली जाएगी.
संभावित क्षेत्र चिह्नित होंगे- अधिक संभावना वाले इलाकों को प्राथमिकता पर अलग किया जाएगा.
डाटा जुटाया जाएगा- पुराने भू-वैज्ञानिक सर्वे, ड्रिलिंग, सैंपल और खनिज मानचित्रों का डाटा लिया जाएगा.
एआई करेगा विश्लेषण- अलग-अलग स्रोतों के डाटा में पैटर्न तलाश कर खनिज की संभावना वाले क्षेत्रों की पहचान होगी.
जमीन पर होगी जांच- वैज्ञानिक सर्वे, सैंपलिंग और ड्रिलिंग से खनिज की वास्तविक मौजूदगी की पुष्टि की जाएगी.
पुराने आंकड़ों से मिलेगी नई जानकारी
झारखंड में कई दशकों से खनिजों से जुड़े भू-वैज्ञानिक आंकड़े जुटाए जाते रहे हैं. अलग-अलग क्षेत्रों की चट्टानों, मिट्टी, खनिज संरचना और पहले किए गए अन्वेषण की रिपोर्ट में बड़ी मात्रा में जानकारी मौजूद है. इन आंकड़ों को डिजिटल रूप में लाकर एआई के माध्यम से उनका विश्लेषण किया जा सकता है. इससे ऐसे इलाकों की पहचान भी संभव होगी, जहां पहले खनिज अन्वेषण नहीं हुआ है या बहुत कम हुआ है.
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इन खनिजों की खोज में हो सकता है फायदा
झारखंड कोयला, लौह अयस्क, तांबा, बॉक्साइट और यूरेनियम समेत कई खनिजों के लिए जाना जाता है. भविष्य में लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की खोज में भी एआई आधारित तकनीक उपयोगी हो सकती है. नई तकनीकों और उद्योगों के विस्तार के साथ ऐसे खनिजों की मांग बढ़ रही है.
सैटेलाइट तस्वीरों से जमीन पर नजर
खनिज खोज में सैटेलाइट तस्वीरों और रिमोट सेंसिंग डाटा की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी. इनके जरिए जमीन की सतह, चट्टानों और भू-संरचना में होने वाले बदलावों का अध्ययन किया जा सकता है. एआई इन तस्वीरों से मिले संकेतों को पुराने भू-वैज्ञानिक आंकड़ों से जोड़कर संभावित खनिज क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करेगा. हालांकि, एआई केवल संभावित क्षेत्र की पहचान करने का माध्यम होगा. इसके बाद वैज्ञानिक तरीके से फील्ड सर्वे, सैंपलिंग और ड्रिलिंग कर खनिज की मौजूदगी की पुष्टि की जाएगी. इससे ऐसे क्षेत्रों में अनावश्यक सर्वे और ड्रिलिंग पर होने वाला खर्च कम किया जा सकता है, जहां खनिज मिलने की संभावना कम है.