Thursday, 5 November 2026
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जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव स्थगित:14 नवंबर को होना थी वोटिंग, इंदौर कमिश्नर के आदेश; कांग्रेस बोलीं- डर गई भाजपा, हाईकोर्ट जाएंगे

INT News5 November 2026 at 09:53 pm

खंडवा जिला पंचायत अध्यक्ष पिंकी सुदेश वानखेड़े की कुर्सी बचाने और गिराने की सियासी लड़ाई में नया मोड़ आ गया है। उनके खिलाफ 14 नवंबर को होने वाला अविश्वास प्रस्ताव का सम्मेलन स्थगित कर दिया गया है। इंदौर संभाग आयुक्त भास्कर लक्षकार ने पंचायत उपचुनाव के लिए लागू आदर्श आचरण संहिता का हवाला देते हुए पूरी कार्रवाई पर रोक लगा दी है। अब उपचुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला होगा। इस फैसले पर कांग्रेस समर्थित सदस्यों ने आपत्ति जताते हुए भाजपा पर राजनीतिक दबाव बनवाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस अब इसके खिलाफ हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। उपचुनाव की आचार संहिता बनी स्थगन की वजह

इंदौर संभाग आयुक्त एवं विहित प्राधिकारी भास्कर लक्षकार ने कलेक्टर खंडवा को आदेश जारी कर अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई स्थगित करने के निर्देश दिए हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान के लिए 14 नवंबर की तारीख तय की गई थी। इसके लिए 29 अक्टूबर को कार्यालयीन पत्र जारी कर कलेक्टर को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया था। सभी निर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों को सम्मेलन की सूचना भी भेज दी गई थी। इसी बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने 4 नवंबर को खंडवा जिले में पंचायत उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया। इसके तहत जनपद पंचायत सदस्य के वार्ड क्रमांक 1 और जिला पंचायत सदस्य के वार्ड क्रमांक 6 में चुनाव होना है। निर्वाचन आयोग ने पंचायत निर्वाचन नियम 1995 के नियम 28 के तहत 12 नवंबर से 9 दिसंबर तक निर्वाचन प्रक्रिया की समय-सारणी निर्धारित की है। निर्वाचन कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही संबंधित ग्राम पंचायत, निर्वाचन क्षेत्र और वार्ड में आदर्श आचरण संहिता लागू हो गई है, जो चुनाव परिणाम घोषित होने तक प्रभावी रहेगी। इसी आधार पर संभाग आयुक्त ने अविश्वास प्रस्ताव से जुड़ी पूरी कार्यवाही स्थगित करने के निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि पंचायत उपचुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अविश्वास प्रस्ताव पर आगे निर्णय लिया जाएगा। कांग्रेस बोली- लोकतंत्र का गला घोंटा, हाईकोर्ट जाएंगे

अविश्वास प्रस्ताव स्थगित होने पर कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत सदस्य मनोज भरतकर ने फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, यह सरासर अन्याय है और लोकतंत्र का गला घोंटने का काम किया गया है। एक दिन पहले ही भाजपा ने लोकतंत्र बचाओ यात्रा निकाली और आज उसी भाजपा ने भोपाल जाकर अविश्वास प्रस्ताव पर रोक लगवा दी। भरतकर ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं ने भोपाल में राजनीतिक दबाव बनाकर कार्रवाई रुकवाई है। उनका कहना है कि उपचुनाव की आचार संहिता संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों और वार्डों में लागू हुई है, पूरे जिले में नहीं। आचार संहिता पहले से प्रभावशील थी, इसके बावजूद अविश्वास प्रस्ताव के सम्मेलन की तारीख तय की गई थी। उन्होंने कहा कि पंचायत एक्ट में भी इस तरह अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई रोकने का प्रावधान नहीं है। कांग्रेस इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगी। पहले भी टल चुकी थी अविश्वास प्रस्ताव की कोशिश

जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की यह दूसरी कोशिश थी। इससे पहले कांग्रेस समर्थित सदस्य लामबंद हुए थे, लेकिन उस समय प्रशासन ने पंचायत अधिनियम का हवाला देकर उनका आवेदन स्वीकार नहीं किया था। तब बताया गया था कि जिला पंचायत अध्यक्ष के कार्यकाल के ढाई साल पूरे होने से पहले अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद कांग्रेस समर्थित सदस्यों ने दोबारा आवेदन दिया। इसके बाद संभाग आयुक्त ने 14 नवंबर को सम्मेलन बुलाने की तारीख तय की थी। अब पंचायत उपचुनाव की घोषणा के बाद यह कार्रवाई फिर अटक गई है। फिलहाल पिंकी सुदेश वानखेड़े जिला पंचायत अध्यक्ष बनी रहेंगी। उपचुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अविश्वास प्रस्ताव पर अगला निर्णय होगा। ऐसे में अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान और लंबी खिंच सकती है।