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उत्तराखंड में ट्रेक पर हिमस्खलन से मरने वालों की संख्या 6 हुई, दो शव और बरामद हुए

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में केदारताल ट्रेक मार्ग पर हुए हिमस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। गुरुवार को बचाव दल ने दो और ट्रेकर्स के शव बरामद किए। इस हादसे में कुल आठ लोग लापता हुए थे, जिनमें से अब तक छह के शव मिल चुके हैं। वहीं, दो अन्य लापता लोगों की तलाश जारी है। प्रशासन के मुताबिक, शुक्रवार को फिर से सर्च ऑपरेशन शुरू किया जाएगा।उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि गुरुवार सुबह करीब नौ बजे राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) की संयुक्त टीम ने सैटेलाइट फोन के जरिए दो शव मिलने की सूचना दी। दोनों शव अलग-अलग स्थानों से बरामद किए गए हैं। ये दोनों पुरुष ट्रेकर्स के हैं। उन्होंने बताया कि शवों को शुक्रवार को उत्तरकाशी के पास मातली हेलीपैड लाया जाएगा। इसके बाद आगे की कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।हादसे की होगी मजिस्ट्रेट जांचजिलाधिकारी ने बताया कि घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए गए हैं। भटवाड़ी की उपजिलाधिकारी (SDM) शालिनी नेगी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें एक सप्ताह के भीतर घटना की विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।29 अक्टूबर को हुआ था हिमस्खलनयह हादसा 29 अक्टूबर को केदारताल ट्रेक मार्ग पर केदार खरक के पास हुआ था। उस समय 12 सदस्यीय पर्वतारोहण दल केदारताल से नीचे उतर रहा था। इस दल में सात ट्रेकर्स और पांच सहयोगी कर्मचारी शामिल थे। अभियान 27 अक्टूबर को गंगोत्री से शुरू हुआ था और 29 अक्टूबर तक पूरा होना था। अभियान में शामिल चार सहयोगी कर्मचारी 30 अक्टूबर को किसी तरह गंगोत्री पहुंचने में कामयाब रहे थे। उन्होंने अन्य सदस्यों से संपर्क टूटने के बाद प्रशासन को हादसे की जानकारी दी थी।पश्चिम बंगाल और यूपी के ट्रेकर्स थे शामिललापता लोगों में पश्चिम बंगाल के पांच पुरुष ट्रेकर्स, उत्तर प्रदेश की दो महिला ट्रेकर्स और उत्तरकाशी का एक स्थानीय गाइड शामिल था। बचाव दल ने मंगलवार को दो और बुधवार को भी दो शव बरामद किए थे। गुरुवार को दो और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या छह हो गई है। बता दें कि केदारताल समुद्र तल से करीब 15,485 फीट (4,720 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित एक हिमनदीय झील है। यह थलयसागर, भृगुपंथ और जोगिन पर्वत चोटियों से पिघलने वाली बर्फ से पोषित होती है। ऊंचाई और कठिन रास्तों के कारण यह अनुभवी पर्वतारोहियों और ट्रेकर्स के बीच लोकप्रिय है।