Friday, 14 August 2026
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आजादी के जश्न से ठीक पहले खगड़िया में भयंकर 'पोस्टर वॉर'! बीच चौराहे पर टंगे एक बैनर ने मचाया ऐसा कोहराम, जानें क्या है पूरा सच

INT News14 August 2026 at 09:46 pm

क्या आजादी के राष्ट्रीय पर्व से ठीक पहले देश की राजनीति में एक नया उबाल आने वाला है? बिहार के खगड़िया जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने स्वतंत्रता दिवस की खुशियों के बीच सियासी गलियारों में बारूद की तरह आग लगा दी है. यहाँ शहर के सबसे व्यस्त चौराहे पर लगाया गया एक राजनीतिक बैनर इस समय पूरे बिहार में चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है. इस बैनर में देशभक्ति और विचारधारा को लेकर सीधे तौर पर ऐसी बातें लिखी गई हैं, जिसने शहर के सियासी तापमान को अचानक सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है.

एक बैनर और दो फाड़ हुई सियासत: 'मोहब्बत की दुकान' बनाम 'नफरत का बाजार'

यह पूरा बवाल खगड़िया शहर के सबसे प्रसिद्ध राजेंद्र चौक पर जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा लगाए गए एक बड़े बैनर के बाद शुरू हुआ है. स्वतंत्रता दिवस के ठीक पहले सार्वजनिक रूप से लगाए गए इस बैनर को बहुत ही आक्रामक और दो हिस्सों में बांटकर डिजाइन किया गया है. बैनर के एक हिस्से में बहुत ही करीने से 'कांग्रेस परिवार' लिखा गया है, जिसमें साल 1947 की आजादी, राष्ट्रीय ध्वज को देश की असली शान बताना, स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों को नमन करना, 'जय संविधान' का नारा देना और राहुल गांधी की चर्चित लाइन 'मोहब्बत की दुकान' जैसे नारों को बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया है.

'गोडसे' और 'अंधभक्त' जैसे शब्दों से तीखा वार, उड़ गए सबके होश

विवाद और चर्चा की असली वजह इस बैनर का दूसरा हिस्सा है, जिसे कांग्रेस ने 'संघ परिवार' नाम दिया है. इस हिस्से में सीधे तौर पर संघ और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विचारधारा पर अब तक का सबसे बड़ा और तीखा राजनीतिक प्रहार किया गया है. बैनर में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देश की आजादी की लड़ाई में संघ की भूमिका को लेकर बेहद कड़े सवाल खड़े किए गए हैं. इतना ही नहीं, इसमें 'नफरत का बाजार', 'जय गोडसे' और 'अंधभक्त' जैसे बेहद संवेदनशील और भारी शब्दों का खुलकर इस्तेमाल किया गया है. कांग्रेस ने विपक्षी विचारधारा पर संविधान को बदलने की आशंका से जुड़े गंभीर कटाक्ष भी किए हैं, जिससे इस राष्ट्रीय पर्व से पहले विवाद और गहरा गया है.

चौराहे पर उमड़ी भारी भीड़, मगर विपक्ष की रहस्यमयी चुप्पी

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सरेराह लगे इस बैनर को देखने के लिए राजेंद्र चौक पर राहगीरों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं का साफ कहना है कि स्वतंत्रता दिवस केवल ढोल-नगाड़े बजाने का दिन नहीं है, बल्कि यह उन लोगों को याद करने का दिन है जिन्होंने देश के लिए जान दी और संविधान की रक्षा की. इसी संदेश को जनता के बीच ले जाने के लिए यह बैनर लगाया गया है. हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि कांग्रेस के इतने आक्रामक और सीधे हमले के बावजूद अभी तक भाजपा या संघ परिवार की ओर से कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. इस चुप्पी ने राजनीतिक हलकों में सस्पेंस और ज्यादा बढ़ा दिया है.