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देश की राजधानी में AQI 225, स्मॉग से बिगड़ी हवा; दिल्ली-NCR में GRAP-1 लागू, जानें क्या हैं नियम

दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ हवा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है. शुक्रवार, 23 अक्टूबर की सुबह दिल्ली में धुंध और स्मॉग देखने को मिला. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सुबह 9 बजे दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 225 दर्ज किया गया. यह ‘खराब’ श्रेणी में आता है. न्यूनतम तापमान भी सामान्य से अधिक रहा.
दिल्ली में लागू है GRAP-1
इससे पहले वायु गुणवत्ता में गिरावट को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 21 अक्टूबर 2026 को दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू किया था. आयोग के मुताबिक, दिल्ली का AQI 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे 244 और शाम 4 बजे 245 तक पहुंच गया था. इससे एक दिन पहले, 20 अक्टूबर को शाम 4 बजे यह 179 था, जो मध्यम श्रेणी में आता है. CAQM ने मौसम और वायु गुणवत्ता के पूर्वानुमान को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण के उपाय तेज करने के निर्देश दिए.
पिछले दिनों दिल्ली-NCR में AQI का हाल
22 अक्टूबर को सुबह 7 बजे दिल्ली का AQI 226 दर्ज किया गया था. कुछ इलाकों में स्थिति इससे भी खराब थी. चांदनी चौक में AQI 307, जहांगीरपुरी में 309 और विवेक विहार में 306 रहा. ये आंकड़े ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आते हैं.
PTI की 22 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के शाम 4 बजे के बुलेटिन में दिल्ली का AQI 223 दर्ज किया गया. हरियाणा के पंचगांव में यह 378 और उत्तर प्रदेश के बड़ौत तथा हापुड़ में 328-328 रहा. इन स्थानों की हवा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में थी. बुलेटिन में शामिल 254 शहरों में से 123 की हवा अच्छी या संतोषजनक श्रेणी में दर्ज की गई थी.
PTI के X पोस्ट में देखें, दिल्ली में स्मॉग के हालात-
GRAP-1 क्या है?
GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू किए जाने वाले चरणबद्ध उपायों की व्यवस्था है. इसके तहत हवा की गुणवत्ता बिगड़ने पर प्रदूषण के स्तर के अनुसार पाबंदियां और नियंत्रण संबंधी कदम उठाए जाते हैं.
GRAP के चरण इस प्रकार हैं:
GRAP-1: खराब हवा, AQI 201 से 300
GRAP-2: बहुत खराब हवा, AQI 301 से 400
GRAP-3: गंभीर हवा, AQI 401 से 450
GRAP-4: गंभीर से अधिक प्रदूषण, AQI 450 से ऊपर
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GRAP-1 में किन नियमों के पालन करने होगें?
GRAP-1 के तहत सड़कों और निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने पर जोर दिया जाता है. इसके लिए मैकेनिकल सफाई, पानी का छिड़काव और निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के उपाय किए जाते हैं. निर्माण सामग्री और मलबे को ढककर रखना तथा उन्हें ढके हुए वाहनों में ले जाना जरूरी है. नियमों का पालन नहीं करने वाले निर्माण स्थलों पर कार्रवाई भी की जा सकती है.
इसके अलावा, खुले में कचरा जलाने पर रोक, वाहनों के प्रदूषण की जांच और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर निगरानी जैसे कदम उठाए जाते हैं. होटल, रेस्तरां और खुले भोजनालयों में तंदूर के लिए कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर लागू प्रतिबंधों का पालन कराना भी इसमें शामिल है. डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर निर्धारित नियम लागू होते हैं.
आम लोगों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
निजी वाहन का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार करें और संभव हो तो सार्वजनिक परिवहन अपनाएं.
वाहन का प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) वैध रखें.
वाहन का इंजन चालू रखकर लंबे समय तक एक जगह खड़े रहने से बचें.
कचरा या पत्तियां खुले में न जलाएं.
निर्माण या मरम्मत के दौरान धूल फैलने से रोकने के उपाय करें.