Sunday, 6 September 2026
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VIDEO: बाढ़ के पानी में पैर रखना पड़ सकता है भारी, डायबिटीज मरीज रहें खास सावधान; डॉक्टर ने बताया बचने का तरीका

INT News6 September 2026 at 09:32 pm

Bihar Flood :  बाढ़ के दौरान सिर्फ घर और फसल ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा बढ़ जाता है. लंबे समय तक गंदे पानी में पैर रहने से फंगल इंफेक्शन के साथ बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा रहता है. डॉक्टर ने बाढ़ प्रभावित लोगों को ORS, पैरासिटामोल, एंटी एलर्जिक और एंटी फंगल दवाइयां रखने की सलाह दी है.

पानी में ज्यादा देर पैर रहने से बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा

बाढ़ के दौरान लगातार पानी में रहने से पैरों की त्वचा में नमी बनी रहती है. इससे फंगल इंफेक्शन होने की आशंका बढ़ जाती है. समय पर ध्यान नहीं देने पर फंगल इंफेक्शन के बाद बैक्टीरियल इंफेक्शन भी हो सकता है. ऐसे में बाढ़ प्रभावित लोगों को कोशिश करनी चाहिए कि पैर लगातार पानी के संपर्क में न रहें और पानी से निकलने के बाद पैरों को अच्छी तरह साफ कर सुखाएं.

डायबिटीज मरीजों को विशेष सावधानी की जरूरत

डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए बाढ़ का पानी और भी जोखिम भरा हो सकता है. पैरों में संक्रमण होने पर गंभीर समस्या पैदा हो सकती है. इसलिए ऐसे मरीजों को अपने पैरों को पानी से बचाने के साथ ब्लड शुगर को भी नियंत्रित रखना जरूरी है. पैर में किसी तरह का घाव, लालिमा, खुजली या संक्रमण दिखाई दे तो लापरवाही नहीं करनी चाहिए.

प्लास्टिक कवर या रबर बूट से बचा सकते हैं पैर

डॉक्टर के अनुसार, जिन लोगों के पास रबर के बूट उपलब्ध नहीं हैं, वे अस्थायी तौर पर प्लास्टिक की थैली का इस्तेमाल कर सकते हैं. प्लास्टिक को पैर पर इस तरह बांधा जा सकता है कि पानी सीधे पैर की त्वचा तक न पहुंचे. हालांकि, इसे सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है और लंबे समय तक गीली प्लास्टिक में पैर नहीं रखना चाहिए.

बाढ़ प्रभावित इलाकों में ये दवाइयां रखें

बाढ़ के दौरान डायरिया, डिसेंट्री और हैजा जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में घर में ORS का पैकेट रखना बेहद जरूरी है. बुखार होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार पैरासिटामोल जैसी सामान्य दवा रखी जा सकती है. इसके अलावा खुजली और एलर्जी के लिए एंटी एलर्जिक दवा तथा फंगल संक्रमण की स्थिति में एंटी फंगल लोशन या क्रीम की जरूरत पड़ सकती है.

पानी को शुद्ध रखना सबसे जरूरी

बाढ़ के दौरान पानी के स्रोत दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है. सीवरेज का पानी पीने के स्रोत में मिलने या क्षतिग्रस्त पाइपलाइन के कारण संक्रमण फैल सकता है. इसलिए पीने के पानी की शुद्धता पर विशेष ध्यान देना चाहिए. डॉक्टर ने पानी को शुद्ध करने के लिए हैलोजन की गोलियों के इस्तेमाल की सलाह दी है. संभव हो तो पानी को उबालकर ठंडा करने के बाद ही पीना चाहिए.

सरकार से नाव पर चलंत स्वास्थ्य केंद्र की मांग

बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है. डॉक्टर ने सुझाव दिया कि ऐसे क्षेत्रों में नाव या चलंत एंबुलेंस के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करायी जानी चाहिए. इसमें जरूरी दवाइयों के साथ सांप काटने की स्थिति के लिए एंटी-स्नेक वेनम की व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि आपात स्थिति में मरीज को तत्काल उपचार मिल सके.

गज-बैंडेज और एंटीसेप्टिक भी रखें

बाढ़ के दौरान चोट लगने और त्वचा पर कटने की घटनाएं बढ़ सकती हैं. इसलिए परिवारों को प्राथमिक उपचार की सामग्री अपने पास रखनी चाहिए. गज, बैंडेज और एंटीसेप्टिक जैसी जरूरी चीजें राहत सामग्री के साथ रखना उपयोगी होगा. पैर या शरीर पर चोट लगने के बाद उसे साफ रखना जरूरी है, ताकि संक्रमण का खतरा कम हो सके.

घर के खाने और अनाज को नमी से बचाना जरूरी

बाढ़ और बारिश के मौसम में घर में रखे अनाज और खाने की चीजों में नमी आने से फफूंदी लग सकती है. ऐसे खाद्य पदार्थों के सेवन से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है. इसलिए खाद्य सामग्री को नमी से बचाकर रखना चाहिए. संभव हो तो सील्ड या एयरटाइट पैकिंग का इस्तेमाल करें और ऐसी चीजों को प्राथमिकता दें जिन्हें कम समय में इस्तेमाल किया जा सके.

ज्यादा खाना बनाकर रखने से बचें

नमी और गर्म वातावरण में पका हुआ खाना जल्दी खराब हो सकता है. इसलिए बाढ़ के दौरान जरूरत के मुताबिक ही भोजन तैयार करना बेहतर है. बचा हुआ खाना लंबे समय तक रखने से बचना चाहिए. किसी खाने में फफूंदी, बदबू या खराब होने के संकेत दिखें तो उसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

दस्त और उल्टी होने पर तुरंत शुरू करें ORS

बाढ़ के दौरान अगर किसी व्यक्ति को दस्त या उल्टी होती है तो शरीर में पानी और नमक की कमी हो सकती है. ऐसी स्थिति में ORS का घोल देना जरूरी है, ताकि डिहाइड्रेशन का खतरा कम किया जा सके. अगर लगातार उल्टी-दस्त हो रहे हों, कमजोरी ज्यादा हो या मरीज की हालत बिगड़ रही हो तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

बाढ़ में छोटी सावधानी बन सकती है बड़ी सुरक्षा

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए साफ पानी, सुरक्षित भोजन और पैरों को पानी से बचाना सबसे महत्वपूर्ण सावधानियों में शामिल है. खासकर डायबिटीज मरीजों, बच्चों और बुजुर्गों को संक्रमण से बचाने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए. प्रशासन को भी राहत शिविरों और प्रभावित इलाकों में स्वच्छ पेयजल, जरूरी दवाइयों, चलंत स्वास्थ्य सेवाओं और पशुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए.

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