समाचार · मध्य प्रदेश
आमला आत्महत्या केस में आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज:एडीजे कोर्ट ने मायके पक्ष के आरोपों को गंभीर बताया, ससुराल पक्ष को नहीं मिली राहत
बैतूल के आमला की रंजिता यादव (37) आत्महत्या मामले में आरोपियों को बड़ा झटका लगा है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) संतोष चौहान की अदालत ने मंगलवार को मृतका के ससुर, सास और देवरानी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया। रंजिता यादव 13 जुलाई को अपने घर के बाथरूम में फंदे पर लटकी मिली थीं। परिजनों ने दरवाजा तोड़कर उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद मायके पक्ष ने सास, ससुर और देवरानी पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। पुलिस जांच के बाद आमला थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 और 3(5) के तहत आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण का मामला दर्ज किया गया। एफआईआर के बाद से आरोपी फरार थाना प्रभारी मुकेश ठाकुर ने बताया कि अपराध क्रमांक 287/2026 में एफआईआर दर्ज होने के बाद से आरोपी फरार हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है। बचाव पक्ष ने मानसिक बीमारी का दिया हवाला अग्रिम जमानत याचिका मृतका के ससुर सुरेंद्र यादव (73), सास पुष्पा यादव (62) और देवरानी मुस्कान यादव ने दायर की थी। बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि रंजिता लंबे समय से डिप्रेशन, एंग्जायटी और ओवरथिंकिंग जैसी मानसिक समस्याओं से जूझ रही थीं। उनका इंदौर और नागपुर में मनोचिकित्सकों से इलाज भी चल रहा था। बचाव पक्ष का कहना था कि ससुराल पक्ष ने कभी प्रताड़ित नहीं किया और आत्महत्या का कारण उनकी मानसिक स्थिति थी। अभियोजन ने किया विरोध अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत से कहा कि मामला गंभीर है और आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार हैं। अभियोजन ने यह भी बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद से आरोपी गिरफ्तारी से बच रहे हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अग्रिम जमानत आवेदन खारिज कर दिया।