Friday, 7 August 2026
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गुरुग्राम में फर्जी बीमा लोकपाल ठग गिरोह का पर्दाफाश:जाली डॉक्यूमेंट्स बनाकर बंद पॉलिसी के नाम पर सवा करोड़ ठगे, चार शातिर आरोपी गिरफ्तार

INT News7 August 2026 at 03:46 pm

गुरुग्राम में बीमा लोकपाल का फर्जी अधिकारी बनकर एक व्यक्ति से करीब 1.19 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस की साइबर अपराध थाना वेस्ट टीम ने इस सनसनीखेज मामले में कार्रवाई करते हुए चार शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान मोहम्मद मोशिरुल हक, भरत जनक सिंह कपाड़िया, सुभाष कुमार और साहिल गुसांई के रूप में हुई है। पुलिस ने सभी आरोपियों को अदालत में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया है, ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी की रकम की बरामदगी की जा सके। लैप्स पॉलिसी के नाम पर बिछाया जाल

यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक व्यक्ति ने साइबर क्राइम वेस्ट थाना 0में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया कि कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने उससे संपर्क किया और खुद को बीमा लोकपाल का बड़ा अधिकारी बताया। ठगों ने पीड़ित को झांसा दिया कि उसकी कुछ पुरानी बीमा पॉलिसियां जो अब लैप्स हो चुकी हैं, उनके एवज में उसे पहले 57 लाख रुपये दिलाए जाएंगे। इसके बाद ठगों ने पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए नया जाल बुना और कहा कि उसका एजेंट कोड समाप्त करके लाभार्थी कोड स्थानांतरित किया जा रहा है, जिससे उसे कुल 1,03,77,220 रुपये की भारी-भरकम राशि मिल सकती है। अलग-अलग चार्ज के नाम पर ऐंठे 1.19 करोड़

इस भारी रकम का लालच देकर आरोपियों ने पीड़ित को अपने जाल में पूरी तरह फंसा लिया। इसके बाद उन्होंने फाइल चार्ज, मेंटेनेंस चार्ज, ट्रांजैक्शन चार्ज और फुल एंड फाइनल शुल्क के नाम पर पीड़ित से पैसे मांगना शुरू कर दिया। पीड़ित सरकारी प्रक्रियाओं के झांसे में आकर अलग-अलग समय पर ठगों द्वारा बताए गए विभिन्न बैंक खातों में ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करता रहा। इस तरह आरोपियों ने पीड़ित से कुल 1 करोड़ 19 लाख रुपये की बड़ी रकम ऑनलाइन ट्रांसफर करवाकर ठग ली। जब पीड़ित को रकम मिलने के बजाय लगातार और पैसों की मांग की जाने लगी, तब उसे ठगी का अहसास हुआ और उसने पुलिस से संपर्क किया। फर्जी दस्तावेज और बैंक खातों का खेल

साइबर पुलिस की जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने ठगी की रकम को खपाने के लिए बेहद शातिराना तरीका अपनाया था। मुख्य आरोपी मोहम्मद मोशिरुल हक ने अपने साथियों की मदद से 'उत्सव उपाध्याय' के नाम से फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड तैयार करवाए थे। इन्हीं नकली दस्तावेजों के आधार पर एक बैंक खाता खुलवाया गया, जिसमें शिकायतकर्ता के लगभग 43 लाख रुपये प्राप्त हुए थे। इस मामले में दूसरा आरोपी भरत जनक सिंह कपाड़िया इस फर्जी खाते से चेक के माध्यम से नकद राशि निकालता था. वह इस पैसे को गिरोह के अन्य साथियों द्वारा बताए गए ठिकानों और व्यक्तियों तक पहुंचाता था। इस काम के बदले वह खुद का और अपने सह-आरोपियों का तय कमीशन रखता था। साइबर कैफे से रची गई साजिश

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस गिरोह को तकनीकी और दस्तावेजी मदद देने में सुभाष कुमार और साहिल गुसांई की मुख्य भूमिका थी। सुभाष कुमार, जो एक साइबर कैफे संचालित करता है, ने ही 'उत्सव उपाध्याय' के नाम से फर्जी आधार और पैन कार्ड डिजाइन किए थे। वहीं चौथे आरोपी साहिल गुसांई ने इन फर्जी दस्तावेजों को वेरिफाई कराने, फर्जी नामों पर सिम कार्ड जारी कराने और ठगी के दौरान कॉलिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड उपलब्ध कराने में गिरोह का पूरा सहयोग किया था। आरोपियों के लिंक खंगाल रही पुलिस डीसीपी साइबर क्राइम गौरव फौगाट ने बताया कि पुलिस अब रिमांड के दौरान इन आरोपियों से कड़ी पूछताछ कर रही है। पुलिस को अंदेशा है कि इस गिरोह ने देश के अलग-अलग राज्यों में भी कई लोगों को इसी तरह बीमा लोकपाल का अधिकारी बनकर अपना शिकार बनाया होगा।