समाचार · पंजाब
अमृतसर में भारत-पाकिस्तान मैत्री सम्मेलन:राज स्मृति बोलीं- युद्ध से जनता हारती है, हथियार कारोबारी जीतते
अमृतसर के विरसा विहार में 31वां भारत-पाकिस्तान मैत्री सम्मेलन एवं सेमिनार आयोजित किया गया। इस सम्मेलन का संयुक्त आयोजन हिंद-पाक दोस्ती मंच, फोकलोर रिसर्च अकादमी अमृतसर, पाकिस्तान-इंडिया पीपल्स फोरम फॉर पीस एंड डेमोक्रेसी और पंजाब जागृति मंच जालंधर ने किया। सम्मेलन में भारत-पाकिस्तान संबंधों, विभाजन के दर्द और दोनों देशों के बीच शांति व आपसी भाईचारे को मजबूत करने पर विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने एकमत से कहा कि युद्ध किसी भी देश की आम जनता के हित में नहीं है। दोनों देशों के लोगों की खुशहाली के लिए शांति और बातचीत का रास्ता अपनाना आवश्यक है। लखनऊ से आईं राज स्मृति ने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान लोगों ने जो दर्द और पीड़ा झेली, उसे आज की पीढ़ी को समझना चाहिए। राज स्मृति के अनुसार, युद्ध से आम लोगों को सबसे अधिक नुकसान होता है, जबकि हथियार बनाने वालों को लाभ मिलता है। राज स्मृति बोली- तीनों देश मिलकर आगे बढ़े राज स्मृति ने भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोगों से मिलकर शांति और प्रगति की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि आम लोग चुप रहने के बजाय शांति के लिए अपनी आवाज उठाएं, तो युद्ध की जगह अमन का माहौल बनाया जा सकता है। डॉ. सुनीलम ने भारत और पाकिस्तान के साझा इतिहास तथा संस्कृति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच पुराने समय से आपसी रिश्ते रहे हैं। डॉ. सुनीलम ने विभाजन को एक बड़ी त्रासदी बताया, जिसमें लाखों लोगों को विस्थापन और हिंसा का दर्द झेलना पड़ा था। उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों देशों को हथियारों पर भारी खर्च करने के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और रोजगार के अवसर पैदा करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। डॉ. सुनीलम के अनुसार, खुशहाली के लिए शांति और शांति के लिए बातचीत अत्यंत आवश्यक है। डॉ. सुनीलम ने भारत और पाकिस्तान की सरकारों के बीच बातचीत की वकालत की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोग शांति, व्यापार और आपसी संपर्क बढ़ाना चाहते हैं। लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और एक बेहतर भविष्य चाहिए, युद्ध नहीं।