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UP School: बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र नहीं है तो कैसे होगा स्कूल में एडमिशन? हाईकोर्ट सख्त, इन 4 दस्तावेजों पर बन रहे नियम

UP School News: बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र नहीं है तो क्या स्कूल में एडमिशन के समय परेशानी होगी? क्या आंगनबाड़ी का रिकॉर्ड या माता-पिता का शपथ पत्र जन्मतिथि के प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा? उत्तर प्रदेश में बच्चों की उम्र दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर बड़ा बदलाव हो सकता है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूलों में जन्मतिथि के रिकॉर्ड में गड़बड़ियों पर गंभीर चिंता जताते हुए बेसिक शिक्षा विभाग को स्पष्ट दिशा-निर्देश जल्द जारी करने को कहा है. विभाग ने ऐसी गाइडलाइन का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसमें जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं होने पर चार वैकल्पिक दस्तावेजों में से किसी एक के आधार पर उम्र दर्ज करने की व्यवस्था शामिल है. हालांकि, नई गाइडलाइन अभी अंतिम रूप में जारी नहीं हुई है. जानिए किन दस्तावेजों को मान्य करने की तैयारी है और हाईकोर्ट को इस मामले में हस्तक्षेप क्यों करना पड़ा.
जन्म प्रमाण पत्र नहीं है तो काम आ सकते हैं ये 4 दस्तावेज
उत्तर प्रदेश में स्कूलों में बच्चों की जन्मतिथि दर्ज करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने की तैयारी चल रही है. प्रस्तावित गाइडलाइन के अनुसार, जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं होने पर निर्धारित वैकल्पिक दस्तावेजों में से किसी एक के आधार पर बच्चे की उम्र दर्ज की जा सकेगी.
इनमें चार तरह के रिकॉर्ड शामिल हैं.
अस्पताल या एएनएम का रिकॉर्ड: अस्पताल के अभिलेख या सहायक नर्स एवं मिडवाइफ (ANM) के रजिस्टर में दर्ज विवरण.
आंगनबाड़ी केंद्र का रिकॉर्ड: बच्चे से संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र के अभिलेख.
ग्राम जन्म-मृत्यु पंजी: गांव में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से संबंधित रिकॉर्ड.
माता-पिता का शपथ पत्र: अभिभावक की ओर से शपथ पत्र के माध्यम से बच्चे की उम्र की घोषणा.
यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार नियमावली, 2011 के नियम-9 के संदर्भ में प्रस्तावित की गई है. अंतिम गाइडलाइन जारी होने के बाद ही इसकी लागू होने वाली शर्तें स्पष्ट होंगी.
स्कूल के रजिस्टर में सिर्फ जन्मतिथि लिखना पर्याप्त नहीं होगा?
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, स्कूल में प्रवेश के समय बच्चे की जन्मतिथि के साथ उस दस्तावेज का विवरण भी दर्ज किया जाएगा, जिसके आधार पर उसकी उम्र तय की गई है. इसका मतलब है कि स्कूल के रिकॉर्ड में यह स्पष्ट रहेगा कि जन्मतिथि अस्पताल के दस्तावेज, आंगनबाड़ी रिकॉर्ड, ग्राम पंजी या अभिभावक के शपथ पत्र में से किसके आधार पर दर्ज की गई थी. संबंधित प्रविष्टि के सामने कक्षा अध्यापक के हस्ताक्षर भी होंगे. प्रस्तावित व्यवस्था केवल कक्षा एक तक सीमित नहीं है. इसे अन्य कक्षाओं में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए भी लागू करने की तैयारी है.
आखिर स्कूलों की जन्मतिथि पर हाईकोर्ट को क्यों होना पड़ा सख्त?
इस मामले की शुरुआत एक जमानत याचिका की सुनवाई से जुड़ी है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ के सामने एक पॉक्सो मामले में पीड़िता की उम्र को लेकर अलग-अलग दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे. अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि स्कूलों में जन्मतिथि दर्ज करने की प्रक्रिया में विसंगतियां होने से आपराधिक मामलों में उम्र को लेकर विवाद खड़े हो सकते हैं. पॉक्सो कानून में पीड़ित की उम्र बेहद महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में स्कूल के अभिलेखों की विश्वसनीयता न्यायिक प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकती है. हाईकोर्ट ने इसी वजह से स्कूलों में बच्चों की उम्र दर्ज करने के लिए स्पष्ट और एकरूप व्यवस्था बनाने पर जोर दिया है.
मैनपुरी के एक मामले से सामने आया जन्मतिथि का विवाद
हाईकोर्ट में बंटी उर्फ बंशी की जमानत अर्जी पर सुनवाई चल रही थी. मामला मैनपुरी जिले के डन्नाहर थाना क्षेत्र से जुड़ा था. आरोप था कि बंटी शिकायतकर्ता की नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था. प्राथमिकी में लड़की की उम्र 16 वर्ष बताई गई थी. वहीं, कक्षा पांच के प्रमाण पत्र के आधार पर उसकी उम्र 14 वर्ष से कम होने का मुद्दा अदालत के सामने आया. सुनवाई के दौरान पीड़िता के बयान का भी उल्लेख हुआ. उसने बताया था कि वह पूर्व माध्यमिक विद्यालय जरामई, मैनपुरी से कक्षा आठ पास कर चुकी है और उसकी उम्र 14 वर्ष है. पीड़िता ने अपने बयान में आरोपी के साथ प्रेम संबंध होने और अपनी मर्जी से जाने की बात कही थी. हालांकि, पॉक्सो कानून के तहत नाबालिग की सहमति कानूनी रूप से मान्य सहमति नहीं मानी जाती.
कक्षा पांच और आठ के दस्तावेजों को लेकर उठे सवाल
मामले में यह भी सामने आया कि पीड़िता के पिता ने उसकी उम्र 16 वर्ष बताई थी, जबकि पुलिस के सामने कक्षा पांच का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया था. कक्षा आठ की अंकतालिका को लेकर भी सवाल उठे. अदालत के सामने यह तथ्य रखा गया कि पीड़िता के माता-पिता ने उसका मेडिकल परीक्षण कराने से इनकार कर दिया था. इन परिस्थितियों में उम्र से संबंधित दस्तावेजों की विश्वसनीयता का सवाल महत्वपूर्ण बन गया. अदालत ने स्कूलों में जन्मतिथि दर्ज करने की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट बनाने की आवश्यकता जताई.
बंटी उर्फ बंशी को हाईकोर्ट से मिली सशर्त जमानत
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह भी रखा गया कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है. मामले में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है और वह 20 अगस्त 2026 से जेल में बंद था. उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने बंटी उर्फ बंशी की सशर्त जमानत मंजूर कर ली. हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है. मामले में आरोपों का अंतिम निर्धारण संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा.
हाईकोर्ट के सामने पेश हुए बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव
स्कूलों में जन्मतिथि दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट इससे पहले शिवम यादव से संबंधित मामले में भी दिशा-निर्देश तैयार करने को कह चुका था. बंटी उर्फ बंशी मामले में उम्र का विवाद सामने आने के बाद अदालत ने 15 अक्टूबर 2026 के आदेश के तहत बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होने का निर्देश दिया. अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने अदालत को बताया कि 17 सितंबर और 21 अक्टूबर 2026 को हुई विभागीय बैठकों में प्रस्तावित गाइडलाइन तैयार की गई है. उन्होंने बताया कि अंतिम दिशा-निर्देश जारी करने से पहले विधि विभाग समेत संबंधित विभागों से परामर्श किया जा रहा है. हाईकोर्ट ने इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और संबंधित विभागों को सहयोग करने का निर्देश दिया.
स्कूल से उम्र का प्रमाण पत्र लेना होगा तो क्या होगा?
प्रस्तावित गाइडलाइन में प्रधानाध्यापक और प्रधानाध्यापिका की जिम्मेदारी भी तय करने की तैयारी है. सक्षम प्राधिकारी की मांग पर स्कूल के रिकॉर्ड के आधार पर निर्धारित प्रारूप में उम्र संबंधी प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा. इसमें विद्यार्थी का नाम, माता-पिता का नाम, स्कूल के अभिलेखों में दर्ज जन्मतिथि और संबंधित तारीख पर उसकी उम्र स्पष्ट रूप से लिखी जाएगी. उम्र का विवरण वर्ष, माह और दिन के आधार पर दर्ज करने का प्रस्ताव है. इससे किसी मामले में छात्र की उम्र को लेकर जानकारी मांगे जाने पर स्कूल के रिकॉर्ड का आधार स्पष्ट हो सकेगा.
यूपी के स्कूलों में नए नियम कब से लागू होंगे?
फिलहाल बेसिक शिक्षा विभाग प्रस्तावित गाइडलाइन को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है. संबंधित विभागों से परामर्श पूरा होने और अंतिम दिशा-निर्देश जारी होने के बाद नई व्यवस्था की स्थिति स्पष्ट होगी. अभी यह कहना सही नहीं होगा कि उत्तर प्रदेश के सभी स्कूलों में जन्मतिथि दर्ज करने के नए नियम लागू हो चुके हैं.
Note: अभिभावकों के लिए जरूरी बात यह है कि बच्चे के स्कूल में प्रवेश के समय दिए गए उम्र संबंधी दस्तावेज और स्कूल के रिकॉर्ड में दर्ज जन्मतिथि की जानकारी सही होनी चाहिए. इससे भविष्य में प्रमाण पत्र बनवाने या उम्र के सत्यापन के दौरान अनावश्यक विवाद से बचने में मदद मिल सकती है.
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