Wednesday, 12 August 2026
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1 लाख करोड़ का डिफेंस एग्रिमेंट: 60 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदेगा भारत; टाटा, महिंद्रा और HAL रेस में

INT News12 August 2026 at 08:49 pm

भारतीय वायुसेना के पुराने पड़ चुके ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट बदलने की तैयारी तेज हो चुकी है. डिफेंस मिनिस्ट्री ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये की लागत से 60 मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदने के लिए टेंडर जारी किया है. इस बड़े डिफेंस एग्रिमेंट में मुख्य रूप से भारतीय कंपनियां रहेंगी. जिनमें टाटा, महिन्द्रा और हिंदुस्तान एरॉनोटिक्स लिमिटेड (HAL) समेत कई कंपनियां रेस में बताई जा रही हैं.

टाटा और महिन्द्रा ने विदेशी कंपनियों से मिलाया हाथ

डिफेंस अधिकारियों के मुताबिक, महिंद्रा डिफेंस ने ब्राजील की एंब्रायर (Embraer) के साथ साझेदारी की है और वह C-390 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान की पेशकश करेगी. वहीं टाटा ने अमेरिकी कंपनी लॉखिड मार्टिन के साथ हाथ मिलाया है और वह C-130 विमान के लिए बोली लगाएगी. C-130J Super Hercules पहले से ही भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल है और इसका इस्तेमाल विशेष अभियानों में किया जाता है.

ज्यादातर विमान भारत में ही बनेंगे

इस कार्यक्रम में करीब 20 फीसदी विमान तैयार हालत में सीधे भारतीय वायुसेना को दिए जाएंगे, जबकि बाकी विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा. इन विमानों में 60 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी सामग्री इस्तेमाल करने का लक्ष्य रखा गया है.

विमानों का निर्माण भारतीय कंपनियों और मूल विमान निर्माता कंपनियों के बीच संयुक्त उपक्रमों के जरिए भारत में किया जाएगा. इससे देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय सप्लाई चेन और तकनीकी क्षमता को भी मजबूत करने की उम्मीद है.

पहले से C-130 और C-295 पर काम कर रही वायुसेना

भारतीय वायुसेना के पास अभी 12 C-130J Super Hercules विमान हैं. इसके अलावा वायुसेना Airbus के साथ C-295 ट्रांसपोर्ट विमान कार्यक्रम पर भी काम कर रही है. करीब 70 C-295 विमानों को वायुसेना में शामिल किया जाना है, जिनमें बड़ी संख्या में विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा.

सिर्फ सैनिकों को ढोने तक सीमित नहीं होंगे ये विमान

नए मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल केवल सैनिकों और सैन्य सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए नहीं होगा. जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल हवाई ईंधन भरने वाले टैंकर के तौर पर भी किया जा सकता है.

इसके अलावा युद्ध या आपात स्थिति में भारी उपकरणों और सैनिकों को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में भी इन विमानों की अहम भूमिका होगी.

भारतीय वायुसेना पहले ही अपने आधुनिकीकरण अभियान के तहत 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए टेंडर जारी कर चुकी है. साथ ही पुराने Hawk ट्रेनर विमानों को बदलने और पायलटों की ट्रेनिंग क्षमता बढ़ाने के लिए 100 से ज्यादा नए ट्रेनर विमान शामिल करने की योजना पर भी काम चल रहा है.

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