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सात महीने बाद हो पाई चोरी की FIR:दिसंबर 2025 में हुई थी वारदात, मधुसूदनगढ़ पुलिस ने जुलाई 2026 में दर्ज किया केस; थाना प्रभारी बोले-संज्ञान में आते ही की कार्रवाई
गुना जिले के मधुसूदनगढ़ थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक ग्रामीण के घर हुई लाखों रुपये की चोरी की वारदात में करीब सात महीने बाद एफआईआर दर्ज की गई है। पीड़ित का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद शिकायत देने के बावजूद पुलिस ने लंबे समय तक मामला दर्ज नहीं किया। वह न्याय की उम्मीद में लगातार थाने के चक्कर लगाता रहा, लेकिन हर बार उसे टाल दिया गया। आखिरकार 28 जुलाई 2026 को मधुसूदनगढ़ पुलिस ने चोरी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। 27 दिसंबर 2025 को हुई थी चोरी मामला मधुसूदनगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम दिरौली का है। पीड़ित टीकाराम शर्मा (48) ने बताया कि 27 दिसंबर 2025 की सुबह वह पूजा-अर्चना के लिए महुआपुरा गए थे। दोपहर में उनकी पत्नी भी किसी काम से घर से बाहर चली गई थीं। शाम को जब दोनों वापस लौटे तो घर के पीछे का दरवाजा टूटा हुआ मिला। घर के अंदर प्रवेश करने पर कमरों का सामान अस्त-व्यस्त पड़ा था। अलमारी का ताला टूटा हुआ था और उसमें रखे सोने के दो मंगलसूत्र सहित चांदी के जेवरात गायब थे। घर में बिखरा सामान देखकर परिवार को चोरी का पता चला। वारदात के तुरंत बाद पहुंचे थे थाने पीड़ित के अनुसार, चोरी का पता चलते ही उन्होंने उसी दिन मधुसूदनगढ़ थाने पहुंचकर पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। उन्हें उम्मीद थी कि पुलिस तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। टीकाराम का आरोप है कि इसके बाद कई महीनों तक वे लगातार थाने के चक्कर लगाते रहे। हर बार उन्हें अलग-अलग कारण बताकर वापस भेज दिया गया। कभी जांच का हवाला दिया गया तो कभी बाद में आने के लिए कहा गया। इस दौरान न तो एफआईआर दर्ज हुई और न ही चोरी का खुलासा करने की दिशा में कोई कार्रवाई हुई। सात महीने बाद दर्ज हुआ मामला करीब सात महीने बाद, 28 जुलाई 2026 को मधुसूदनगढ़ पुलिस ने आखिरकार चोरी का प्रकरण दर्ज किया। एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और चोरी गए सामान तथा आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल इस मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर चोरी जैसी संज्ञेय वारदात में शिकायत मिलने के बाद तत्काल एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की जाती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। पीड़ित का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो चोरी का खुलासा होने की संभावना अधिक रहती। थाना प्रभारी ने स्वीकार की देरी मधुसूदनगढ़ थाना प्रभारी गोपाल चौबे ने माना कि मामले में एफआईआर दर्ज होने में देरी हुई है। उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आते ही तत्काल प्रकरण दर्ज कराया गया और अब नियमानुसार जांच की जा रही है। अब जांच पर टिकी उम्मीद एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच कर चोरी गए जेवरात बरामद करेगी और आरोपियों को गिरफ्तार करेगी। वहीं, सात महीने बाद दर्ज हुई एफआईआर ने जिले में पुलिस की कार्यशैली और शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।