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दाऊद के ठिकाने पर UN से इतनी बड़ी गलती कैसे? एक्सपर्ट बोले- यह चूक नहीं, सोची-समझी साजिश

INT News23 October 2026 at 09:53 am

Dawood Ibrahim D-Company: संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के गिरोह डी-कंपनी को 'भारत स्थित' बताए जाने पर भारत ने कड़ी नाराजगी जताई है. भारत ने रिपोर्ट में दी गई जानकारी को तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना उस पर निशाना साधते हुए कहा कि दाऊद उसी देश में पनाह लिए हुए है, जहां कभी अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन छिपा था और अमेरिकी कार्रवाई में मारा गया था. भारत ने स्पष्ट किया कि दाऊद 1993 के मुंबई बम धमाकों के बाद से ही देश में वांछित है और लंबे समय से भारत से बाहर रह रहा है.

UN की रिपोर्ट में ऐसी क्या बात लिखी थी, जिस पर भड़क गया भारत?

संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारतीय मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने विशेष प्रतिवेदक बेन सॉल की रिपोर्ट पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई. इस रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम के आपराधिक गिरोह डी-कंपनी को 'भारत स्थित' बताया गया था.

भारतीय प्रतिनिधि ने इसे गंभीर तथ्यात्मक गलती करार दिया. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर किसी संगठन या व्यक्ति के बारे में जानकारी देते समय तथ्यों की सही जांच जरूरी है. बिना ठोस आधार के इस तरह का उल्लेख करना न केवल गलत है, बल्कि इससे संस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते हैं.

जिस देश में ओसामा बिन लादेन मारा गया, वहीं छिपा है दाऊद

भारत ने दाऊद इब्राहिम के ठिकाने को लेकर भी संयुक्त राष्ट्र को उसके आधिकारिक रिकॉर्ड की याद दिलाई. भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि दाऊद को साल 2003 में संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंधित किया था, लेकिन वह उससे काफी पहले भारत छोड़ चुका था. भारत ने कहा- देश से फरार होने के बाद दाऊद के संबंध अल-कायदा और उसके सरगना ओसामा बिन लादेन से जुड़े. भारतीय पक्ष ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अपने दस्तावेजों में उसके ठिकाने से संबंधित जानकारी मौजूद है.

1993 के मुंबई धमाकों के बाद से भारत को दाऊद की तलाश

भारतीय राजनयिक रघु पुरी ने याद दिलाया कि दाऊद इब्राहिम 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में भारत में वांटेड है. उसका नाम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध व्यवस्था में भी दर्ज है.

भारत ने सवाल उठाया कि जब संयुक्त राष्ट्र के पास दाऊद से संबंधित आधिकारिक जानकारी पहले से मौजूद है, तो विशेष प्रतिवेदक की रिपोर्ट में डी-कंपनी को भारत स्थित क्यों बताया गया? भारतीय पक्ष ने इस जानकारी को वास्तविक स्थिति के विपरीत और बेहद अफसोसजनक बताया.

अधिकारियों की गलत रिपोर्ट से UN की साख को नुकसान

भारत ने विशेष प्रतिवेदकों की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया. भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे अधिकारियों से तथ्यों की सही और निष्पक्ष जानकारी देने की उम्मीद की जाती है.

ऐसे में बिना पर्याप्त जांच के गलत रिपोर्ट प्रस्तुत करना स्वीकार नहीं किया जा सकता. भारत ने चेताया कि इस तरह की लापरवाही और पक्षपात से संयुक्त राष्ट्र की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुंचता है.

भारतीय प्रतिनिधि ने यह भी स्पष्ट किया कि मानवाधिकार व्यवस्था का इस्तेमाल आतंकवादियों को संरक्षण देने या उनके ठिकानों के बारे में गलत तस्वीर पेश करने के लिए नहीं होना चाहिए.

एक्सपर्ट व्यू: 'यह सामान्य गलती नहीं, आतंकवाद पर पश्चिमी देशों का दोहरा रवैया'

धनंजय त्रिपाठी, विदेश मामलों के विशेषज्ञ

सवाल- दाऊद जैसे वैश्विक आतंकी के ठिकाने को लेकर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में इतनी बड़ी गलती कैसे हो सकती है?

विदेश मामलों के विशेषज्ञ धनंजय त्रिपाठी के मुताबिक, इसे महज अनजाने में हुई गलती नहीं माना जा सकता. उनका कहना है कि इस रिपोर्ट में एक तरह का पूर्वाग्रह दिखाई देता है.

त्रिपाठी ने कहा कि दाऊद इब्राहिम तीन दशक से ज्यादा समय पहले भारत से फरार हो चुका है. उसके तार 1993 के मुंबई बम धमाकों से लेकर 26/11 के आतंकी हमलों तक जुड़े रहे हैं. उसका नेटवर्क पाकिस्तान समेत दुनिया के कई हिस्सों में फैला हुआ है.

उनके अनुसार, इन तथ्यों के बावजूद डी-कंपनी को भारत स्थित बताना आतंकवाद के मामले में पश्चिमी देशों के दोहरे रवैये को उजागर करता है.

सवाल- ऐसी रिपोर्ट से आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई पर क्या असर पड़ेगा?

धनंजय त्रिपाठी का मानना है कि इस तरह की तथ्यात्मक गलतियां आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को कमजोर कर सकती हैं.

उन्होंने कहा कि अगर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के इस तर्क को सही माना जाए, तो पाकिस्तान में वर्षों तक छिपे रहे ओसामा बिन लादेन को भी वैश्विक आतंकी के बजाय केवल 'पाकिस्तानी आतंकी' कहना पड़ेगा.

आतंकवादियों की पहचान और उनके नेटवर्क के बारे में गलत जानकारी देना गंभीर मामला है. ऐसी रिपोर्टों से हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े आतंकी संगठनों को अप्रत्यक्ष फायदा पहुंच सकता है- धनंजय त्रिपाठी

त्रिपाठी ने कहा- आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई के लिए जरूरी है कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टें सटीक तथ्यों पर आधारित हों और किसी देश या संगठन को लेकर गलत धारणा पैदा न करें.

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