समाचार · मध्य प्रदेश
विदिशा जनसुनवाई में महिलाओं की दो बड़ी मांगें:काछी कुएं पर अतिक्रमण हटाने और गौशाला का संचालन करने देने की अपील
विदिशा कलेक्टोरेट में आयोजित जनसुनवाई में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं ने अपनी समस्याएं प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत कीं। लोहांगी मोहल्ला क्षेत्र की महिलाओं ने ऐतिहासिक काछी कुएं को अतिक्रमण से बचाने की मांग की, जबकि सिरोंज तहसील के बिलोरी गांव से आई महिलाओं ने गौशाला के संचालन का अधिकार महिला स्वयं सहायता समूह को सौंपने की अपील की। अतिक्रमण की चपेट में काछी कुआं लोहांगी मोहल्ला क्षेत्र की महिलाओं ने अधिकारियों को बताया कि काछी कुआं उनके पूर्वजों द्वारा बनवाया गया था। यह कुआं लगभग तीन-चार पीढ़ियों से क्षेत्र के लिए पानी का मुख्य स्रोत रहा है। महिलाओं के अनुसार, इसी कुएं के नाम पर पूरे क्षेत्र को ‘काछी कुआं’ के नाम से जाना जाता है। इस कुएं की विशेषता यह है कि आसपास के अन्य जलस्रोतों के विपरीत यह कभी सूखा नहीं और आज भी क्षेत्र की पानी की आवश्यकता पूरी करता है। महिलाओं ने बताया कि पहले कुएं के चारों ओर पर्याप्त खुली जगह और एक पक्का चबूतरा था। मकान भी कुएं से उचित दूरी पर बनाए गए थे, लेकिन समय के साथ आसपास निर्माण कार्य बढ़ता गया। महिलाओं ने आरोप लगाया कि कुछ व्यक्तियों ने कुएं के आसपास की भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण कार्य कर लिया है। इससे कुएं का अस्तित्व और उसके चारों ओर की जगह दोनों खतरे में पड़ गए हैं। उन्होंने जोर दिया कि यह कुआं न केवल उनके पूर्वजों की धरोहर है, बल्कि क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण जलस्रोत भी है। यदि अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो भविष्य में कुएं के अस्तित्व के साथ-साथ क्षेत्र की पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। महिलाओं ने बताया कि नगर पालिका में शिकायत के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने प्रशासन से कुएं की भूमि की जांच करने, अतिक्रमण हटाने और कुएं के संरक्षण की मांग की। अधिकारियों ने मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। गौशाला संचालन महिला समूह को सौंपने की मांग इसी जनसुनवाई में सिरोंज तहसील के बिलोरी गांव से बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचीं। उन्होंने मांग की कि गौशाला के संचालन की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूह को सौंपी जाए। समूह की सदस्य रूपवती बाई ने कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को शिकायत देकर कहा कि गांव की गौशाला का संचालन वर्तमान में सरपंच द्वारा किया जा रहा है, जबकि समूह को संचालन की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। महिलाओं ने शासन के संबंधित आदेश का पालन कराने और समूह को गौशाला संचालन का अधिकार देने की मांग की। महिलाओं का कहना है कि इससे गोवंश की बेहतर देखरेख के साथ महिलाओं को रोजगार और आय का अवसर भी मिलेगा। महिलाओं ने गौशाला से दूध उत्पादन, जैविक खाद और गोबर से उपयोगी उत्पाद तैयार कर समूह की आमदनी बढ़ाने की बात भी कही। प्रदेश में गौशालाओं के संचालन में महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। वहीं, ‘स्वावलंबी गौशाला नीति-2025’ के तहत समूहों और संस्थाओं को बड़ी क्षमता वाली गौशालाओं से जोड़ा जा रहा है। गोवंश के लिए मिलने वाली अनुदान राशि भी 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति गोवंश प्रतिदिन की गई है। महिलाओं ने इसी व्यवस्था के तहत बिलोरी गौशाला का संचालन समूह को सौंपने की मांग की।