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पूर्वोत्तर भारत का इंडस्ट्रियल हब बनेगा बिहार, करोड़ों के प्रोजेक्ट्स से बदलेगी सूरत, कुछ ऐसा है मास्टर प्लान

Bihar Industrial Development: 'सरकार का लक्ष्य राज्य के हर जिले में कम-से-कम एक बड़ा उद्योग स्थापित करना है. पांच लाख करोड़ रुपये के निवेश को जमीन पर उतारने की दिशा में काम किया जाएगा. इसके लिए PPP मॉडल के तहत उद्योगों को जमीन उपलब्ध कराने की योजना है'. यह ऐलान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया था.
सम्राट चौधरी सरकार के 100 साल पूरे होने पर राज्यस्तरीय विकास उत्सव का आयोजन किया गया था. इस दौरान उन्होंने 11,464 करोड़ रुपये की 2,476 विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया था. इसमें स्वास्थ्य, सड़क, कृषि, उद्योग और निवेश से जुड़े कई अहम फैसलों की जानकारी दी गई थी.
इस तरह से बिहार में उद्योग को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है. इसे लेकर सरकार का मानना है कि औद्योगिक निवेश बढ़ने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और युवाओं का पलायन कम होगा. ऐसे में बिहार सरकार की ओर से बिहार में औद्योगिक विकास के लिए क्या कुछ प्लानिंग की गई है, कौन-कौन प्रमुख योजनाएं लाई गईं हैं और कौन-कौन से बड़े ऐसे प्रोजेक्ट्स हैं, जो बिहार के लिए गेम चेंजर साबित हो सकेंगे... पढ़िए पूरी रिपोर्ट...
बिहार में औद्योगिक विकास के लिए सरकार के प्रमुख ऐलान
51,600 करोड़ का होगा निवेश- बिहार में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में उद्योग विभाग ने करीब 51,600 करोड़ रुपये के निवेश के लिए विभिन्न कंपनियों के साथ एमओयू किए. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में हुए इन समझौतों से स्टील, टेक्सटाइल, ऊर्जा और फार्मा क्षेत्र में नई परियोजनाएं आने की उम्मीद है. ग्लोबल रिन्यूएबल एडवांस्ड क्लीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (ग्रेस) न्यूक्लियर एनर्जी क्षेत्र में 22,500 करोड़ रुपये निवेश करेगी. जबकि क्रिएटिव ग्रुप और अनुभव एपरेल्स बिहार में टेक्सटाइल इकाइयां लगाने की तैयारी में हैं.
गयाजी में मेगा स्टील प्लांट- बिहार के गयाजी में स्टील प्लांट लगाया जाएगा. इसके लिए 6000 करोड़ रुपये खर्च किए जायेंगे. गयाजी में बड़े एकीकृत इस्पात (Large Integrated Steel Project) लगाने के लिए उद्योग विभाग और महाशक्ति ग्रुप के बीच एमओयू साइन किया गया है. प्रस्तावित परियोजना की उत्पादन क्षमता 1.0 से 1.5 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) होगी.
'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा- बिहार सरकार ने नए उद्योगों के लिए मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाकर इसे अधिकतम 30 दिनों में अनिवार्य कर दिया है. जानकारी के मताबिक, निर्धारित समय-सीमा में निर्णय न होने पर प्रोजेक्ट को स्वतः मंजूरी (Deemed Clearance) मिल जाएगी, जिसका उद्देश्य 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देना है.
नई और बंद पड़ी चीनी मिलों को चालू करना- बिहार में नई और पुरानी चीनी मिलों को खोलने की योजना बनाई गई है. गन्ना आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने शुगरकेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पोर्टल (SIPP) शुरू किया है. गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने पोर्टल लॉन्च करते हुए बताया था कि इसके जरिए निवेशकों को एक ही जगह पर जरूरी सुविधाएं और जानकारी मिल सकेगी. यह पहल बिहार गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 के तहत की गई. नई चीनी मिल लगाने वाले निवेशकों को सरकार 70 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी देगी. साथ ही पांच साल तक 100 फीसदी SGST की वापसी का प्रावधान है.
25000 करोड़ का वित्तपोषण का फैसला- सरकार ने राज्य में औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए 25000 करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला लिया था. इसके लिए सीएम सम्राट चौधरी ने जमीन अधिग्रहण और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए आधारभूत संरचना विकास प्राधिकार (आयडा) को वित्तीय संस्थानों से राज्य सरकार की गारंटी पर 25000 करोड़ रुपये लोन लेने के लिए अधिकृत करने की स्वीकृति दी थी.
बिहार में उद्योग को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख योजनाएं
बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज (BIPPP)
बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 (BIPPP-2025) बड़े उद्योगों और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए बिहार सरकार की एक प्रमुख योजना है. इसकी समयावधि बढ़ाकर अब 31 दिसंबर 2026 कर दी गई है.
100 करोड़ रुपये से अधिक निवेश और कम-से-कम 1,000 प्रत्यक्ष रोजगार देने वाली इकाइयों को 10 एकड़ तक जमीन मुफ्त या एक रुपये की टोकन राशि पर देने का प्रावधान है.
1,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली परियोजनाओं को 25 एकड़ तक मुफ्त जमीन मिल सकती है.
ऐसी परियोजनाओं के लिए 40 करोड़ रुपये तक ब्याज सब्सिडी और 30 फीसदी तक पूंजीगत सब्सिडी का प्रावधान है.
निवेशकों को 14 वर्षों तक 300 फीसदी तक नेट SGST प्रतिपूर्ति का लाभ भी दिया जाता है.
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना
युवाओं, महिलाओं और वंचित वर्गों को अपना उद्योग शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना इसका उद्देश्य है.
नए उद्योग की स्थापना के लिए 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाती है.
सहायता की 50 फीसदी राशि यानी अधिकतम 5 लाख रुपये अनुदान के रूप में होती है, जिसे वापस नहीं करना पड़ता.
बाकी की राशि पर महिलाओं, SC/ST और अति पिछड़ा वर्ग के लाभार्थियों को ब्याजमुक्त ऋण, जबकि सामान्य वर्ग के युवाओं को सिर्फ 1 फीसदी वार्षिक ब्याज देना होता है.
बिहार लघु उद्यमी योजना
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को स्वरोजगार और छोटे व्यवसाय शुरू करने में मदद करना इसका लक्ष्य है.
चयनित लाभार्थियों को 2 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाती है.
राशि तीन किस्तों में उपलब्ध कराई जाती है.
योजना से छोटे कारोबार, स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर जोर है.
बिहार स्टार्टअप नीति
नए विचारों, तकनीक और Innovation आधारित कारोबार को बढ़ावा देने के लिए यह नीति लागू की गई है.
पात्र स्टार्टअप को 10 लाख रुपये तक ब्याजमुक्त सीड मनी ऋण के रूप में दी जाती है.
यह राशि 10 वर्षों तक के लिए उपलब्ध हो सकती है.
महिला उद्यमियों के लिए 5 फीसदी अतिरिक्त प्रोत्साहन और विशेष अनुदान का प्रावधान है.
क्षेत्र-विशेष प्रोत्साहन नीतियां
बिहार में टेक्सटाइल, लेदर, खाद्य प्रसंस्करण और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग नीतियां लागू हैं.
इन नीतियों के तहत निवेशकों को उद्योग स्थापित करने, बिजली खर्च और रोजगार सृजन आदि के आधार पर अलग-अलग प्रोत्साहन और अनुदान दिए जाते हैं
इनका उद्देश्य राज्य की स्थानीय क्षमता के अनुरूप औद्योगिक क्लस्टर विकसित करना और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करना है.
बिहार में औद्योगिक विकास से जुड़े 5 बड़े और प्रमुख प्रोजेक्ट्स
गयाजी इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट
गयाजी में करीब 6,000 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित यह परियोजना बिहार को स्टील उत्पादन का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इससे विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है.
मुजफ्फरपुर मेगा फूड पार्क
मोतीपुर में स्थापित मेगा फूड पार्क का उद्देश्य कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, पैकेजिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देना है. इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर बाजार और प्रसंस्करण की आधुनिक सुविधाएं मिल सकेंगी.
बिहटा ईवी और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट
पटना के बिहटा स्थित सिकंदरपुर औद्योगिक क्षेत्र में Empara Life India Private Limited की ओर से करीब 5,600 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है. परियोजना में लिथियम-आयन बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण की योजना है. कंपनी के अनुसार इससे करीब 3,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं. यह परियोजना बिहार में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और बैटरी निर्माण का नया औद्योगिक आधार तैयार कर सकती है.
बिहार में न्यूक्लियर पावर प्लांट परियोजना
मुख्य रूप से बिहार के बांका और नवादा में न्यूक्लियर पावर परियोजनाओं की संभावनाओं पर काम किए जाने की जानकारी सामने आई है. प्रस्तावित परियोजनाओं में ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) तकनीक के इस्तेमाल की बात कही गई है. परियोजनाओं को लेकर NPCIL और NTPC से जुड़े स्तर पर सर्वे और अन्य प्रारंभिक गतिविधियों की चर्चा है.
बक्सर में कोका-कोला और जेके सीमेंट की यूनिट्स
बक्सर में करीब 1,700 करोड़ रुपये की लागत से बॉटलिंग प्लांट और सीमेंट निर्माण से जुड़ी इकाइयों के संचालन से क्षेत्र में विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिला है. इससे स्थानीय रोजगार, लॉजिस्टिक्स और छोटे कारोबारों को भी गति मिलने की उम्मीद है.
किस-किस क्षेत्र में उद्योग लगाने की है योजना
कृषि आधारित एवं फूड प्रोसेसिंग उद्योग
बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था को उद्योग से जोड़ने के लिए मखाना, मक्का, फल, सब्जियां और अनाज के प्रसंस्करण और पैकेजिंग से जुड़ी इकाइयों को बढ़ावा दिया जा रहा है. इससे किसानों को बेहतर बाजार मिलने के साथ कृषि उत्पादों का वैल्यू एडिशन और स्थानीय रोजगार बढ़ सकता है.
वस्त्र और चर्म उद्योग
टेक्सटाइल, लेदर गुड्स और फुटवियर निर्माण को रोजगार आधारित उद्योगों के रूप में विकसित करने की संभावनाएं हैं. इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से विशेषकर युवाओं और महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं.
स्टील और विनिर्माण उद्योग
गया समेत राज्य के अन्य हिस्सों में प्रस्तावित स्टील प्लांट और मेटल आधारित यूनिट्स बिहार के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत कर सकती हैं. इनके साथ Ancillary Industries और सप्लाई चेन विकसित होने की संभावना है.
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी
आईटी पार्क, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी हब और इलेक्ट्रॉनिक्स व सेमीकंडक्टर से जुड़े प्रस्ताव बिहार में नई तकनीकी अर्थव्यवस्था का आधार बन सकते हैं. इससे कुशल युवाओं के लिए रोजगार और स्टार्टअप के अवसर बढ़ सकते हैं.
ऊर्जा क्षेत्र
सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण, ग्रीन एनर्जी और अन्य क्लीन एनर्जी परियोजनाओं पर जोर बढ़ रहा है. इन परियोजनाओं से ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के साथ नए निवेश और रोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं.
पूर्वोत्तर भारत का इंडस्ट्रियल हब बनेगा बिहार
इस तरह से बिहार में सरकार लगातार उद्योग लगाने पर जोर दे रही है. बिहार उद्योग विभाग की तरफ से ऑनलाइन पोर्टल भी लॉन्च किए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की बाधा इंडस्ट्री को स्थापित करने में नहीं झेलना पड़े. बिहार सरकार की योजना बिहार को पूर्वोत्तर भारत का इंडस्ट्रियल हब बनाने पर है, इस वजह से हर जिले में उद्योग-धंधे स्थापित किए जाने की प्लानिंग की गई है.
इसके लिए स्टील, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, ऊर्जा, फार्मा, ईवी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित किया जा रहा है. औद्योगिक पार्कों के विस्तार के साथ PPP मॉडल के जरिए निवेशकों को जमीन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है. सड़क, रेल और लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी मजबूत कर बिहार को पूर्वी भारत के बड़े बाजारों से जोड़ने पर भी जोर है. इससे बिहार में लोगों को रोजगार मिलने के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिल सकेगा.
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