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'साहबगिरी को अपने सिर न चढ़ने दें, आईएएस अफसर':डीजीपी ने प्रोबेशनर आईएएस अधिकारियों को दी नसीहत; तथ्यों, निष्पक्षता पर आधारित हों प्रशासनिक निर्णय
भारतीय प्रशासनिक सेवा में सिलेक्ट अफसर कभी भी 'साहबगिरी' को अपने सिर पर न चढ़ने दें। अधिकारियों को सकारात्मक सोच अपनाने, विनम्र बने रहने और अपने समकक्ष अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने की जरूरत है। मध्य प्रदेश ऐसा कैडर है, जहां वरिष्ठ अधिकारी सहज उपलब्ध रहते हैं और सीखने का अनुकूल वातावरण मिलता है। अधिकारियों को जिम्मेदारी है कि किसी भी सूचना पर तुरंत विश्वास करने के बजाय पहले उसका सत्यापन करें और उसके बाद ही निर्णय लें। प्रशासनिक निर्णय हमेशा तथ्यों और निष्पक्षता पर आधारित होने चाहिए। डीजीपी कैलाश मकवाणा ने यह बातें मध्यप्रदेश कैडर के 2025 बैच के 8 परिवीक्षाधीन भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से कहीं। ये अधिकारी पुलिस मुख्यालय में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से मुलाकात के लिए पहुंचे थे। डीजीपी ने कहा कि प्रशिक्षण पूरी तन्मयता से प्राप्त करें ताकि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का उत्कृष्ट निराकरण कर सकें। उन्होंने कहा कि वे अपने अधीनस्थ अमले से भी सीखने में संकोच न करें। यह केवल पद नहीं, बल्कि जनता की सेवा का दायित्व है पुलिस महानिदेशक ने नवचयनित अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल एक पद नहीं, बल्कि जनता की सेवा का दायित्व है। उन्होंने अधिकारियों से ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नए आपराधिक कानून, साइबर सुरक्षा, साइबर फ्रॉड, नारकोटिक्स एवं नशा मुक्ति जैसे विषय प्रशासनिक अधिकारियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। बदलती चुनौतियों को देखते हुए अधिकारियों को निरंतर सीखते रहने और तकनीक का प्रभावी उपयोग करने की आवश्यकता है। उन्होंने मंदसौर की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य, संवाद और सही नेतृत्व से बड़ी से बड़ी भीड़ को भी शांतिपूर्वक नियंत्रित किया जा सकता है। किसी भी बड़े परिवर्तन के लिए धैर्य और सतत प्रयास आवश्यक हैं। सूचना पर तुरंत भरोसा करने के पहले उसका सत्यापन करें डीजीपी ने अधिकारियों को सलाह दी कि किसी भी सूचना पर तुरंत विश्वास करने के बजाय पहले उसका सत्यापन करें और उसके बाद ही निर्णय लें। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक निर्णय हमेशा तथ्यों और निष्पक्षता पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने कहा कि ईमानदारी और सत्यनिष्ठा एक युवा अधिकारी की सबसे बड़ी पूंजी है। अधिकारियों को भ्रष्टाचार, भौतिकवादी सोच और व्यक्तिगत स्वार्थ से दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि कभी भी पद का अहंकार अपने ऊपर हावी न होने दें और हर नागरिक की समस्या को स्वयं की समस्या समझकर उसका समाधान करने का प्रयास करें। साहबगिरी' नहीं, जनसेवा का भाव रखें डीजीपी ने कहा कि चयन के बाद कभी भी 'साहबगिरी' को अपने सिर पर न चढ़ने दें। उन्होंने अधिकारियों को सकारात्मक सोच अपनाने, विनम्र बने रहने और अपने समकक्ष अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश ऐसा कैडर है, जहां वरिष्ठ अधिकारी सहज उपलब्ध रहते हैं और सीखने का अनुकूल वातावरण मिलता है। उन्होंने नवचयनित अधिकारियों को इस प्रतिष्ठित सेवा में चयन पर बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे। इस अवसर पर प्रशिक्षु आईएएस खोत पुष्पराज नानासाहेब, आयुषी बंसल, माधव अग्रवाल, श्लोक वाइकर, आशी शर्मा, शैलेंद्र चौधरी, शिल्पा चौहान, सौम्या मिश्रा उपस्थित रहीं।