Monday, 6 July 2026
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हिसार में वेंटिलेटर न मिलने से नवजात की मौत मामला:राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हरियाणा सरकार से मांगी रिपोर्ट, 2 हफ्ते का टाइम दिया

INT News6 July 2026 at 09:32 pm

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने हिसार और रोहतक के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर न मिलने के कारण एक नवजात की मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने हरियाणा के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर 2 सप्ताह के भीतर पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने कहा कि यदि मीडिया रिपोर्ट में सामने आए तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला है। जानकारी के अनुसार, यह घटना तब हुई जब राकेश कुमार की पत्नी पूजा (26) को बीते बुधवार दोपहर करीब 3 बजे प्रसव के लिए हिसार के नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद का रहने वाला है और रोजगार के सिलसिले में हिसार में रह रहा है। सिजेरियन डिलीवरी के बाद जन्मे नवजात को लगभग एक घंटे बाद सांस लेने में दिक्कत शुरू हो गई। उसे नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भर्ती किया गया, लेकिन अस्पताल का एकमात्र वेंटिलेटर पहले से ही उपयोग में था। वेंटिलेटर नहीं मिलने से हुई थी नवजात की मौत परिजनों ने बताया कि डॉक्टर ने कहा कि अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में भी वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं है। इसके बाद बुधवार शाम करीब 5 बजे नवजात को 106 किलोमीटर दूर रोहतक पीजीआई रेफर किया गया। वहां बच्चे को भर्ती तो कर लिया गया, लेकिन वेंटिलेटर के लिए रातभर इंतजार करने को कहा गया। गुरुवार सुबह भी वेंटिलेटर उपलब्ध न होने पर डॉक्टरों ने बच्चे को किसी अन्य अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इसके बाद परिजन वापस हिसार लौटे और एक निजी अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और नवजात की मौत हो गई। राकेश कुमार ने बताया कि यह उनका चौथा बच्चा था, उनके पहले दो बेटे और एक बेटी हैं। परिवार का कहना है कि यदि समय पर वेंटिलेटर मिल जाता तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। एनआईसीयू में केवल एक वेंटिलेटर है वहीं, हिसार नागरिक अस्पताल की पीएमओ डॉ. रीना जैन ने बताया था कि एनआईसीयू में केवल एक वेंटिलेटर है, जिस पर पहले से एक नवजात भर्ती था। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में भी वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं था, इसलिए बेहतर उपचार की उम्मीद में बच्चे को रोहतक रेफर किया गया था। अब इस पूरे मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और नवजात उपचार सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।