Wednesday, 7 October 2026
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एमपी में सारा एप में गड़बड़ी, किसान की जमीन ‘खिसकी’:दूसरे के खेत की फसल दर्ज; पटवारियों ने जियो फेंसिंग मांगी, आयुक्त को ज्ञापन

INT News7 October 2026 at 07:46 am

प्रदेश में राजस्व विभाग के सारा एप में तकनीकी गड़बड़ी के कारण किसानों की जमीन और बोई गई फसल की लोकेशन खिसकने की शिकायत सामने आई है। इसका असर गिरदावरी पर पड़ रहा है। पटवारी और राजस्व सर्वेयर जब खेत की फसल का सत्यापन करने पहुंचते हैं तो एप में संबंधित खसरे की लोकेशन वास्तविक जगह से 10 से 20 मीटर तक अलग दिखाई देती है। इससे एक किसान की फसल दूसरे किसान के रिकॉर्ड में दर्ज होने की स्थिति बन रही है। इस समस्या के चलते किसानों की नाराजगी का सामना कर रहे पटवारियों ने सरकार से गिरदावरी में जियो टैगिंग के बजाय जियो फेंसिंग यानी ग्राम सीमा को आधार बनाने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, राजस्व विभाग ने फिलहाल इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। खेत में खड़े होने पर भी एप नहीं करता लोकेशन स्वीकार प्रांतीय पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्विन सैनी ने बताया कि सारा एप में गांव के खसरा नंबर के प्रत्येक पार्सल के आधार पर गिरदावरी करनी होती है। समस्या यह है कि खेत में खड़े होने के बावजूद कई बार एप जियो टैग गिरदावरी की अनुमति नहीं देता। सैनी के मुताबिक सारा एप में तैयार ऑनलाइन नक्शे और वास्तविक खेत की स्थिति में 10 से 20 मीटर तक का अंतर दिखाई देता है। पटवारी जिस खसरा नंबर में खड़ा होता है, एप में वही जमीन 15 से 20 मीटर दूर दिखाई दे सकती है। ऐसे में किसान की जमीन वास्तविकता में अपनी जगह पर होती है, लेकिन एप की मैपिंग में आगे-पीछे खिसकती नजर आती है। ऐसे समझें गड़बड़ी: सोयाबीन बोई, रिकॉर्ड में मक्का दर्ज पटवारी संघ के अनुसार, इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए एक किसान के खेत में सोयाबीन बोई गई है और उससे लगे खेत में दूसरे किसान ने मक्का बोया है। यदि एप की मैपिंग में खसरे की लोकेशन खिसकती है तो गिरदावरी करते समय पहले किसान के खेत में मक्का दर्ज हो सकती है। इसका असर फसल के रिकॉर्ड और उसके वैल्यूएशन पर पड़ सकता है। संघ का कहना है कि जमीन मौके पर अपनी जगह रहती है, लेकिन एप में पार्सल की स्थिति बदलने से फसल का रिकॉर्ड प्रभावित हो रहा है। ग्राम सीमा में गिरदावरी का अधिकार देने की मांग अश्विन सैनी ने बताया कि प्रांतीय पटवारी संघ ने प्रमुख सचिव राजस्व को पत्र लिखकर ग्राम सीमा के भीतर गिरदावरी करने का अधिकार देने की मांग की है। साथ ही 500 मीटर की परिधि में गिरदावरी के लिए एक्सेस देने का प्रस्ताव भी रखा गया है। सैनी के अनुसार, इस संबंध में अधिकारियों को ज्ञापन देने के बाद एमपी का काम देखने वाले बृजेश नामदेव से भी चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि काम भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है और इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र लिखा जाएगा। पटवारी संघ का कहना है कि प्रदेश में खरीफ, रबी और जायद तीनों सीजन में गिरदावरी होती है। संघ ने खरीफ में भी जियो फेंसिंग को आधार बनाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन फिलहाल इसमें बदलाव की संभावना नजर नहीं आ रही है। मेड़ से फसल दिख सकती है तो खेत में जाने की बाध्यता क्यों? धार पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष संजय जाट ने गिरदावरी के दौरान खेत के भीतर जाकर जियो टैग करने की बाध्यता पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि मेड़ पर खड़े होकर भी फसल का भौतिक सत्यापन किया जा सकता है, तो सर्वेयर को खेत के भीतर जाने के लिए बाध्य करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खेतों में करंट, जलीय जीव और वन्य जीवों का खतरा रहता है। सर्पदंश की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं और उनके अनुसार दो सर्वेयरों की सर्पदंश से मौत हो चुकी है। ऐसे में दूर से फसल का भौतिक सत्यापन संभव है तो जान जोखिम में डालकर खेत के भीतर जाकर जियो टैग कराने की व्यवस्था पर पुनर्विचार होना चाहिए। पटवारी संघ का कहना है कि तकनीकी रूप से सटीक गिरदावरी के साथ सर्वेयरों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होनी चाहिए।