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किसानों को आसानी से लोन दिलाने वाला बिल लोकसभा में पास, सहकारी क्षेत्र को भी बड़ी राहत

NCDC Bill passed in Lok Sabha: लोकसभा ने मंगलवार को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 को हंगामे के बीच पारित कर दिया, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के अधिकार क्षेत्र का विस्तार करना है. विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच, सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने यह विधेयक चर्चा और पारित करने के लिए पेश किया, हालांकि विधेयक सहकारिता मंत्री अमित शाह के नाम से सूचीबद्ध था.
ध्वनिमत से विधेयक को किया पारित
विपक्ष के सांसद राम मंदिर से चढ़ावे की कथित चोरी पर चचचर्चा और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई पर गृह मंत्री शाह के जवाब की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे. सदन ने चर्चा के बिना ही विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया. हंगामे के कारण विधेयक पर एन के प्रेमचंद्रन, सौगत राय, मनोज कुमार, अभय कुमार सिनप, लालजी वर्मा और नीरज मौर्य समेत कुछ विपक्षी सदस्यों ने अपने संशोधन प्रस्तुत नहीं किये.
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एफसी आरए बिल को संयुक्त समिति भेजने पर हो रहा विचार
एफसीआरए विधेयक, 2026 को संसद के दोनों सदनों की एक संसद समिति के पास भेजने पर विचार कर रही है. हालांकि कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने इसे वापस लेने की मांग की है. सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा की कार्य मंत्रणा समिति की बैठक के दौरान कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस उन पार्टियों में शामिल थीं, जिन्होंने यह मुद्दा उठाया, हालांकि यह एजेंडा का हिस्सा नहीं था.
इन दलों ने सवाल किया कि एफसीआरए विधेयक को सदन में कब लाया जायेगा. इसके जवाब में सरकार ने कहा कि इस बारे में उचित समय पर निर्णय लिया जायेगा. इन दोनों पार्टियों ने विधेयक को वापस लेने की मांग की, लेकिन बीजद जैसे अन्य दलों का मानना है कि विधेयक को व्यापक चर्चा के लिए संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा जा सकता है. द्रमुक भी विधेयक को वापस लिए जाने के पक्ष में है.
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एनसीडीसी बिल से किसानों को लाभ
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के कामकाज का दायरा बढ़ेगा. सहकारी समितियों से जुड़े किसानों और छोटे कारोबारियों के लिए कर्ज एवं अन्य वित्तीय मदद प्राप्त करना आसान हो जायेगा. एनसीडीसी की वित्तीय सहायता को ज्यादा सीधा, लचीला एवं समयबद्ध बनाया जायेगा. अब एनसीडीसी सिर्फ सहकारी समितियों को ही नहीं, बल्कि सहकारी क्षेत्र में काम करने वाली अन्य पात्र संस्थाओं को भी सीधे ऋण और अनुदान दे सकेगा. वित्तीय मदद देने के लिए हर बार राज्य सरकार या किसी दूसरी सहकारी संस्था को बीच में लाने की जरूरत नहीं होगी. सहकारी समितियों या सहकारी विकास से जुड़ी संस्थाओं की शेयर पूंजी में हिस्सा लेने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है.