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बीजेपी का आरोप- ओवैसी को भारतीय नहीं, बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों की चिंता

Asaduddin Owaisi : हैदराबाद के सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा तेलंगाना सरकार को लिखे गए पत्र पर आपत्ति जताते हुए भाजपा प्रवक्ता प्रकाश रेड्डी ने निशाना साधा है. मंगलवार को एएनआई से बात करते हुए प्रकाश रेड्डी ने असदुद्दीन ओवैसी पर आरोप लगाया कि वे बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों का पक्ष ले रहे हैं.
असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार को क्यों लिखा है पत्र?
तेलंगाना में हो रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार को पत्र लिखा है. अपने पत्र में उन्होंने मांग की है कि सरकार को आम जनता की सुविधा के लिए स्थायी निवास प्रमाण पत्र (पीआरसी) बनानी चाहिए, ताकि वो आने वाले दिनों में किसी भी तरह के कागजी प्रक्रिया में ना उलझे. इसको लेकर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो भी शेयर किया. वीडियो में वे कह रहे हैं कि राज्य सरकार को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले ही, उन समस्याओं का समाधान कर लेना चाहिए जो भविष्य में हो सकती हैं.
अवैध विदेशियों को नागरिकता देने की मांग कर रहे ओवैसी : भाजपा
असदुद्दीन ओवैसी की इस मांग को लेकर मंगलवार भाजपा के प्रकाश रेड्डी ने उन पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों का पक्ष लेने का आरोप लगाया . रेड्डी ने एएनआई से बात करते हुए कहा कि उनकी मांग उन विदेशियों को नागरिकता देने की है जो देश में अवैध रूप से रह रहे हैं. रेड्डी ने यह भी दावा किया कि फिलहाल लाखों विदेशी, खासकर बांग्लादेशी और रोहिंग्या, हैदराबाद में रह रहे हैं, जो शरणार्थी नहीं हैं. रेड्डी ने कहा कि भारत सरकार के रिकॉर्ड के अनुसार हैदराबाद में कोई शरणार्थी नहीं हैं.
असंवैधानिक है असदुद्दीन ओवैसी की मांग : रेड्डी
बातचीत के दौरान प्रकाश रेड्डी ने केंद्र सरकार की अवैध अप्रवासियों के खिलाफ, ‘पता लगाओ, हटाओ और निर्वासित करो ’ पहल का भी जिक्र किया. इस पहल को लेकर रेड्डी ने दावा किया कि हैदराबाद में अवैध शरणार्थी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करने वाले सभी व्यक्ति अवैध नागरिक हैं. जिन्हें ढूंढकर देश से निकाला जाना चाहिए. उन्होंने ओवैसी की मांग को असंवैधानिक और राष्ट्रीय हित के खिलाफ बताया और आरोप लगाया कि असदुद्दीन ओवैसी राजनीतिक लाभ के लिए ऐसा कर रहे हैं. रेड्डी ने कहा कि ओवैसी को हैदराबाद में 400-500 वर्षों से रह रहे नागरिकों की नहीं बल्कि बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों में रुचि है. ऐसी मांगें वो अपने राजनीतिक हित और चुनावी फायदे के लिए कर रहे हैं.
(इनपुट : गौतम कुमार)
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