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23 दिनों में 56 क्लोन चेक से 2.72 करोड़ की निकासी, हाइटेक तरीका अपनाने के कारण नहीं पकड़ाया शातिर गिरोह

पटना. बेल्ट्रॉन के खाते से क्लोन चेक के माध्यम से 2.72 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के मामले की शास्त्रीनगर थाना पुलिस ने गहराई से जांच शुरू कर दी है. शातिर बदमाशों ने महज 23 दिनों के भीतर 56 क्लोन चेक के जरिए 2.72 करोड़ रुपये उड़ा लिए और बैंक को इसकी भनक तक नहीं लगी. बदमाशों ने क्लोन चेक तैयार करने में इतने हाईटेक तरीकों का इस्तेमाल किया कि बैंक की पकड़ में आने से बचते रहे और लगातार चेक पास होकर रकम ट्रांसफर होती रही. इसके बाद बदमाशों ने ट्रांसफर की गई इस रकम को कैश या एटीएम कार्ड के जरिए निकाल लिया.
क्लोन चेक के जरिए इस बड़ी ठगी को अंजाम देने वाले गिरोह ने साधारण फोटोकॉपी तकनीक के बजाय हाई-एंड यूवी स्कैनर, वेक्टर री-ड्रॉइंग सॉफ्टवेयर और ऑफसेट लिथोग्राफी तकनीक का सहारा लिया. गिरोह ने बेल्ट्रॉन के मूल चेक के वाटरमार्क, माइक्रो-टेक्स्ट और इनविजिबल फ्लोरोसेंट इंक पैटर्न को नागपुर की एक एजेंसी में ही स्कैन कर लिया था. इसके बाद बैंक के विशेष फॉन्ट और माइकर (मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रिकॉग्निशन) बैंड की डिजिटल मैपिंग करने के बाद उसका ब्लूप्रिंट कानपुर स्थित एक प्रिंटिंग प्रेस में भेजा गया. इसके माध्यम से ऑफसेट प्लेट्स तैयार कर चेक के निचले हिस्से पर छपे 9 अंकों का विशेष कोड भी हूबहू उतार लिया गया, जिससे चेक पूरी तरह असली प्रतीत होने लगा.
कानपुर और नागपुर जाएगी पटना पुलिस की विशेष टीम
इस हाईप्रोफाइल मामले की तह तक जाने के लिए पटना पुलिस की एक विशेष टीम जल्द ही कानपुर और नागपुर के लिए रवाना होगी. पुलिस इस बात का पता लगाएगी कि नागपुर की एजेंसी से बदमाशों ने चेक का ब्लूप्रिंट कैसे हासिल किया. इसके साथ ही, कानपुर की प्रिंटिंग प्रेस में भी जाकर पूरे नेटवर्क की जांच की जाएगी.
दरअसल, नागपुर की एक एजेंसी के पास इंडियन ओवरसीज बैंक की चेकबुक छापने का जिम्मा था. एजेंसी द्वारा चेकबुक छापने के बाद उसे स्पीड पोस्ट के जरिए बेल्ट्रॉन के रजिस्टर्ड पते पर भेजा जाना था, लेकिन पार्सल मिलने से पहले ही शातिर गिरोह ने इस पूरे खेल को अंजाम दे दिया. जब तक इस जालसाजी का खुलासा हुआ, तब तक बेल्ट्रॉन के खाते से 2.72 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि निकाली जा चुकी थी. इस संबंध में शास्त्रीनगर थाने में आधिकारिक तौर पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है.
बॉन्ड पेपर और केमिकल-सेंसिटिव इंक का हुआ इस्तेमाल
खास बात यह है कि इस बार गिरोह ने क्लोन चेक बनाने के लिए साधारण कागज के बजाय बॉन्ड पेपर और केमिकल-सेंसिटिव इंक की मदद ली थी. इससे पहले इस तरह के गिरोह नॉर्मल पेपर पर ही क्लोन चेक तैयार कर पैसों की निकासी कर लेते थे, लेकिन बैंकों की कड़ी निगरानी बढ़ने के बाद इस तरह के अवैध धंधे पर काफी हद तक रोक लग गई थी. काफी लंबे समय बाद इस तरह का मामला सामने आया है, जिसमें बेहद शातिराना तरीके से क्लोन चेक के माध्यम से किसी खाते से इतनी बड़ी रकम की अवैध निकासी की गई है.
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